अब सोप दिया है इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में ,
है हार तुम्हारे हाथों में
मुझे में और तुझ में बस एक फरक , मैं नर हु तुम हो नारायण
मैं हु संसार के हाथों में
और संसार तुम्हारे हाथों में
जय श्री श्याम 🙏🙏
@ashokgehlot51@bhagchandtankda
रक्षाबंधन पर अब बाईजी का दुलार, उनका आशीर्वाद और वह वात्सल्य भरा आँचल बहुत याद आता है। बाईजी हम भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं।
रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर निवास पर पधारे एक आगंतुक बाईजी के साथ मेरी पेंटिंग लेकर आए। यह पेंटिंग जिस तस्वीर से बनी है वह कुछ वर्षों पूर्व के रक्षाबंधन के अवसर की ही तस्वीर थी।
इस भेंट ने बाईजी के साथ बिताए उन आत्मीय पलों की अनगिनत यादें ताज़ा कर दीं।
आपने तो आपने साहब को भावुक कर दिया!
उनको बहन जी से बहुत लगाव था! चाहे कितनी व्यस्तता हो जोधपुर आके बहन जी से जरूर राखी बँधवाते थे रक्षाबंधन के त्योहार पे!
नंबर वन नेता! सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री! ना भूतों ना भविष्यति!
जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया है। यह कोई संयोग नहीं बल्कि केंद्र सरकार की सोची-समझी रणनीति लगती है, ताकि जाति जनगणना का मुख्य उद्देश्य ही खत्म हो जाए और सही आंकड़े कभी सामने न आएं। जब जातिगत जनगणना की घोषणा की गई तब सबने इसका स्वागत किया था परन्तु अब जिस तरह भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है, वह दिखाता है कि मोदी सरकार की नीयत ठीक नहीं है।
सरकार ने "मुक्त प्रश्न" (Open ended questions) का तरीका चुना है, जिसमें हर व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज होगा। भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है। नतीजा यह होगा कि एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और पूरा आंकड़ा ही अनुपयोगी हो जाएगा। सबसे गंभीर बात, इस जनगणना में "पिछड़ा वर्ग" शब्द तक शामिल नहीं है, यानी पिछड़ा वर्ग की सही आबादी का पता ही नहीं चलेगा।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे और श्री राहुल गांधी ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि जातियों की एक सूची पहले से बनाई जाए, ठीक वैसे ही जैसे तेलंगाना (2024) और बिहार (2022) के जाति सर्वेक्षणों में किया गया था।
केंद्र सरकार को इस त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया को तुरंत रद्द कर, राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से बातचीत कर नई प्रश्नावली बनानी चाहिए, ताकि जाति जनगणना सटीक, सार्थक और लाभकारी साबित हो।
यह सुनिए, एक तारानगर चूरु का गरीब किसान क्या बोल रहे है गहलोत साहब के लिए!
“गरीब वर्ग के लिए गहलोत जैसा मुख्यमंत्री आज तक तो आया नहीं! गरीब गहलोत से बहुत ही खुश है”
और इसलिए वह गरीब के गणेश कहलाते है!
और एक उठाईगिरा जातिवाद की लाईलाज बीमारी से ग्रस्त अपनी दिहाड़ी के लिए कितना घटिया किस्म की बातें करता है!