कितना बड़ा मजाक किया गया भारत वर्ष के इतिहास के साथ.... लेख साभार एक लेखक की यात्रा गाथा से.....
एक बार मेरा मित्र अपने दोस्तों के साथ हिमाचल के पालमपुर से होकर ट्रेकिंग पर जा रहे थे, मार्ग में माँ भगवती ज्वाला जी का प्रसिद्ध मंदिर आता है, जोकि कांगड़ा नगर से 30 किलो मीटर दूर एक नदी के तट पर है। हमने सोचा चलो माँ भगवती के दर्शन करते हुए चलते हैं....
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नार्को पॉलीग्राफ ब्रेन मैपिंग कानून होता तो अमानुल्ला सहित दिल्ली के सभी दंगाइयों को 6 महीने में सजा मिल जाती
लेकिन कानून घटिया है इसलिए 5 साल बाद भी किसी दंगाई की न तो 100% संपत्ति जब्त हुई, न तो नागरिकता खत्म हुई और न तो आजीवन कारावास हुआ
ड���क्टर अच्छा है लेकिन दवा घटिया है
यह फोटो गाजियाबाद की है और जाने माने वकील अश्विनी उपाध्याय जी अपने मोबाइल से खींचा है ।। फोटो ध्यान से देखें और बीबी-बच्चों की संख्या बतायें ।।
यदि आपको लगता है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है तो ।। अपने सांसद से मिलकर जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग करें और माननीय जो कुछ कहते हैं उसे सोशल मीडिया में शेयर करें ।।
@AshwiniUpadhyay
घटेंगे तो कटेंगे
जहां-जहां घटे, वहां-वहां कटे
हिंदुओं का हाथ-पैर काटकर जिंदा जला दिया
मकान-दुकान खेत-खलिहान पर कब्जा कर लिया
कानून घटिया है, न्याय व्यवस्था सड़ी हुई ��ै इसलिए न तो किसी की नागरिकता समाप्त हुई, न तो किसी की १००% संपत्ति जब्त हुई और न तो किसी को आजीवन कारावास हुआ
તૃતીય ક્રમાંકના વિજેતા દ્વારા બનાવવામાં આવેલી શોર્ટ ફિલ્મ.
જેમાં જોકરના કેરેક્ટર દ્વારા શહેરીજનોનું ધ્યાન આકર્ષે છે અને ટ્રાફિક નિયમના પાલન અંગેની જાગૃતિ આપે છે.
@ahmedabadpolice @gujaratpolice_
मोहन भाग मत, लड़ना सीख!
मोहन भागवत जी भगवान कृष्ण ने कहा है "अन्याय को सहन करना भी पाप है"
हम अपना हक़ ले रहे हैं, दूसरे का नहीं।
आप को ग़लत लग रहा है तो गद्दी छोड़ दीजिए RSS की।
अब हिंदू रुकेगा नहीं, अपना मंदिर ले कर रहेगा।
#MohanBhagwat#मोहन_भागवत
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जय हिंदुत्व |
जय सिया राम |
राहुल गांधी भारत में बार बार मोदी सरकार को हटाने में असफल होने पर बार बार अमेरिका ही क्यों जाते हैं,
वह आप इस लेख से समझ जाएंगे ।
ब्रिटिशों ने ईरान के तेल व्यापार पर अपना दबदबा कायम कर लिया था, ईरान के तेल उत्पादन का 84% हिस्सा इंग्लैंड को जाता था और केवल 16% ईरान को।
1951 में, एक कट्टर देशभक्त मोहम्मद मोसादेग प्रधानमंत्���ी बने।
उन्हें ईरान के तेल व्यापार में विदेशी कंपनियों का दबदबा पसंद नहीं था।
15 मार्च, 1951 को उन्होंने संसद में ईरान के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के लिए एक विधेयक पेश किया, जिसे बहुमत से पारित कर दिया गया।
इस विधेयक के पारित होने के बाद, ईरानियों को खुशी के सपने आने लगे, कि अब उनकी गरीबी दूर हो जाएगी!
टाइम्स पत्रिका ने 1951 में मोसादेग को "मैन ऑफ द ईयर" कहा!
अंग्रेजों ने मोसादेग को हटाने के लिए क�� छोटे-बड़े प्रया�� किए,
मोसादेग को रिश्वत देने की कोशिश की,
मोसादेग की हत्या करने की कोशिश की,
सैन्य तख्तापलट की कोशिश की, लेकिन मोसादेग बहुत अनुभवी और बुद्धिमान था, इसलिए अंग्रेजों की हत्या, रिश्वतखोरी की साजिशें विफल हो गईं।
मोसादेग ईरानी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय था।
लोकप्रिय होने के कारण, सैन्य तख्तापलट भी संभव नहीं था।
अंत में अंग्रेजों ने अमेरिका से मदद मांगी।
अमेरिका की CIA ने मोसादेग को हटाने क�� लिए ,1 मिलियन डॉलर का फंड मंजूर किया। 1 मिलियन डॉलर 4250 करोड़ रियाल (ईरानी मुद्रा) के बराबर है!
अमेरिका की योजना मोसादेग के खिलाफ असंतोष पैदा करने और उसके प्रति लोगों के समर्थन को खत्म करने की थी, फिर भ्रष्ट सांसदों की मदद से उसकी सरकार को उखाड़ फेंकना था।
अमेरिका ने बड़ी संख्या में ईरानी पत्रकारों, संपादकों, मौलवियों को 631 करोड़ रियाल का भुगतान किया। बदले में उन पत्रकारों, संपादकों और मुस्लिम मौलवियों को सिर्फ एक ह��� काम करना था, वह था लोगों को मोसादेग के खिलाफ भड़काना।
हजारों ईरानियों को झूठे विरोध में भाग लेने के लिए भुगतान किया गया। उन्होंने संसद पर मार्च करना शुरू कर दिया। दुनिया भर के बड़े मीडिया ने भी अमेरिका का समर्थन करना शुरू कर दिया।
मोसादेग का विरोध बहुत ही निचले स्तर पर शुरू हुआ, जिसमें कार्टूनों में उन्हें समलैंगिक के रूप में दर्शाया गया। उसी प्रकार जैसे मोदीजी के दाम्पत्य जीवन को निशाना बनाया जाता है ।
मोसादेग को तानाशाह कहा जाने लगा।
यह महसूस करते हुए कि उनकी सरकार भ्रष्ट सांसदों द्वारा उखाड़ फेंकी जाने वाली है।
मोसादेग ने संसद को भंग कर दिया।
अंत में, 210 मिलियन रियाल की रिश्वत देकर, अमेरिका ने भाड़े के सैनिकों की मदद से ईरान की राजधानी में फर्जी दंगे भड़काए।
सम्राट के ईरान लौटने के बाद कैद किया गया और फिर उसकी मृत्यु तक उसे घर में ही नजरबंद रखा गया।
उसके बाद, अमेरिका और इंग्लैंड ने ईरानी तेल का 40-40% हिस्सा साझा किया और शेष 20% अन्य यूरोपीय कंपनियों को दे दिया गया।
दशकों तक ईरानी लोगों को शाह की तानाशाही के अधीन रहना पड़ा। एक क्रांति ने राजशाही को समाप्त तो कर दिया; लेकिन फिर कट्टरपंथी खोमैनी सत्ता में आए और ईरानी लोगों की स्थिति और भी खराब हो गई।
मोसादेग का अपराध क्या था..?
देश के क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों के बजाय स्वदेशी कंपनियों का वर्चस्व होना चाहिए! यह नीति उनका अपराध थी..?
मोसादेग के नेतृत्व में, ईरान 1955 से पहले एक पूर्ण लोकतांत्रिक देश बन सकता था, और इसके तेल उत्पादन से केवल ईरान को ही लाभ हो सकता था।
लेकिन ईरान के भ्रष्ट सांसदों, पत्रकारों, संपादकों, प्रदर्शनकारियों ने ईरान के समृद्ध भविष्य को मात्र दस लाख डॉलर में बेच दिया।
दमन के इस दौर में ईरानी लोगों को यह एहसास होने लगा कि मोसादेग की सरकार को उखाड़ फेंकने में अमेरिका का हाथ था।
अमेरिकन एजेंसीज और डीप स्टेट बड़े तरीके से आयल ,माइन���ंग, ड्रग्स, मेडिसिन, वेपन सप्लाई, एरोस्पेस, केमिकल, बैंकिंग, इंटरनेट, मीडिया, सोसल मीडिया, सिनेमा लगभग 300 क्षेत्रों के माध्यम से सारी दुनिया पर होल्ड बनाई हुए हैं।वे अपने आदमी बैठा ही लेते हैं। जैसे ही कोई नेशन अपने हितों पर सोचना शुरु करता है वह डिस्टर्ब कर देते हैं। दुनिया भर में डेमोक्रेसी को बढ़ावा इसीलिए दिया जाता है।
फ़र्ज़ी मुद्दे, फ़र्ज़ी किसान आंदोलन, फ़र्ज़ी आंकड़े, जातियों को आपस में लड़ाना, अल्पसंख्यक समु��ाय को उकसाना, कम्युनिस्ट लॉबी द्वारा राष्ट्रविरोधी ताकतों को साथ देना, ये सब वे राष्ट्रघाती क़दम हैं जो आजकल भारत में जोरों पर हैं ताकि विदेशी अनिष्ट कारक ताकतों का भारत पर आर्थिक सामाजिक और प्रशासनिक नियंत्रण हो जाये।
तुम्हारे देश में तुम्हे प्रसाद में गौ मांस की चर्बी खिला दी तुम्हारे नेता चुप हैं, और तुम्हारे ही हिन्दू नेताओ ने मुसलमानो के लिए पर्सनल लॉ बनाया ताकि 4 बीवी 40 बच्चे क��� सकें, और वक्फ बना कर अब तुम्हारे घरो पर भी कब्ज़े हो रहे हैं, मुस्लिम देशो से ��ी सख्त कानून बनाये मुसलमानो के पक्ष में हिन्दू देश में
परिवार सहित जान पहचान में कई सरकारी टीचर है।
90% योगी सरकार के ख़िलाफ़ है।
कारण- समय पर स्कूल जाना पड़ता है, काम करना पड़ता है।
पहले ये सब जुगाड़ से हो जाता था।
समाधान बताइए ?