जब मैं अपने अन्तिम शब्द लिखूँगी..
ईश्वर को पाषाण लिखूँगी, रिश्तों को बेड़ियाँ लिखूँगी, प्रेम को पाखंड लिखूँगी...,
सुख को भ्रम लिखूँगी, दुख को सत्य लिखूँगी...
और स्वय��� को पीड़ा लिखूँगी...!
मेरा बस एक ही सपना है अब गन्नू की मै दूसरों के लिए हमेशा कुछ कर पाऊं मुझे बहुत पसंद है ऐसे लोगों के लिए कुछ करना उनके साथ समय बिताना सुकून है बप्पा इन ��ें दिखावे की इस दुनिया से मुझे वो दुनिया ज्यादा खूबसूरत लगती है🙏🙏मुझे लायक बनाना🙏🙏
गन्नू मेरी हमेशा से ये ख्वाहिश है कि मैं लोगों के लिए कुछ कर पाऊं बस इतना इच्छा देना मुझे क्योंकि पैसा कम भी रहा तब भी शायद मैं ये सब कर लूंगी लेकिन इच्छा नहीं रहेगी तो बहुत पैसा होने के बाद भी मैं ये सब नहीं कर पाऊंग शुक्रिया बप्पा🙏🙏🥹🥹
इस बार ला��� बाग का मेरा अनुभव बहुत अलग रहा मैंने सोचा था बारिश होगी भीगते हुए जाऊंगी पुणे से कैसे होगा दर्शन मेरा और तबियत ऐसी है पिछले कुछ वक्त से कि कभी बहुत बीमार कभी ठीक ही है।।जब मुम्बई उतरी तो सिद्धिविनायक गई वहां से सिद्धिविनायक की भीड़ देख कर लगा अब दर्शन मुश्��िल होगा
मेरा ये अनुभव मुझे बहुत खुशी दे गया बहुत बढ़िया काम नहीं किया या बहुत बड़ा काम नहीं था मेरा पर उस एक वक़्त में जो सुकून और खुशी मिली मुझे उसका अंदाजा भी कोई नहीं लगा पाएगा।।
वापसी का वक़्त आ गया है बप्पा तुम्हारे शहर से तुम्हारा आशीर्वाद लेकर जा रही हु।।आँख नम है यहां आके तुमसे मिलने की खुशी और कुछ बिछड़ने कि यादें आंखों में आँसू भर दे रही है🥹
मैं कुछ कहूं न कह���ँ जानती हु कि मैं क्या कहना चाहती हु तुम अच्छे से समझ रहे हो🥹