यहाँ पे मैं असहमत हूं
इलाज करना आता ही नहीं मोदी जी को
मोदी जी फोड़े को बवासीर बनाते हैं फिर बवासीर को कैंसर बनने का इंतजार करते हैं
कितनी बार मोदी जी ने थूक कर चाटा है
CAA, शाहीन बाग, किसान आंदोलन, पंजाब में मोदी जी का रास्ता रोक लिया था अभी कॉकरोचों ने तो मोदी जी की मार ...
देख @abhijeet_dipke
ये धमकी देना बंद कर , आंदोलन था कर लिया , ये तेरी अम्मी जान का मुजरे वाला ठिकाना नहीं है जो तू रोज़ आंदोलन करने बैठेगा।
संविधान की लाल किताब पकड़कर हीरो बनना था , बना दिया , अब ये मत भूलना की जिसको तू धमकी दे रहा है उसे तेरे जैसे आदमियों का इलाज अच्छी तरह करना आता है। 5-10000 की टोली लेकर दिल्ली जाम कर दी एक बार तो इसको सरकार की कमजोरी मत समझना , दिल्ली पुलिस को आदेश नहीं था तेरे आंदोलन को कुचलने का वरना तेरा धरना सरकार चाहती तो 1 घंटे में खत्म कर सकती थी।
अगर भविष्य का सरजील इमाम और उमर खालिद बनना है तो वो तेरी मर्जी है क्यूंकि जिन युवाओं को तू बरगलाने का सोच रहा है वो अब नहीं आएंगे, यकीन ना हो तो कोशिश करके देख लेना ।
तुम्हारा शुभचिंतक
@ArunKosli
आज से 10 साल पहले मेरे क्षेत्र के 10 किलोमीटर में कंही भी शराब नहीं मिलती थी,
लेकिन अब 3 किलोमीटर के रेडियस में 4 दुकानें देशी शराब की हैं, और ये हाल ग्रामीण क्षेत्र का है।
और उन दुकानों में कभी भी शराब की शॉर्टज नहीं होती है,
लेकिन क्या बात है कि किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रही है, मिल भी रही है तो 600 से 700 रुपए बोरी मिल रही है, और ये हाल प्राइवेट दुकानों का है, प्राइवेट दुकानों में सरकारी गोदामों की खाद कैसे पहुंच रही है।
शिवराज सिंह चौहान @ChouhanShivraj जी, आप आज तक के सबसे फेल कृषि मंत्री हो, जिस तरह से किसानों को लूटा जा रहा है, तुम गहरी नींद में सोए हो।
@dmfatehpur
बिहार के पुलों का मज़ाक उड़ाने वालों, देहरादून के 16 करोड़ वाले पुल का हाल देख लो। गलती ठेकेदारों की नहीं है, सारा गन्ना इथेनॉल बनाने में चला गया है। अब डामर चिपकाने के लिए गुड़ नहीं बचेगा, तो पुल चाहे बिहार का हो या उत्तराखंड का... पहली बारिश में ही जल-समाधि लेगा!
बहुत लोगों को आरक्षण हटाओ नाम से समस्या है। इसे अव्यावहारिक और मूर्खतापूर्ण भी कहा गया। लेकिन किसी भी आंदोलन की शुरुआत बड़े लक्ष्य से होती है। हमारा उद्देश्य तत्काल आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि वर्तमान स्वरूप की आरक्षण व्यवस्था पर राष्ट्रीय चर्चा शुरू करना है।
मैं स्वयं कई बार कह चुका हूँ कि मौजूदा परिस्थितियों में आरक्षण हटाना संभव नहीं है। फिर भी इस आंदोलन का समर्थन इसलिए है कि जब तक समाज इस विषय पर खुलकर बात नहीं करेगा, तब तक कोई राजनीतिक दल भी इसे मुद्दा नहीं बनाएगा। यदि लाखों लोग अपने परिवार और समाज में इस पर चर्चा शुरू करें, तो संसद और विधानसभाओं तक भी यह विषय पहुँच सकता है।
पहला कदम यही है कि आँकड़ों और तथ्यों पर चर्चा हो। क्या आरक्षण का सबसे बड़ा लाभ कुछ ही प्रभावशाली जातियों तक सीमित रह गया है? पिछले 70 वर्षों में वास्तविक लाभ किसे मिला? जिन समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बदल चुकी है, उनकी समीक्षा क्यों नहीं होती? इन प्रश्नों पर बात होना आवश्यक है।
यदि “आरक्षण हटाओ” शब्द से आपत्ति है, तो इसे “Reservation Reforms” या “वर्तमान स्वरूप की आरक्षण व्यवस्था में सुधार” भी कहा जा सकता है। हमारा उद्देश्य व्यवस्था की समीक्षा और सुधार है।
इसी तरह जाति हटाओ का अर्थ यह नहीं कि जाति एक दिन में समाप्त हो जाएगी। लेकिन जातिवाद पर चर्चा तो होनी ही चाहिए। अपनी पहचान पर गर्व अलग बात है, लेकिन उसी के आधार पर दूसरों को हीन समझना जातिवाद है।
EWS को पूर्ण समाधान नहीं माना जा सकता। यदि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र को पढ़ाई के लिए कर्ज लेना पड़े और वर्षों तक उसे चुकाना पड़े, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हमारा मत है कि प्राथमिक शिक्षा तक वंचित वर्गों को पूरा सहयोग मिले। लेकिन उच्च शिक्षा और प्रतिस्पर्धी चयन की व्यवस्था में वर्तमान आरक्षण मॉडल की समीक्षा होनी चाहिए। यदि सहायता दी जाए, तो उसका आधार वास्तविक आर्थिक और सामाजिक वंचना हो, न कि केवल जाति।
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
इधर निहांग स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट में घुस कर पुलिस वालों को तलवार दिखा और गाड़ी छीन रहे हैं |
उधर पंजाब में शांति से सड़क पर चल रही महिलाओं को पंजाब पुलिस सर पर पगड़ी लगा कर मार रही है | 😡
अब कल तक जो महिलाओं को जंतर मंतर पर पीटने की बात कर रहे थे आज बिलकुल शांत हैं |
Punjab Pharmacy Exam के पेपर लीक और नकल घोटाले पर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया चुप क्यों?
उन्होंने वादा किया था, पंजाब में एक भी स्कैम हुआ, तो शिक्षा मंत्री को हटाया जाएगा। AAP और इंडी गठबंधन के लोग पंजाब में प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे? हर मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले केजरीवाल-सिसोदिया अब जवाब क्यों नहीं दे रहे?
पंजाब और देश की जनता जवाब मांग रही है।
चलो भई ! हो ली किरान्ति पूरी
अब घर जाओ और अपनी अपनी ओकातनुसार
छोटे बड़े वकील तैयार रखो ओर इंतजार करो दिल्ली पुलिस के नोटिस का
तुम जो रील वायरल करने के चक्कर मे अश्लील स्लोगन लिखे होर्डिंग लिए थे , जो मोदी को गालियां बाकी थी
वो सब भी सार्वजनिक अश्लीलता फैलाने वाला दण्डनीय अपराध है भई
दिल्ली पुलिस ने फेस रिकनाइज एप से हजारों सीसीटीवी सोसल मीडिया से क्लिप ले कर तुम्हारे पोस्टर छापने चालू कर दिए है ।
ये तिलचट्टे ओर नेता , अब ऐसे गायब होंगे कि ढूंढते रह जाओगे
अरे जाओ उस कजरी को पकड़ो ओर कहो कि हमारे लिए वकील दो अब
बहुत चिल्ला रहा था वो
ओर जे
अभी भी गान का कीड़ा मरा नही है तो जाओ सिंघु बॉर्डर
अब अगले कुछ दिन मजमा वहां लगेगा
हम कल भी मोदी के साथ थे ,ओर आज भी मजबूती से खड़े है ।
ओर जिस दिन वाकई सरकार गलत होगी उस दिन सरकार खिलाफ सबसे आगे भी हम ही खड़े होंगे
पर किसी तुम्हारी तरह किसी राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा कभी नही बनेंगे
क्योंकि यही फर्क
यही समझ ह जो तुम में नही है
मुद्दों की पकड़ ओर नियत की समझ
बाकी हाथ मे सिगरेट ले कर गान हिलाते हुवे डफली बजाने से किरान्ति नही आती झंडू
उससे केवल गान टूटती है
जैसे अब तुम्हारी टूटने वाली है।
शुभकामनाएं
@Lawyer_Kalpana@Avi89262594@DrMohanYadav51 अब होगी जाँच, इन्क्वारी कमीशन बनेगा, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज कमीशन के चीफ बनेंगे और गलती उस सफाई कर्मचारी की निकलेगी जिसने डस्टिंग करते हुए दोनों शीशियां एक साथ उठा ली और फिर गलती से दोनों शीशियां जगह बदल कर रख दी
डॉक्टर की कोई गलती नहीं है कि
@ajeetbharti@RamNihalGupta3 मेरे विचार से तो जांच में गलती सफाई कर्मचारी की निकलेगी क्योंकि उसने डस्टिंग करते हुए दोनों शीशियां उठाई होंगी और 👁️ ड्रॉप की शीशी की जगह कफ सिरप की शीशी रख दी थी
नोकरी से निकलो उस सफाई कर्मचारी को
ड्रॉप डालने वाले की कोई गलती नहीं है
@sarviind अजीब घमचक्कर आदमी हो यार तुम तो गडकरी जी को रोड़ और हाईवे की याद दिला रहे हो
इथेनॉल पर बात करो,इथेनॉल पर
गडकरी जी को सिर्फ इथेनॉल याद है आजकल , गडकरी जी का सीधा फंडा है इथेनॉल मिला मिला कर गाड़ियों की चा मोद दो, फिर गाड़ियां सड़क पर निकलेगी हो नहीं
भारत सरकार अपने सारे नागरिकों पर जबरन प्रयोग कर रही है। निर्लज्जों की भाँति उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह कह दिया है। यानी, आपकी कार में डाले जाने के पूर्व जिस पेट्रोल को सैंपल इंजन में जाँचा जाना चाहिए था, वह इस सरकार ने सीधे करोड़ों बाइक और कारों में डलवा दिया।
>नाम रंजीत कुमार हिमांशु
>पद सन 2004 से बोकारो में चपरासी (संविदा कर्मी)
>जुर्म 4 साल पहले बचे हुए बिस्किट और चाय की पत्ती घर ले गए
>सजा नौकरी से बर्खास्तगी
>आरोप लगाया गया कि सरकारी सामान निजी इस्तेमाल के लिए लिया गया
>हिमांशु ने बाद में सामान वापस भी कर दिया था
>अब हाईकोर्ट ने नौकरी बहाल की है
>इतने बड़े अपराध के लिए फाँसी से कम की सजा नहीं होनी चाहिए
>जिस देश में अधिकारी 100 करोड़ का घोटाला करते हों वहाँ ये बिस्किट चुरा रहा
>क्या इसको इतनी छोटी चोरी करते हुए शर्म नहीं आयी
(चोरी चोरी होती है चाहे छोटी हो या बड़ी, काश ! बड़े चोरों को भी नौकरी से निकालना इतना आसान होता)
@Khurpenchbundel इस वीडियो पर मोहन यादव की PR टीम को मेरी सलाह
अबे तूचियों
चादरमोदो
लहन के बोरो
घर गरीब और कच्चा तो दिखा दिया और थाली 5 ⭐ होटल वाली दिखा दी
कुछ तो कोमन सेंस दिखा देते
ये साजिश है जी बीजेपी को बदनाम करने की ये घर कच्चा हो ही नहीं सकता,इस घर का मालिक गरीब हो ही नहीं सकता
थोड़ा थाली पर भी फोकस करो
इतने व्यंजनों वाली थाली और गरीब घर में
इसका मतलब मोहन यादव जी खाना अपने घर से लेकर आयें हैं
सब ai है जी
मध्य प्रदेश में भाजपा 21 सालों से सत्ता में है।
स्थिति -
1- कच्चा मकान
2- गैस कनेक्शन नहीं
3- बिजली कनेक्शन नहीं
21 सालों में जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पाए, और बड़े ही बेशर्मी से उनके घर पहुंच गए।
मध्य प्रदेश में भाजपा 21 सालों से सत्ता में है।
स्थिति -
1- कच्चा मकान
2- गैस कनेक्शन नहीं
3- बिजली कनेक्शन नहीं
21 सालों में जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पाए, और बड़े ही बेशर्मी से उनके घर पहुंच गए।