A few years ago, Ashu had a high-paying corporate job in London, earning millions. Saurav was writing about the country’s legal system and living a great life. Both had successful careers, financial security and every reason to continue living the lives they had built for themselves.
But they chose to give it all up in the hope of making this country a better place. They had absolutely no reason to leave behind their comfortable lives, take to the streets, face uncertainty and eventually end up in jail. Yet they did.
What I admire most about these two is that despite coming from privileged backgrounds, they chose to fight for those who aren’t as fortunate. They could have easily looked the other way, enjoyed their lives and never bothered about the struggles of people they had never even met. Nobody asked them to make these sacrifices. Nobody expected them to. But they did, because they genuinely care about people beyond themselves.
And to me, that is the greatest quality a human being can have. To stand up for people you don’t know, to fight battles that aren’t your own, and to risk everything you have so that someone else might have a better life.
That’s the kind of people Ashu and Saurav are.
कॉकरोच कई दिनों से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इस दौरान महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की एक भी घटना सामने नहीं आई। वहीं, भाजपा और आरएसएस के गुंडे एक ही दिन आए और अपना असली चरित्र दिखा दिया।
#cockroachjanataparty#jantarmantar#cjp#GyanuMustResign
🚨IMPORTANT ANNOUNCEMENT🚨
Gyanesh Kumar is India’s Enemy Number 1. Even a minute of his continuance as Chief Election Commissioner is unacceptable.
In view of this, the Cockroach Janta Party has resolved to call for a national protest in Delhi on 10th of October.
Jaha rokenge, waha baithenge, woh kehlayega Jantar Mantar!
The young generation will ensure Gyanu’s resignation and fix our Election Commission. Because no country and its dreams survive theft of voting rights! The Gen Z will reclaim our nation. Start marching to Delhi folks! #DilliChalo
Inquilab Zindabad! ✊🏻🇮🇳🪳
@Cockroachisback@abhijeet_dipke@AshutoshRanka@whattalawyer
This is a critical time for our country. A compromised Election Commission being led by a traitor is on its way to destroy the whole and sole of our democracy.
We will not let this happen.
In its meeting today evening, the NWC of @Cockroachisback has unanimously decided to take the protest straight to Jantar Mantar and demand justice for millions of Indians who have been disenfranchised by Gyanesh Kumar.
It’s time for India to peacefully assemble in Delhi on Oct 10. And reclaim our democracy.
#ChaloDilli
#ChaloJantarMantar
They are dividing us in the name of Hindu & Muslim and taking away our voting rights.
We must not let them divide us. We must all come together to save our country and our voting rights!
If Gyanesh Kumar doesn’t resign, cockroaches from across India will march to Delhi & protest at Jantar Mantar on October 10.
If Delhi Police tries to stop us, wherever they stop us will become our Jantar Mantar..
Ours will be a peaceful andolan. We will walk on the path shown by Mahatma Gandhi. It is up to the Govt & the Delhi Police whether they respect our right to peaceful protest or repeat the brutality we witnessed on July 20.
This is a fight to save our democracy. Every citizen who wants free & fair elections must join.
यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए��
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं हैं।
आज मैं इनकी झुग्गी में गया और सीधे इन्हीं से सुना कि चुनाव आयोग ने इनके साथ क्या किया है।
SDM से फ़ोन पर मैंने यही कहा - मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। ख़ुद CEC ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि "हाउस नंबर 0" बेघरों के लिए है। फिर भी 727 लोगों का नाम काट दिया गया।
यह SIR नहीं - यह वोट चोरी का तरीक़ा है। जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताक़त छीनी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार तो जाएँगे। पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा।
#VoteChori
दिल्ली की BJP सरकार के एक मंत्री वीडियो में एक नौजवान को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं।
उसका गुनाह? वो वीडियो बना रहा था।
मंत्री के सामने सड़क खोदकर दिखाई जा रही थी, और उसके हाथ में कैमरा था।
ये उस सत्ता का चेहरा है जिसे अब वोटर से डर लगना बंद हो गया है।
सड़क पर सवाल पूछो - थप्पड़।
पेपर लीक पर सवाल पूछो - लाठी।
संसद में सवाल पूछो - माइक बंद।
ये लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इन्हें अब ये डर ही नहीं कि चुनाव इन्हें हटा सकता है। वोट चोरी यही ख़रीदती है - सिर्फ़ नतीजा नहीं, उसके बाद आने वाला अहंकार भी।
जो सरकार जीत को पक्का मान लेती है, उसे आपकी रज़ामंदी नहीं चाहिए - आपकी ख़ामोशी और अंधभक्ति चाहिए।
हम���रा सिस्टम किस तरह से आम आदमी का खून चूसता है, उसे तड़पाता है, उसका उत्पीड़न करता है, इसे समझना है तो अमायरा का केस फॉलो कर लीजिए।
जिन्हें नहीं पता, अमायरा नौ साल की बच्ची थी। हंसती खेलती बच्ची। स्कूल में बेस्ट ऑलराउंडर। डांस में चैंपियन। म्यूजिक में चैंपियन। पढ़ने में चैंपियन।
लेकिन अमायरा को उसकी क्लास के बच्चे तंग करते थे। बुली करते थे। बच्चों से क्या उम्मीद करें? बच्चे तो बच्चे होते है। ज़िम्मेदारी टीचर्स की है। कि वो बच्चों को समझाये। उन्हें सही ग़लत में फ़र्क़ महसूस कराए।
लेकिन नीरजा मोदी स्कूल के टीचर्स ने ऐसा नहीं किया। एक नवंबर 2025 को बच्चे लगातार अमायरा को तंग कर रहे थे। बच्ची उठ कर पाँच बार टीचर्स से शिकायत करने गई। क्लास टीचर मोबाइल फोन में व्यस्त थी और दूसरी टीचर, जिसे उस समय क्लास लेनी थी, वो क्लास नहीं ले रही थी। अमायरा साफ़ तौर पर बहुत परेशान दिख रही थी। बातचीत के बीच ही वो क्लास से निकल गई। किसी टीचर ने उसे रोका नहीं। किसी ने यह तक नहीं पूछा कि कहाँ जा रही हो? वो स्क���ल में भागती हुई चौथी मंजिल की तरफ़ गई, लेकिन रास्ते में भी किसी ने उसे नहीं रोका।
बच्ची से अपमान सहा नहीं गया। वो स्कूल की चौथी मंजिल पर गई और छलाँग लगा दी।
लेकिन असली कहानी यहाँ से शुरू होती है।
आपको पता है कि घटना के बाद स्कूल ने क्या किया? सबसे पहले झाड़ू पोंछा लगाकर सारे खून के धब्बे मिटाए। सीसीटीवी फुटेज ग़ायब करने की कोशिश की। लगातार पुलिस को गुमराह किया।
लेकिन सीबीएसई ने इस मुद्दे पर स्टैंड लिया। उन्होंने सुरक्षा जाँच में कई ख़ामिया पायी, और स्कूल की 9 से 12 तक की मान्यता रद्द कर दी। कुछ समय बाद सीबीएसई ने 9 और 10 की मान्यता फिर से देदी।
लगा कि अब इंसाफ़ होगा। लेकिन इस देश में आम आदमी के साथ इंसाफ़ होता कहाँ है?
नीरजा मोदी स्कूल ने अपने रुतबे का फ़ायदा उठाकर, बड़े से बड़े वकील लगाकर उच्च न्यायालय में सीबीएसई के निर्णय पर रोक ��े ली।
राजस्थान सरकार इस दौरान सोती रही। 18 मार्च 2026 को जिस दिन सीबीएसई के आदेश पर उच्च न्यायालय से रोक मिली, उसी दिन राजस्थान शिक्षा विभाग ने सीबीएसई के आदेश को कॉपी पेस्ट करके अपना आदेश निकाल दिया। और अपने उसी आदेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर कमियां भी दर्ज कीं। लेकिन फिर 2 अप्रैल की न्यायालय की सुनवाई में राजस्थान सरकार ने खुद ही न्यायालय को बताया कि उसने अपने 18 मार्च वाले आदेश को रोक दिया है।
अमायरा को गए हुए दस महीने हो गए। लेकिन कुछ नहीं बदला। प्रिंसिपल को कुछ नहीं हुआ। स्कूल आराम से चल रहा है। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया, तो उसमें सही धाराएं ही नहीं लगायी। मजिस्ट्रेट न्यायालय ने भी परिवार की शिकायत पर सुनवाई नहीं की और सभी आरोपियों को जमानत दे दी। अब सत्र न्यायालय को परिवार की उस शिकायत पर निर्णय लेना है जिसमें आरोपियों पर सही धाराएं लगाने की मांग की गई है। लेकिन चार बार तारीखें मिल चुकी हैं औ��� अभी तक आदेश नहीं किया गया।
सिस्टम में कुछ नहीं बदला - ना मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान गया, ना सुरक्षा जाँच हुई, ना सुरक्षा मानकों को दुरुस्त किया गया। ना अमायरा को इंसाफ़ मिला।
बस एक परिवार को तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है।
लेकिन यह सिस्टम एक बात भूल गया है।
आज का भारत जंतर मंतर के बाद का भारत है। अब जनता अपने हक के लिए तुमसे भीख नहीं माँगेगी। अब जनता इंसाफ़ के लिए तुम्हारे आगे गिड़गिड़ाएगी ���हीं। अब जनता दर दर की ठोकरे नहीं खायेगी।
अब जनता उठ खड़ी होगी। अब जनता तुम्हारी हेंकड़ी और तुम्हारी अकड़ को उखाड़ फेंकेगी।
मैंने और @abhijeet_dipke ने अमायरा के माता पिता विजय-शिवानी से वादा किया था कि अमायरा को इंसाफ़ दिलाने तक चुप नहीं बैठेंगे। जंतर मंतर पर अमायरा की तस्वीर पूरे समय मौजूद थी।
तो हम अमायरा के मुद्दे पर सिस्टम से सिर्फ एक ही बात कहना चाहेंगे। अगर आपको लग रहा है कि अमायरा का परिवार अकेला है और उन्हें आप ऐसे तड़पा सकते है, तो यह आपके जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी।
अमायरा हम सबकी बच्ची है। न्याय करिए। पूरा देश देख रहा है।
@BhajanlalBjp
सत्य निकेतन की त्रासदी को तीन दिन बीत गए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही।
छात्रों की मौत पर जवाब देने के बजाय VC कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। आखिर छात्रों की जान की जवाबदेही कौन लेगा? NSUI चुप नहीं बैठेगी।
जवाबदेही तय होगी और दोषियों पर कार्रवाई होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।