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(पुराना अखबार)
मुझे राजनीति का मुद्दा मत बनाओ क्योंकि, मैं युवाओं के रोजगार की उम्मीद हूं .... मैं अशोक पेपर मिल हूं
दरभंगा______________
मैं मिथिला की शान हूं। बिहार का धरोहर हूं। युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद हूं। .... हां, मैं अशोक पेपर मिल हूं। अपनी अस्तित्व में लौटने के लिए मैं 40 साल से तारणहार के इंतजार में हूं। मैं वहीं पेपर मिल हूं, जिसकी क्वालिटी की मुरीद पुरी दुनिया थी। प्रकाशन कंपनियों व संस्थानों की पहली डिमांड थी। बिहार को कागज उत्पादन की पहचान दिलाई। अपने जीवन काल में हजारों परिवार की मुस्कान बनी। कामगारों से लेकर व्यवसायियों को रोजगार दिया। लोगों को शिक्षित और समृद्व बनाया।
विडंबना है - जब आबादी व रोजगार की जरूरत कम थी तब मुझे अस्तित्व में रखा गया। आज देश को मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी उत्पादन और प्रदेश में रोजगार सृजन के लिए जब हमारी ज्यादा जरूरत है तो, मुझे बंद रखा गया है। उत्पादन शुरू कराने के नाम पर सियासत का केन्द्र बना दिया गया। चुनाव के समय ही सरकार व राजनीतिक दलों को मेरी याद आती है। इलेक्शन बीतते सभी अपने वादे भूल जाते हैं। अब मेरी पहचान औद्यौगिक विकास से भटक कर चुनावी मुद्दे हो होने लगी है। सरकार और सिस्टम की उपेक्षा से अब तो मेरे वजूद पर संकट गहराने लगा है। भू-माफियाओं की नीयत जमीन हड़पने के फिराक में लगी है। कई हिस्सों पर लोगों ने अतिक्रमण भी कर रखा है। मेरे वंशजों .... एक बार मुझे अस्तित्व में लाकर देखो, भरोसा देती हूं कि दरभंगा की मुस्कान फिर कभी फीकी नहीं पड़ेगी।
50 हजार से ज्यादा लोग जुड़े थे रोजगार से : मिल में करीब दो हजार कामगार नौकरी पर थे। इनमें से 800 लोग नियमित और 1200 कर्मचारी कैजुअल ड्यूटी पर थे। इस मिल के कर्मचारी व मजदूर पंचायत के मुख्य संरक्षक शुभ कांत झा व बतौर सुपरवाइजर के पद पर काम कर चुके हैं। उनके सहकर्मी अखिलेश्वर मिश्र ने बताया कि उत्पादन और डिमांड इतना था कि परिवहन के लिए रेल लाइन बिछाई गई थी। पूरे जिले में खुशहाली थी। कामगारों के अलावे 50 हजार से ज्यादा लोग पेपर के व्यवसाय और इसके रोजगार से जुड़े थे।
37 साल में नहीं मिला तारणहार, अब 400 एकड़ जमीन पर गड़ी है भू-माफियाओं की नजर
दरभंगा महराज की मौत के बाद : राजनीति के भंवर में फंस गई धरोहर
40 साल पहले मिथिला की अनार्थिक समृद्धि का एक सशक्त माध्यम कागज का उत्पादन था। जिला मुख्यालय दरभंगा से 8 किलोमीटर दूर हायाघाट प्रखंड के बलहा गांव में बंद पड़ा अशोक पेपर मिल वर्ष 1983 से बंद पड़ा है। वर्ष 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित विनोद नंद झा, पटना के बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन व दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह के प्रयास व पंूजी में हिस्सेदारी से 400 एकड़ जमीन पर इस मिल की आधारशिला रखी थी। तब इसके निर्माण पर करीब 5 करोड़ की लागत आ रही थी। शिलान्यास के दो साल बाद साल 1962 में भारत और चीन की लड़ाई शुरू हो गई थी। चाइना वार की वजह से प्राइस इंडेक्स के कारण इसकी लागत बढ़ कर 8 करोड़ हो गई थी। उसी दौरान दरभंगा महाराज की मृत्यु हो गई थी।
इससे निर्माण कार्य ठंडे बस्ते पड़ गया था। वर्ष 1971 में सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की नजर इस बंद मिल पर पड़ी। उनके प्रयास से बिहार सरकार व असम सरकार के संयुक्त तत्वावधान में मिल का निर्माण शुरू हुअा। साल 1975 से इस मिल से विभिन्न प्रकार के कागजों का उत्पादन शुरू हो गया। वर्ष 1982 तक मिल अच्छे तरीके से चला। यहां के कागज की डिमांड विदेशों में ज्यादा थी। बाद में सरकारी उदासीनता व अन्य पेपर मिलों की साजिश से उत्पादन घटते गया और 1983 में मिल बंद हो गई।
37 साल में सात विस चुनाव में बना मुद्दा
अशोक पेपर मिल आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। लोगों की उम्मीद जगती है कि शायद मिल चालू हो जाए, लेकिन चुनाव बीतते ही सभी वादे भूल जाते हैं। 41 सालों में पार्लियामेंट के 8 और विधान सभा के 8 चुनाव संपन्न हो चुके हैं। हर बार अशोक पेपर ही यहां चुनावी मुद्दा बना है।
12 नवम्बर 2003 को मिल में ताला लगाकर गोधा फरार हो गया। तब से यह मिल बंद है। कानूनी लड़ाई चल रही है।
सौजन्य: दैनिक भास्कर, संपादित अंश (4 वर्ष पूर्व प्रकाशित)
"देसवा", ये फिल्म भोजपुरी में २०१० - २०११ में मैंने निर्देशित की थी | समस्याएँ वहीँ थी बिहार की जो मोटा मोती आज भी हैं | फिल्म में ये सीन हिंदी में है | राजीव कुमार UPSC की तइयारी कर रहा था लेकिन वो सफल नहीं होता है उसमे और गाँव आकर एक स्कूल में टीचर बन जाता है | घटनाएं कुछ ऐसी होती हैं की राजीव को अपराध का सहारा लेना पड़ता है | ये फिल्म पहली भोजपुरी फिल्म है जो भारतीय अंतर राष्ट्रीय फिल्म समारोह में चुनी गई | पूरी फिल्म Bejod पर देखिये |
मधुबनी - दरभंगा
मुजफ्फरपुर - हाजीपुर
बेतिया - मोतिहारी
किशनगंज - पूर्णिया
भागलपुर - मुंगेर
छपरा - सिवान - गोपालगंज
आरा - बक्सर
बिहारशरीफ - जहानाबाद
डिहरी - सासाराम
नवादा - गया
इन सब छोटे शहरों को twin city के तर्ज़ पर विकास की ज़रूरत है | विकास मतलब क्या ? रोड - सड़क, विकास नहीं है, ज़रूरत है | Pre Requisite जिसको कहते हैं | जैसे स्वस्थ शरीर जरुरत है और अच्छी क्वालिटी की पढ़ाई, संस्कृति, भाषा, साहित्य, संगीत की शिक्षा या जानकारी, कला में रूचि, gym जाकर मांसपेशियाँ बनाना इत्यादि उस शरीर का विकास | बिहार की जनता इतनी त्रस्त हो चुकी है दशको से की सड़क बिजली को ही विकास समझने लगी है | माननीय मुख्यमंत्री जी को चाहिए की सबसे पहले, सबसे पहले मतलब सबसे पहले बिहार की भाषाओं पर काम करें | कोई समाज बिना अर्थव्यवस्था, सामजिक विकास और संस्कृति के आगे नहीं बढ़ सकता और किसी भी समाज की आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक विकास की पहली सीढ़ी उस समाज के लोगों के ज़बान पर रहने वाली उनकी मातृभाषा है | जिस तरह बिहार के लोगों की भाषाओं को मारा जा रहा है हम कभी विक्सित नहीं हो पाएँगे | विकास का पहला पायदान "मातृभाषा" को ही कुचल दिया गया है | भोजपुरी - मैथिली - मगही का विकास ही बिहार में विकास लाएगा | आप ब्रिज सड़क बिजली के लिए पावरहाउस तो बना रहे हैं लेकिन उस इंसान को नहीं बना रहे हैं जो इस सड़क पर चलेगा जो उस बिजली का इस्तेमाल करेगा | इसलिए जीतनी जल्दी हो सकते बिहार के सीबीएसई ICSE स्कूलो में चौथी से लेकर दसवीं तक मातृभाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य हो | भोजपुरी - मगही को आठवीं सूची में डाला जाए l साथ में इंडस्ट्री स्टार्टअप पर काम चलता रहे l और कोई रास्ता नहीं है |
असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा का ऐलान
"असम में 3 से अधिक बच्चे होने पर महिलाओं को नहीं मिलेगी कोई सरकारी मदद"
इसे कहते हैं, मर्दों वाली बात 💪ठोको मित्रों
हे डायन ममता बानो
तेरी क्या दुश्मनी है इन निहत्ते संतों से
वर्दी वाला गुंडा कैसे बेरहमी से संतों को
मार रहा, और दूसरे संतों की दाढ़ी खींच रहे😔
तुझे नरक में भी जगह न मिलेगी जिहादन🖐️
ममता बनर्जी एक बात याद रखना🖐️
संतों की "हाय" उद्धव ठाकरे को निगल गयी
तुमने संतों को नंगा करके पिटवाया है
तुम्हारा पतन अब सुनिश्चित हो गया है
पहले पालघर अब पुरुलिया
राम नाम कर अमित प्रभावा,
संत पुरान उपनिषद गावा।
आज विमान द्वारा अयोध्या जी के महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डे पर उतरने के उपरांत के कुछ दृश्य… बहुत ही सुंदर एयरपोर्ट है
जय श्रीराम 🙏🏼
सनातन के संस्कृति और संस्कार को मिटाने का और राष्ट्रवाद को कमजोर करने वाले मानसिकता रखने वाले INDI गठबंधन बंगाल में हुएं साधुओं पर हमले का निंदा प्रस्ताव पारित करे और टीम भेजे और अविलंब कारवाई करें।
#hindu#हिंदू
इसे कहते हैं standup कॉमेडी, ना बेहूदगी ना गाली-गलौंच ना फूहड़ता, ज़बरदस्त कंटेंट और बेहतरीन mimicry, परिवार के साथ देखने लायक, ऐसे standup कॉमेडियन आज कल कम ही दीखते हैं, मुझे उम्मीद है आने वाले समय में @DeepakComedian standup कॉमेडी कि दुनिया में राज करेंगे, शुभकामनाएं 💐🙏