दैनिक जागरण वालों ने हमेशा की तरह इस बार भी अध्यापकों के लिए जो बोला है वो बहुत ही निंदनीय है। अब हम सबको अपने घरों से दैनिक जागरण को Boycott करना है।
#BoycottDainikJagran
अगर सिर्फ अख़बार ही ईमानदार हो जाये तो देश हित में बहुत से काम सही होने लग जाये, लेकिन ऐसी गलत पत्रिकारिता की वज़ह से ही पत्रिकारिता की रैंकिंग दिन पर दिन गिरती जा रही है।
#BoycottDainikJagran
#Justiceforschoolschildren@DrDCSHARMAUPPSS
क्रांतिकारी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और अभिभावक साथियों
सादर प्रणाम
ट्विटर महा अभियान में किया हुआ आपका हर एक ट्वीट आपके और गरीब बेसहारा बच्चों के भविष्य की सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करेगा
आज 1 बजे ट्विटर महाभियान
समाज सेवा के छह मूल मंत्र
1) समाज के लिए लड़ो
2) लड़ नहीं सकते तो लिखो, (ट्विटर, सोशल, प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया एवं पर)
3) लिख नहीं सकते तो बोलो
4) बोल नहीं सकते तो साथ दो
5) साथ भी नहीं दे सकते तो जो लिख, बोल और लड़ रहे हैं, उनका सहयोग करो
6) यह भी न कर सको तो उनका मनोबल न गिराओ, क्योंकि वे आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे हैं
शिक्षक साथियों से अनुरोध है कि आज 1 बजे से ट्विटर अभियान में आप सभी ट्विटर पर ट्वीट और रिट्वीट करने का कष्ट करें
जिससे सरप्लस शिक्षक और विद्यालय मर्जर की आवाज को बुलंद किया जा सके और गूंगी बहरी सरकार के कानों तक इन छोटे-छोटे बच्चों की आवाज को पहुंचाया जा सके
ट्विटर अभियान 1 बजे से प्रारंभ होगा
हैश टैग #Justiceforschoolschildren
को सभी शिक्षक ट्विटर अभियान में कम से कम 300 ट्वीट अवश्य करें
एकता में ही बल है
मिलकर आवाज उठाओ तो सही,
नजरों से नजरें मिलाओ तो सही
गिरेंगी खुद ताश के पत्तों की तरह,
इन जुल्म की दीवारों को हिलाओ तो सही...
मुझे ये समझ नहीं आता है की विश्वगुरू बनने की बात करने वाले ये @UPGovt@BJP4UP@BJP4India@narendramodi सरकार शिक्षा रूपी मंदिर को बंद कर रही और मधुशाला खोले जा रही है।समाज के गरीब वंचित बच्चे अपने सपने यहीं से पुरा करते है,आप उनके सपनों के पर क्यों कतर रहे है?
#savevillageschool
#हरदोई का कार्यक्रम बहुत ही शानदार व जानदार रहा पुरी जिला एवं ब्लाक कार्यकारिणी सहित मंडल व प्रदेश के सभी साथियों का आभार और मीडिया के साथियों का विशेष आभार।
#Justiceforschoolschildren
सरकार 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करके ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रही है ।साथ ही 149 तक की छात्र संख्या वाले प्राथमिक एवं 99 तक की संख्या वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर रही है अर्थात् अब स्कूल बिना हेड मास्टर के चलाने की योजना है,जिससे शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर ही समाप्त हो गए हैं ।स्कूल बंद होने से हजारों रसोइयों की सेवा समाप्त होगी साथ ही भविष्य में शिक्षक बनने की उम्मीद लगाये बैठे DelEd/बीटीसी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की भर्ती नहीं हो पायेगी ।
प्रत्येक तिमाही पर रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह पर गर्व करने वाली सरकार को इस प्रकार का निर्दयी /कठोर निर्णय वापिस लेना चाहिए ।
हमारी माँग है कि कोई भी विद्यालय बंद न किया जाये ।यदि सरकार वास्तव में शिक्षा का हित चाहती है तो प्रत्येक कक्षा पर एक सहायक अध्यापक एवं प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक अनिवार्य रूप से नियुक्त किया जाये ।
सरकार के इस निर्णय से प्रभावित सभी साथियों से अनुरोध है कि 8 जुलाई को संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर प्रस्तावित धरने में उपस्थित होकर अपनी मांगों का समर्थन करें ।
बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी कह रहे हैं कि हमने प्रधान अध्यापकों के पद समाप्त नहीं किए हैं
हम कह रह कि पद यदि समाप्त नहीं है तो स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियुक्त प्रधान अध्यापक को सप्लस क्यों घोषित किया जा रहा है
तो अधिकारी का कहना है कि नियुक्ति बहीं होगी जहाँ पीएस में 150 तथा यूपीएस में 100 छात्र संख्या होगी क्योंकि आर टी ई के अनुसार बहाँ प्र अ नहीं होगा तो ऐसे पदों का शिक्षक क्या करेंगे ।
आर टी इ वर्ष 2009 में आया और उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में लागू किया
2011 से 2012 तक की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि यदि किसी विद्यालय में आपको न्यून तम २ स अ रखने हैं तो एक प्र अ एवं एक स अ रखिए तो उस सरकार ने इस सुझाव को माना और किसी भी प्र अ को नहीं हटाया गया
2012 से 2017 तक की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री राम गोबिंद चौधरी जी के समय भारत सरकार से आर टी ई के अनुसार शिक्षक तैनाती की बात जब आई तो उन्होंने संघ को वार्ता को बुलाया और चर्चा के बाद निर्णय लिया कि प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधान अध्यापक अवश्य नियुक्त करेंगे उसके बाद उन्होंने प्र अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रा वि के प्र अध्यापक के पद पर पदोन्नति हेतु आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि 5 वर्ष को घटाकर 3 वर्ष कराया और लगभग एक लाख शिक्षकों की पदोन्नति हुई
यही बात आज भी विभाग से कह रहे हैं कि प्रत्येक विद्यालय में एक प्र अध्यापक अवश्य रखिए लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है
वर्ष 2015 से आज तक एक भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।
कोई भी विभाग,संस्था या सरकार बिना मुखिया के नहीं चलता लेकिन यह विद्यालय विना हेड मास्टर के चलायेंगे और हेड काम सहायक अध्यापक से लेंगे वो भी हेड के पद का वेतन दिए बिना ।यह तानाशाही नहीं तो क्या है ।
जब तमाम तथाकथित संघ केवल एक ही मुद्दों पर शिक्षकों को आंदोलन को सपोर्ट करने की बात करते थे तो हमने सदैव कहा कि शिक्षकों की प्रत्येक समस्या के निराकरण को प्राथमिकता में नहीं रखा तो यह सब छीन लेंगे
आज बही दिन हम सबके सामने है
हजारों प्रधान अध्यापकों को सरप्लस घोषित कर दिया गया अर्थात उन विद्यालयों में प्रधान अध्यापक के पद समाप्त कर दिये गये ।आप हेड मास्टर के पद माँग रहे थे तो उन्होंने हजारों विद्यालय बंद करने का निर्णय ले लिया ।
इसलिए आवश्यक है कि आम शिक्षक को इस मनमानी से अवगत कराए
शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात सहन नहीं किया जायेगा ।