हम किसानों को बर्बाद करके अकूत पैसे कमाये है इन फैक्ट्री वालों ने इसलिए इतना बड़ा पेपर में एड दिया है।
ये साफ साफ लिख रहा है कि ZLD अव्यवहारिक है मतलब इनकी नीति इतनी मर चुकी हैं कि ये चाहते हैं कि जोजरी में इनके फैक्ट्री का केमिकल वाला जानलेवा प्रदूषित पानी ऐसे ही बहता रहे।
हमारे खेत बीस सालो से बंद पड़े है पर इन्होंने कभी कोई रहम नही किया लेकिन अब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इन पर जरा सी सख्ती दिखाई तो ये गिड़गिड़ा रहे है।
ये कह रहे है कि सरकार इनको सब्सिडी दे ओर इनके धंधे चालू करें।जबकि ये किसानों के लिए कभी नहीं सोचा।
मित्रों जोजरी नदी में जहर घोलकर इन राक्षसों ने हमें कैंसर दिया है हमारा सब कुछ छीन लिया है।इनके इस एड पर मेरी ये एक ट्वीट भारी पड़ना चाहिए इतना शेयर कीजिए आप लोग।
सरकार तो इन उद्योगपतियों के आगे हमेशा झुकती ही है पर अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए ये कुछ कर नहीं पा रहे है।
ZLD अव्यवहारिक नहीं हैं बल्कि इनको चलाने में जोर आता है।जब कोई कुछ कहने वाला नहीं होता तो जहर खुलेआम जोजरी में छोड़ रहे थे अब वो आदत ये छोड़ना नहीं चाहते।नीति मरियोड़ा कुछ तो रहम कर लो रे कितनी हिंसा फैलाओगे।
जोजरी नदी की पूरी जैवविविधता को इन्होंने पूरी तरह बर्बाद कर दिया है ओर कह रहे है कि पानी क्षारीय होने से ज़्यादा नुकसान नहीं करता।
माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi@BhajanlalBjp जी आपसे निवेदन हैं कि सरकार हम किसानों ने भी बनाई है इनके धंधे चले लेकिन हम क्यो भुगत रहे है।
थार की तीन नदियों जोजरी,लूणी ओर बांडी को इन्होंने पूरी तरह प्रदूषित कर मार दिया है।इन पर सख्ती करके किसानों को राहत दी जाए।
हमें माननीय सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास हैं कि वो हमारे साथ न्याय करेंगे
❗पूर्व कुलपति जी के नाम खुला पत्र
मान्यवर श्री जगदीश उपासने जी
सादर वंदे,
अत्र कुशलम तत्रास्तु,
आगे समाचार यह है कि आज अनायास आपका फेसबुक प्रोफाइल दृष्टिगोचर हुआ।
आप माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय ,भोपाल (MCU)के कुलपति और इंडिया टुडे जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका के कार्यकारी संपादक रहे हैं।
आप प्रसार भारती के भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे हैं।
इसलिए आपकी वॉल पर जो कुछ दिखा उसे देख कर सहसा विश्वास ही नहीं हुआ फिर स्मरण हुआ कि आप 'संघ दक्ष' हैं, पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर से भी संबद्ध रहे हैं तो विश्वास हुआ कि आप ऐसी सामग्री प्रस्तुत कर सकते हैं।
किम आश्चर्यम..!
मान्यवर,
आपने प्रधानमंत्री के नॉर्वे प्रवास पर प्रश्न पूछने वाली महिला पत्रकार Helle Lyng के दो छायाचित्र प्रस्तुत करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
दोनों पोस्ट में महिला पत्रकार अधोवस्त्रों (बिकिनी) में दिख रही है।
(आपकी दोनों पोस्ट के स्क्रीन शॉट संलग्न हैं)
मान्यवर,
आपने उसके प्रधानमंत्री से प्रश्न पूछने के 'अपराध' में उसके ऐसे छायाचित्र प्रदर्शित किए हैं जिनका उसके कामकाज से कोई संबंध नहीं है।
आपने एक पोस्ट में Let's Expose के नाम पर उस महिला के बारे में जो कुछ लिखा है वो आईटी सेल की ऐसी जानकारियों से परिपूर्ण है जिससे कुछ भी अन्यथा साबित नहीं होता।
आप तो पत्रकार रहे हैं, संपादक रहे हैं क्या आप बता सकते हैं कि एक पत्रकार का प्रश्न पूछना क्या ऐसा अपराध है कि आप उसके निजी जीवन पर आक्षेप कर रहे हैं?
महोदय,
क्या आप नहीं जानते कि पश्चिमी समाज में और अब तो भारतीय समाज में भी निजी अवसर पर ऐसे वस्त्र धारण करना सहज और सामान्य है? इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।
वैसे भी वस्त्राभूषण, खानपान आदि निजता के अधिकार में आते हैं। क्या आप एक स्त्री को अपनी इच्छा के पहनावे का अधिकार न देंगे?
क्या आपको विनम्रता से स्मरण करवाया जाए कि हमारी संसद में ऐसी माननीय सदस्य हैं जो पूर्व में फिल्म और टेलीविजन में काम करती थीं।
उनके व्यावसायिक काम के समय के ऐसे अनेक छायाचित्र आज भी उपलब्ध हैं जिनमें वे ऐसे ही अधोवस्त्रों (बिकनी) में हैं।
हम नाम नहीं लिख रहे आप उनसे परिचित ही हैं, वे आपकी ही पार्टी की सम्मानित सदस्य हैं।
तो क्या आप उनके विषय में भी ऐसे ही विचार रखते हैं?
आप तो एक पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे हैं, क्या आपने विचार किया कि आपके कार्यकाल में जो विद्यार्थी अध्ययनरत रहे हैं उन्हें आपकी ऐसी पोस्ट से कैसी अनुभूति हुई होगी.?
विशेषकर वे छात्राएं जिन्होंने कुलपति के रूप में आपके व्याख्यान सुने होंगे, उन्हें कैसा प्रतीत हो रहा होगा?
कितना श्रेयस्कर होता कि आप पत्रकारीय दृष्टिकोण से उस महिला पत्रकार के प्रश्न पूछने पर कोई तार्किक, तथ्यात्मक हस्तक्षेप करते।
उससे और उसके कार्य से असहमत होने का आपको संपूर्ण अधिकार है..
उसने आपकी पार्टी के नेता से प्रश्न किया इससे आपका आहत, व्यथित होना भी स्वाभाविक और स्वीकार्य है लेकिन इसके लिए उसका चरित्र हनन करना सर्वथा अनुचित ही माना जाएगा।
वैसे भी आप जैसे भद्र, सुशिक्षित, प्रकांड विद्वान और धीर गंभीर संपादक से किसी 'दो कौड़ी के ट्रोल' जैसी भाषा और पोस्ट की अपेक्षा ट्रोल आर्मी को हो तो हो शेष शायद ही कोई आपसे ऐसी आशा रखता होगा।
आपने देख लिया होगा कि आपकी दोनों पोस्ट पर 99 प्रतिशत कमेंट आपसे असहमति वाले ही हैं। सबने आपकी पोस्ट पर आपत्ति ही की है।
हां अब तक आपकी पोस्ट पर कोई एक महानुभाव हैं जिन्होंने इतनी घृणित टिप्पणी ('घिनौनी' पढ़ें) की है कि किसी भी सभ्य मनुष्य को उबकाई आ जाएगी।
(हो सकता है आपकी दृष्टि में वही सर्वश्रेष्ठ कमेंट हो।)
वैसे सत्य तो यह है कि मुझ अकिंचन को आपके इस कृत्य पर आश्चर्य या क्षोभ होना ही नहीं चाहिए क्योंकि आप जिस 'विचार परिवार' से संबद्ध हैं उसके मूल में ही स्त्रीद्वेष अंतर्निहित है।
आपके विचार परिवार के 'शीर्ष पुरुष' अपने श्रीमुख से पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, जर्सी गाय आदि जैसे सुभाषित उच्चारते रहे हैं तो आप भी....!
और हां आपकी पार्टी के शीर्ष पुरुष जिन्हें माय डियर फ्रेंड कहते हैं, जिसकी जीत के लिए आप सबने हवन,यज्ञ किए थे उसके एप्स्टीन फाइल्स वाले चित्र भी आपने देखे ही होंगे।
अस्तु
स्वयं पत्रकारिता का अति सामान्य विद्यार्थी होने के कारण आप जैसे श्रेष्ठ पत्रकार, संपादक की ऐसी दशा देख कर सचमुच खेद हुआ।
चूंकि आपकी प्रस्तुति सार्वजनिक पटल पर थी, उस पर सार्वजनिक विमर्श ही उचित प्रतीत हुआ इस आशय से यह खुला पत्र लिखा है।
आशा है हमारे हस्तक्षेप को स्वस्थ विमर्श के रूप में ही लेंगे।
आप दीर्घायु हों, शतायु हों।
शुभकामनाएं।
सादर
स्नेहाधीन
डॉ राकेश पाठक
@jdupasane
फाइनल होने से पहले ही झुंझुनूं बाईपास का अलाइनमेंट लीक, भूमाफिया ने खरीदी 4 हजार करोड़ रुपए की 8 हजार बीघा जमीन। खरीदारों में PWD के XEN और कंसलटेंट भी शामिल, दोनों ने 867 बीघा जमीन खरीदी। बाईपास के खसरों में खरीद पर पाबंदी, फिर भी रजिस्ट्री-नामांतरण।
#BhaskarInvestigation #MyReport
'महंगाई मैन मोदी' का चाबुक फिर चला। आज कमर्शियल सिलेंडर 993 रुपए महंगा हुआ।
मोदी ने पिछले 4 महीने में कमर्शियल सिलेंडर के दाम ऐसे बढ़ाए 👇
• 1 मई: ₹993
• 1 अप्रैल: ₹218
• 7 मार्च: ₹115
• 1 मार्च: ₹31
• 1 फरवरी: ₹50
• 1 जनवरी: ₹111
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टोटल: ₹1,518
जी हां, कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ 4 महीने में 1,518 रुपए महंगा हो गया। अभी साल के 8 महीने बाकी हैं।
मोदी की वसूली जारी है...
चुनावी राहत खत्म,महंगाई की गर्मी तैयार !
कुछ दिनों पहले ही नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी ने इसकी भविष्यवाणी की थी।
ये सिर्फ कॉमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा नहीं हुआ है। ढाबे, होटल, रेहड़ी, चाय की थड़ी, मिठाई की दुकान, छोटे उद्योग, हर गरीब और मध्यम वर्ग पर हमला हुआ है।
पहले चुनाव तक ढोंग, और वोट मिलते ही जनता की जेब पर डाका। अभी तो गैस के दाम बढ़ाएं, शायद कल तक पेट्रोल-डीजल के दाम में भी भारी बढ़ोतरी नज़र आ जाए।
एक साथ सीधे ₹993 की वृद्धि? रिकार्ड टूट गए।
India is not just blending ethanol with petrol, it is blending away water and food security.
Data is alarming:
1 litre rice-based ethanol = ~10,790 litres of water
Rice needed for 1 litre ethanol = 2.5–3 kg
FCI rice diverted for ethanol in 2024–25 = 52 lakh tonnes
This can produce nearly 245 crore litres of ethanol.
Now the next shocker: Centre is reportedly planning to cut broken rice in PDS from 25% to 10% to free up rice for ethanol feedstock.
So rice meant for the poor is being reduced, while rice for fuel is being increased.
Green fuel cannot be built by draining India’s groundwater and shrinking the poor man’s plate.
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10,000 litres water for one litre of ethanol: India fuel push to worsen water crisis - India Today
https://t.co/AEapF0dst7
मात्र 4,5 गाड़ियों के काफिले के साथ जनता की समस्या सुनते प्रधानमंत्री राहुल गांधी,
कुछ बदमाश कहेंगे कि BJP अध्यक्ष नितिन नबीन का शाही काफिला निकल रहा है।
ठीक बगल वाली रोड पर जनता जाम में फंसी है, इस बात को भूल जाइए।
Entire road is blocked for BJP President Nitin Nabin's slow motion entry & welcome in Jaipur, Rajasthan
If any honest tax payer suffering due to this raise a question, BJP starts attacking the person online & offline 🤡
@Brijesh_India_B@8thpaycommision who is stopping the government to take action against the corrupt, but the govts seldom does it because they are hand in glove with those types of babus!
जज स्वर्णकांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के सरकारी पैनल पर काम करते है ।
केंद्र सरकार उनको सरकारी वेतन देती है ।
दोनों बच्चो के बॉस तुषार मेहता है।
क्या इस दुनिया में किसी को लगता है जज साहिबा तुषार मेहता और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ जाके फ़ैसला दे पायेंगी ?
पिछले हफ़्ते अमित शाह ने बोला की अरविंद केजरीवाल को हाई कोर्ट से सजा होगी ।
अब समझ में आ रहा है कहीं अमित शाह के भरोसे के पीछे ये कारण तो नहीं है।
विधायक मुकेश भाकर की शादी में सीकर रोड पर जाम लग गया था, जिसमें कई VVIP फंस गए थे, जयपुर के स्पेशल कमिश्नर ने वहां ड्यूटी में लगे पुलिस अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा और जाम लगने की वजह की जांच हुई, रिपोर्ट बनी और मुख्यालय पहुंची.
इस रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हुई है.
यहां जनता सुबह से लेकर शाम तक ट्रैफिक में पिसती है, रोती है, बिलखती है और अपना गुस्सा बगल में खड़े बाइक या कार वाले से 2 बात कर निकाल लेती है और अगले दिन उसी ढर्रे पर फिर लौट आती है.
विधायक और VVIP की इस दुनिया में आम आदमी की क्या औकात है, कुछ नहीं.
#Jaipur #Rajasthan
जयपुर की ख़ूबसूरत पहाड़ियों का हाल चिंता जनक है
ट्रैकिंग को जाने वाले गैर जिम्मेदार युवाओं ने गंदगी का अंबार लगा दिया है
मैंने एक प्रयास किया है जो जारी रहेगा…
पहाड़ियों को डम्पिंग यार्ड बनने से बचाना होगा
#Jaipur@DcDmJaipur@arvindchotia@avinashkalla@8PMnoCM
कौन है यह सुकुमारी मैं इसे नहीं जानता लेकिन इसकी शक्ल में बगावती तासीर है। अब होगा यूं कि समाज और सिस्टम इसे बदतमीज कहकर दुत्कार देंगे और संस्कार की ओट में सिस्टम के पाप ढक दिए जाएंगे। फिर अगले दीक्षांत समारोह में महामहिम जाएंगे और यह लड़की एक नजीर बनेगी बाकी उन लड़कियों के लिए जो बोलना चाहती हैं, आंख मिलाना चाहती हैं लेकिन उसे बताया जाएगा कि बीते दीक्षांत समारोह में एक बदतमीज लड़की ने ऐसा किया था तब समाज ने उसे बहुत दुत्कारा था।
ग्रेजुएशन फाइनल ईयर में मैं भी अपना NSS का सर्टिफिकेट फाड़कर आया था क्योंकि मुझे लगा कि सिस्टम में मेरे साथ जस्टिस नहीं हुआ। जस्टिस करने वाला सिस्टम बदतमीज होता है या फिर उसके खिलाफ बोलने वाला व्यक्ति ?
इस युवती का मामला ये है कि मंच पर कोई 15/20 स्टूडेंट को बुलाकर ही डिग्री दी गई थी। इस व्यवस्था के खिलाफ कुछ लड़कियों का विरोध था लेकिन इस लड़की का गुस्सा सरेआम फूट पड़ा। और फूट गया तो फूट गया उसमें जुलम क्या हो गया ? मन में आया कह दिया सरेआम कह दिया और चिल्लाकर कह दिया। उसका हक था कि वह मंच पर जाकर डिग्री ले क्योंकि वह डिग्री उसे खैरात में नहीं मिली है। उसने एग्जाम दिया है, असाइनमेंट बनाया है, इस डिग्री के लिए इंतजार किया है तो फिर वह समझौता क्यों करे ?
21 साल की बीना दास ने डिग्री लेते वक्त अंग्रेज गवर्नर पर कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गोलियां चला दी। क्योंकि बीना दास को किसी फिरंगी के हाथ से अपनी डिग्री नहीं लेनी थी। इस लड़की का विरोध इस बात पर था कि उसे डिग्री मंच पर जाकर लेनी है तो उसने अपना विरोध दर्ज करवा दिया।
उसे लगा कि कुछ उसकी गरिमा के खिलाफ हो रहा है। इस बात पर वह फट पड़ी और बिगड़ गई।
जिनके खिलाफ इस लड़की का विरोध है वो रोज पचासों मर्यादाएं तोड़ते हैं।
कल लोक सभा में मैंने चितौड़गढ़ सहित मेवाड़ क्षेत्र में अफीम उत्पादक किसानों की समस्या को लोक सभा में उठाया , नारकोटिक्स विभाग द्वारा किसानों को अनावश्यक रूप से वहां परेशान किया जा रहा है जिसके संदर्भ में मैने वित्त मंत्री जी का ध्यान आकर्षित किया और आज सदन में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने उसका जवाब भी दिया |
मेरा सदैव प्रयास रहता है कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से सरकार के समक्ष रख सकूं |