I am thankful to every INDIA alliance MP standing firm in defence of our democracy - in Parliament, outside on the streets, and today near Jantar Mantar.
They can stop a march. They can refuse a meeting. But they cannot stop the will of our people.
Narendra Modi, Amit Shah, Gyanesh Kumar and the entire system will be brought to justice.
We are not going to stop protesting till Gyanesh Kumar resigns.
This is a fight to protect the most sacred thing in this country.
There is nothing that Narendra Modi and Amit Shah can do that will stop us.
हम इस देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार - इन लोगों ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। इन्होंने देश को वोट चोरी से हाईजैक किया है। मेरे देश के खिलाफ जो किया गया है, वह देशद्रोह है। जो लोग भी इसमें शामिल हैं, कोई भी बचेगा नहीं। इन सबके खिलाफ कार्रवाई होगी।
~ राहुल गांधी जी, नेता प्रतिपक्ष
दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है - जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।
जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। महिला पत्रकारों के कैमरे छीने गए, उन्हें घसीटा गया। एक पत्रकार की शिकायत पर FIR तक दर्ज नहीं हुई।
कुछ हफ्तों पहले शाहीन और नफ़ीसा ने साकेत थाने के अंदर अपने साथ हुई हिंसा और बदसलूकी की आपबीती सुनाई है। सोचिए, थाने के अंदर - वो जगह जहां महिलाएं शिकायत लेकर जाती हैं।
जिन पर महिलाओं की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, वही आज उनके लिए ख़तरा बन रहे हैं। और दिल्ली पुलिस किसके अधीन है - यह पूरा देश जानता है।
साकेत थाने का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई हो। शाहीन, नफ़ीसा और जिनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने हिंसा और बदतमीज़ी की है उनको न्याय मिले।
अमित शाह जी - आप और आपकी पुलिस महिलाओं से डरती क्यों है?
It is now established beyond doubt that Gyanesh Kumar changed Form 6 illegally and unilaterally.
This is just one more proof of him abusing his position to help the BJP.
He and everyone else involved in this criminal assault on our democracy will be held accountable.
महाराष्ट्र के छात्र फडणवीस सरकार की शिक्षा व्यवस्था और अन्याय से त्रस्त हैं।
आदिवासी छात्र अपनी माँगें लेकर मुंबई पहुँचे - कुछ बस से, और कुछ पैदल चलकर।
उनकी माँगें क्या हैं? आदिवासी आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएँ। छात्रवृत्ति। वही चीज़ें जो किसी भी बच्चे का हक़ हैं।
मुंबई में रुकने की जगह नहीं थी, तो कांग्रेस ने उन्हें तिलक भवन में ठहराया। और आज सुबह होने से पहले - पुलिस कांग्रेस कार्यालय के अंदर घुसी और इन बच्चों को उठाकर ले गई। आज़ाद मैदान पर प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही। जो बच्चे नासिक से पैदल चलकर आए, उनको ये जवाब मिला।
उधर पुणे में MPSC के अभ्यर्थी सत्याग्रह पर बैठे हैं। ये माँगें नई नहीं हैं - मैंने मुख्यमंत्री फडणवीस से इन पर बात की थी। तब कुछ नहीं हुआ। इसीलिए आज ये बच्चे सड़क पर हैं।
मैं और कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र के छात्रों के साथ खड़े हैं। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
More than 300 Opposition MPs marched from Parliament to the Election Commission today to meet the Election Commissioners.
We represent crores of Indians.
- Why aren't the Election Commissioners meeting us?
- Why is the police stopping and threatening us?
बिहार में बाढ़ फिर कहर बनकर टूटी है। लाखों लोग प्रभावित हैं, सैकड़ों गांव डूबे हुए हैं। कई लोगों की मौत और लापता होने की खबर है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है।
सबसे दुखद बात यह है कि बिहार में यह संकट नया नहीं है। हर साल बाढ़ आती है, मौतें होती हैं, परिवार उजड़ते हैं और लोग पलायन करते हैं। BJP की डबल इंजन सरकार बताए - पिछले 17 साल में इस सालाना त्रासदी से निपटने के लिए क्या किया? ज़मीन पर क्या बदला? बिहार के लोगों को हर साल राहत और आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
पुणे में 'छात्रों की गूँज' के दौरान महाराष्ट्र के छात्रों ने अपनी पूरी समस्या मेरे सामने रखी थी - पेपर लीक, रुकी भर्तियाँ, महँगी पढ़ाई, बदहाल हॉस्टल, ज़हर जैसा खाना, और DBT में धोखाधड़ी।
मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा था - MPSC में सुधार कीजिए, परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी बनाइए, इन बच्चों की सुनिए।
कुछ नहीं हुआ। इसीलिए आज वही छात्र पुणे में सत्याग्रह पर बैठे हैं।
उनकी मांगे साफ़ हैं:
→ MPSC अध्यक्ष इस्तीफ़ा दें, और उनकी जगह एक ईमानदार, योग्य अधिकारी आए
→ 70,000+ ख़ाली सरकारी पद तुरंत भरे जाएं
ये मांगे नाजायज़ नहीं हैं। इन पर कार्रवाई चाहिए - आश्वासन नहीं।
महाराष्ट्र स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति ने अपना आंदोलन 'सत्याग्रह' पर दर्ज किया।
युवा कांग्रेस और NSUI इस आंदोलन के साथ लगातार खड़े थे - उनसे कहा है कि छात्रों की मांगे पूरी होने तक उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर लड़ते रहना। मैं ये मुद्दा महाराष्ट्र सरकार के सामने फिर से उठाकर इसके स्थायी समाधान की मांग करूंगा।
जो संस्था छात्रों का भविष्य तय करती है, उस पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है। हम इसे ऐसे ही नहीं चलने देंगे।
#Satyagraha
Satyagraha went live 9 hours ago. Since then, more than 10,000 people and groups have come forward.
That's how many struggles Indians are already fighting - quietly, convinced no one was listening.
We are listening. Every submission will be read. Already, we see stories in the topics of education, corruption, social justice, farmers, labour, health, women’s safety, land and environment.
Our team will go through each one, work out how we can help, and reach out where more details are needed. Where any genuine struggle needs to be amplified to be resolved, we will do it.
This is only the beginning. Satyagraha isn't a one-day campaign. It will run for years, and it will stand with every andolan, big or small.
Thank you for speaking up and for standing up for the Constitution.
If you haven't yet, tell me your story 👉 https://t.co/hJ8iARr5La
जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है।
घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ इतनी माँग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया।
आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।
और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।
पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।
और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आख़िर किसकी हिफ़ाज़त कर रही है?
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहाँ हैं आप? जवाब आपको ही देना है।
Arguably the best spices in the world are grown in Wayanad but climate change and inflation are creating hardship for farmers across India. With a little support the pepper farmers of Wayanad could multiply their produce many fold.
Thank you all for sparing time to explain your problems to me and for giving me a glimpse into your dreams for the future. I hope to be able to resolve some of your issues in the near future.
कहीं छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं।
कहीं किसान अपनी ज़मीन के लिए लड़ रहे हैं।
कहीं आशा कार्यकर्ता महीनों से मानदेय की मांग कर रही हैं।
कहीं आदिवासी अपने जंगल बचाने के लिए खड़े हैं।
हर आंदोलन अपनी अलग लड़ाई लड़ रहा है इसलिए हर आंदोलन को लगता है कि वो अकेला है।
इसलिए 'सत्याग्रह' - आपका आंदोलन जहाँ भी चल रहा हो, उसकी बात सीधे मुझ तक पहुँचाइए। दो मिनट लगेंगे - दिल्ली आने की ज़रूरत नहीं।
आपका आंदोलन नक्शे पर आ जाएगा - और आप देख पाएँगे कि देश में और कौन-कौन वही लड़ाई लड़ रहा है।
बिखरे हुए आंदोलन दबा दिए जाते हैं। जुड़े हुए आंदोलन सरकारें झुका देते हैं।
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
आज गांधी जयंती है।
और आज ही, हज़ारों नौजवान वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं - शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए।
उनकी माँग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। लोकतंत्र बचाओ।
और Modi-Shah सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ़ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा।
बापू ने यही सिखाया था - सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज़्यादा डराता है।
क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।
ज्ञानेश कुमार जाएँगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।
The online Form 6 was changed illegally - as the EC's own Commissioners have recorded.
Who at the ECI ordered Tata Consultancy Services to make that change?
Who at TCS signed off on it? And were they pressured into doing it?