Dear @drhemangjoshimp sir, this is the condition of road in my area (Haveli resicum plaza, Makarpura)
Please do the needful. In last monsoon, I lodge a grievance in PMO portal and @VMCVadodara threw some gravels and close the complaint!
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भगवान् ने इस प्रकार अपनी योगमाया से अपने ऐश्वर्यमय स्वरूप को छिपा रखा था। वे ऐसी लीलाएँ करते, जो ठीक-ठीक गोपबालकों की-सी ही मालूम पड़तीं। स्वयं भगवती लक्ष्मी जिनके चरणकमलों की सेवा में संलग्न रहती है, वे ही भगवान् इन ग्रामीण बालकों के साथ बड़े प्रेम से ग्रामीण खेल खेला करते थे।
जिनके नाभिकमल से उत्पन्न हुए है, वे ही आनन्दस्वरूप परमात्मा विष्णु इस जगत् का पालन करते है।
उनसे बढ़कर दूसरा कोई नहीं है। वे सम्पूर्ण जगत् के अन्तर्यामी आत्मा है।
समस्त संसार में वे ही व्याप्त हो रहे है।
वे सबके साक्षी तथा निरञ्जन है। l
[Narad Purana]
त्रय्या चोपनिषद्भिश्च सांख्ययोगैश्च सात्वतैः ।
उपगीयमानमाहात्म्यं हरिं सामन्यतात्मजम् ॥
सारे वेद, उपनिषद्, सांख्य, योग और भक्तजन जिनके माहात्म्य का गीत गाते-गाते अघाते नहीं—उन्हीं भगवान् को यशोदाजी अपना पुत्र मानती थी।
[Srimad Bhagavatam 10.8.45]
इत्थं विदिततत्त्वायां गोपिकायां स ईश्वरः ।
वैष्णवीं व्यतनोन्मायां पुत्रस्नेहमयीं विभुः ॥
जब इस प्रकार यशोदा माता श्रीकृष्ण का तत्त्व समझ गयीं, तब सर्वशक्तिमान् सर्वव्यापक प्रभु ने अपनी पुत्रस्नेहमयी वैष्णवी योगमाया का उनके हृदयमें संचार कर दिया। यशोदाजीको तुरंत वह घटना भूल गयी
भगवान् मधुसूदन संसाररूपी भयङ्कर एवं दुर्गम वन को दग्ध करने के लिये दावानलरूप है।
महर्षियो! भगवान् श्रीहरि अपना स्मरण करने वाले पुरुषों के सब पापों का उसी क्षण नाश कर देते है।
भगवान् विष्णु सर्वदेवमय है।
वे अपना स्मरण करने वाले भक्तों की समस्त पीड़ाओं का नाश कर देते है।
उनके नामका बिना श्रद्धा के भी कीर्तन अथवा श्रवण कर लेने पर मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो अविनाशी वैकुण्ठ धामको प्राप्त कर लेता है।
[Narad Purana]
उन्हींकी शक्ति महामाया है, जो जगत् की सत्ता का विश्वास धारण कराती है।
विश्व की उत्पत्ति का आदिकारण होने से विद्वान् पुरुष उसे प्रकृति कहते है।
आदिसृष्टि के समय लोकरचना के लिए उद्यत हुए भगवान् महाविष्णु के प्रकृति, पुरुष और काल—ये तीन रूप प्रकट होते है।