सदियों का इंतजार आज होगा खत्म...
अयोध्या में रामलला मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा की समस्त देशवासियों को अनंत बधाई एवं शुभकामनाएं।
।।सियावर रामचंद्र की जय।।
🙏🙏🚩🚩
सर्गस्थितिविनाशानां जगतो यो जगन्मयः।
मूलभूतो नमस्तस्मै विष्णवे परमात्मने॥
भगवान श्री हरि के 'योगनिद्रा' में गमन की पावन तिथि देवशयनी एकादशी पर त्रिलोक स्वामी से प्रार्थना है कि उनकी कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर सर्वदा बनी रहे।
सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार हो।
🔴अक्षय तृतीया🔴
अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं ।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया ।
उद्दिश्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यै: ।
तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।।
"मदनरत्न"
भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठर से कहते हैं, हे राजन इस तिथि पर किए गए दान व हवन का क्षय नहीं होता है; इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहा है । इस तिथि पर भगवान की कृपादृष्टि पाने एवं पितरों की गति के लिए की गई विधियां अक्षय-अविनाशी होती हैं ।
वैशाखे मासि राजेन्द्र! शुक्लपक्षे तृतीयिका।
अक्षया सा तिथिः प्रोक्ता कृत्तिका- रोहिणीयुता।
तस्यां दानादिकं सर्व्वमक्षयं समुदाहृतमिति
भविष्यपुराण, मत्स्यपुराण, पद्मपुराण,गरुड़ पुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण, स्कन्दपुराण में इस तिथि का विशेष उल्लेख है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है। इस दिन देवताओं व पित्रों का पूजन किया जाता है। पितरों का श्राद्ध कर विधिवत धर्मघट दान किया जाना शुभ कहा गया है।
वैशाख मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है अतः विशेषतः विष्णु जी की पूजा करें।
इस दिन जल से भरे कलश, पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली, खरबूज, तरबूज, खड़ाऊँ/जूता/चप्पल , छाता और वस्त्र का दान शुभ माना जाता है।
इस दिन सत्तू अवश्य खाना और लोगों को खिलाना चाहिए, सत्तू का दान भी करें।
परशुराम जन्मोत्सव का पर्व भगवान विष्णु के छठे स्वरूप के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।
हर वर्ष परशुराम जन्मोत्सव का पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था इसीलिए प्रदोष काल में जब तृतीया तिथि प्रारंभ होती है तब इसे परशुराम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम जगत के पालनहार विष्णुजी के छठे अवतार हैं। भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों अश्वत्थामा, राजा बलि, परशुराम, विभीषण, महर्षि व्यास, हनुमान, कृपाचार्य इनमें से एक हैं।
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के परम भक्त परशुराम जी न्याय के देवता हैं, जिन्होंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था।
तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह करीब 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को ही मनाई जाएगी, क्योंकि प्रदोष काल उसी दिन पड़ रहा है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। कठिन कामों को पूरा करने की ताकत मिलती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।
भगवान परशुराम के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏
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ॐ श्री रामाय नमः 🙏
राम नवमी का पर्व भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव है, जो हर वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस पावन दिन पर रामलला की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ होता है। आइए जानते हैं इस पर्व के कुछ लाभकारी उपाय:
1. रामलला की विशेष पूजा: राम नवमी के दिन सुबह स्नान कर भगवान राम की मूर्ति या तस्वीर के सामने पीले पुष्प, चंदन और मिठाई अर्पित करें। आरती और भोग लगाएं, इससे घर में सुख-शांति का वास होता है।
2. व्रत का महत्व: इस दिन व्रत रखकर भगवान राम को प्रसन्न करें। व्रत में फलाहार और सात्विक भोजन का सेवन करें। व्रत रखने से मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
3. राम रक्षा स्तोत्र का पाठ: राम नवमी पर राम रक्षा स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। यह जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
4. श्री रामचरितमानस का पाठ: विशेष रूप से बालकांड का पाठ करें। इससे भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
5. राम मंत्र का जाप: भगवान राम के मंत्रों का जाप करें, जैसे "ॐ श्री रामाय नमः"। 108 बार जाप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में समृद्धि आती है। इस दिन भगवान श्री राम के श्री राम जय राम, जय-जय राम मन्त्र का जाप करना अति कल्याणकारी माना गया है, इस मंत्र का कभी भी और कहीं पर भी जाप किया जा सकता है।
राम नवमी का पर्व रामायण काल से मनाया जा रहा है, मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा के साथ श्रीराम की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिलता है।
श्री राम नवमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें, जय श्री राम 🙏
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आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान — रायमलवाड़ा, लोहावट
लोहावट के रायमलवाड़ा में आज “आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान” के तहत गूंजा जनसंकल्प — “हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी।”
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा परिवार ने यह दृढ़ निश्चय दोहराया कि भारत की सशक्ति अपने ही श्रम, अपने ही उत्पाद और अपने ही लोगों के सहयोग से संभव है।
यह अभियान केवल स्वदेशी उत्पादों के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को नई ऊर्जा देने का माध्यम बन रहा है। यह आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की जन-जागृति है — जो हर नागरिक को अपनी मिट्टी, अपने श्रम और अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखा रही है।
मोदी जी का “वोकल फॉर लोकल” का संदेश आज लोहावट की धरती से जन-जन तक पहुँच रहा है — एक सशक्त, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में।
देव उठनी (प्रबोधिनी) एकादशी: कल🔆
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उत्तिष्ठो तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते।
त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
प्रबोधिनी एकादशी को चातुर्मास के चार महीने पूर्ण होते हैं, और इस दिन भगवान श्री हरि योग निद्रा से जागते हैं।
LOC पर गांव खाली कराए जा रहे हैं,
एयरबेस हाई अलर्ट पर हैं,
और रावलपिंडी में पूरी रात जनरल और वज़ीर एक ही टेबल पर मुँह लटकाए बैठे हैं—क्योंकि उन्हें मालूम है कि इस बार मोदी चुप नहीं बैठेगा।
कश्मीर के पहलगाम में हुए नरसंहार ने सिर्फ लहू नहीं बहाया, बल्कि भारत के सब्र की हर सीमा को रौंद डाला है।
पाकिस्तान के जनरल्स की टाँगें काँप रही हैं....
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हनुमान जयंती या जन्मोत्सव ❓
"हनुमज्जयन्ती शब्द हनुमज्जन्मोत्सव की अपेक्षा विलक्षणरहस्यगर्भित है "
जल्द ही हनुमान जयन्ती महोत्सव आ रहा है। आजकल वाट्सएप्प से ज्ञानवितरण करने वाले एक "मूर्खतापूर्ण सन्देश" सर्वत्र प्रेषित कर रहे हैं कि "हनुमान जयन्ती न कहकर इसे हनुमान जन्मोत्सव" कहना चाहिए ; क्योंकि जयन्ती मृतकों की मनायी जाती है ।
यह मात्र "भ्रान्ति" ही है ।
पहले जयन्ती का अर्थ प्रस्तुत किया जाता है --
जयं पुण्यं च कुरुते जयन्तीमिति तां विदुः --स्कन्दमहापुराण,तिथ्यादितत्त्व,
जो जय और पुण्य प्रदान करे उसे जयन्ती कहते हैं । कृष्णजन्माष्टमी से भारत का प्रत्येक प्राणी परिचित है । इसे कृष्णजन्मोत्सव भी कहते हैं । किन्तु जब यही अष्टमी अर्धरात्रि में पहले या बाद में रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो जाती है तब इसकी संज्ञा "कृष्णजयन्ती" हो जाती है --
रोहिणीसहिता कृष्णा मासे च श्रावणेSष्टमी ।
अर्द्धरात्रादधश्चोर्ध्वं कलयापि यदा भवेत् ।
जयन्ती नाम सा प्रोक्ता सर्वपापप्रणाशिनी ।।
और इस जयन्ती व्रत का महत्त्व कृष्णजन्माष्टमी अर्थात् रोहिणीरहित कृष्णजन्माष्टमी से अधिक शास्त्रसिद्ध है । इससे यह सिद्ध हो गया कि जयन्ती जन्मोत्सव ही है । अन्तर
इतना है कि योगविशेष में जन्मोत्सव की संज्ञा जयन्ती हो जाती है । यदि रोहिणी का योग न हो तो जन्माष्टमी की संज्ञा जयन्ती नहीं हो सकती--
चन्द्रोदयेSष्टमी पूर्वा न रोहिणी भवेद् यदि ।
तदा जन्माष्टमी सा च न जयन्तीति कथ्यते ॥--नारदीयसंहिता
अयोध्या में श्रीरामानन्द सम्प्रदाय के सन्त कार्तिक मास में स्वाती नक्षत्रयुक्त कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को हनुमान् जी महाराज की जयन्ती मनाते हैं --
"स्वात्यां कुजे शैवतिथौ तु कार्तिके कृष्णेSञ्जनागर्भत एव मेषके ।
श्रीमान् कपीट्प्रादुरभूत् परन्तपो व्रतादिना तत्र तदुत्सवं चरेत् ॥
--वैष्णवमताब्जभास्कर
कहीं भी किसी मृत व्यक्ति के मरणोपरान्त उसकी जयन्ती नहीं अपितु पुण्यतिथि मनायी जाती है । भगवान् की लीला का संवरण होता है । मृत्यु या जन्म सामान्य प्राणी का होता है । भगवान् और उनकी नित्य विभूतियाँ अवतरित होती हैं । और
उनको मनाने से प्रचुर पुण्य का समुदय होने के साथ ही पापमूलक विध्नों किम्वा नकारात्मक ऊर्जा का संक्षय होता है ।
इसलिए हनुमज्जयन्ती नाम शास्त्रप्रमाणानुमोदित ही है --
"जयं पुण्यं च कुरुते जयन्तीमिति तां विदुः" --स्कन्दमहापुराण, तिथ्यादितत्त्व
जैसे कृष्णजन्माष्टमी में रोहिणी नक्षत्र का योग होने से उसकी महत्ता मात्र रोहिणीविरहित अष्टमी से बढ़ जाती है । और उसकी संज्ञा जयन्ती हो जाती है । ठीक वैसे ही कार्तिक मास में कृष्णपक्ष की चतुर्दशी से स्वाती नक्षत्र तथा चैत्र मास में पूर्णिमा से चित्रा नक्षत्र का योग होने से कल्पभेदेन हनुमज्जन्मोत्सव की संज्ञा " हनुमज्जयन्ती" होने में क्या सन्देह है ??
एकादशरुद्रस्वरूप भगवान् शिव ही हनुमान् जी महाराज के रूप में भगवान् विष्णु की सहायता के लिए चैत्रमास की चित्रा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा को अवतीर्ण हुए हैं --
" यो वै चैकादशो रुद्रो हनुमान् स महाकपिः।
अवतीर्ण: सहायार्थं विष्णोरमिततेजस: ॥
--स्कन्दमहापुराण,माहेश्वर खण्डान्तर्गत, केदारखण्ड-८/१००
पूर्णिमाख्ये तिथौ पुण्ये चित्रानक्षत्रसंयुते ॥
चैत्र में हनुमज्जयन्ती मनाने की विशेष परम्परा दक्षिण भारत में प्रचलित है ।
इसलिए वाट्सएप्प में कोपी पेस्ट करने वालों गुरुजनों के चरणों में बैठकर कुछ शास्त्र का भी अध्ययन करो । वाट्सएप्प या गूगल से नहीं अपितु किसी गुरु के सान्निध्य से तत्त्वों का निर्णय करो ।
अरे भाई, जयन्ती का अर्थ पुण्यतिथि नहीं होता। *हनुमान जयन्ती मनाओ। धूमधाम से मनाओ।*
शास्त्र कहते हैं
जयंतीनामपूर्वोक्ता हनूमज्जन्मवासरः तस्यां भक्त्या कपिवरं नरा नियतमानसाः।
जपंतश्चार्चयंतश्च पुष्पपाद्यार्घ्यचंदनैः धूपैर्दीपैश्च नैवेद्यैः फलैर्ब्राह्मणभोजनैः।
समंत्रार्घ्यप्रदानैश्च नृत्यगीतैस्तथैव च तस्मान्मनोरथान्सर्वान्लभंते नात्र संशयः॥
हनुमान के जन्म का दिन जयंती नाम से बताया गया है। उस दिन भक्तिपूर्वक, मन को वश मे करके, पुष्प, अर्घ्य चंदन से, धूप, दीप से, नैवेद्य से, फलों से, ब्रह्मणों को भोजन कराने से, मंत्रपूर्वक अर्घ्य प्रदान करने से तथा नृत्यगीता आदि से कपिश्रेष्ठ का जप, अर्चना करते हुए मनुष्य सभी मनोरथों को प्राप्त करते हैं, इसमें कोई संशय नहीं है।
साभार- आचार्य सियारामदास नैयायिक जी
या ईश्वर को छोड़ दो......
या ईश्वर के ऊपर छोड़ दो.....
एक प्रसिद्ध कैंसर स्पैश्लिस्ट था|
नाम था मार्क,
एक बार किसी सम्मेलन में
भाग लेने लिए किसी दूर के शहर जा रहे थे।
सप्तर्षियों में से एक,, वैदिक काल के महर्षि एवं मन्त्रद्रष्टा न्याय शास्त्र के प्रणेता अक्षपाद महर्षि गौतम जी की जयंती की शुभकामनाएं.
#महर्षि_गौतमाय_नमः 👏👏