@samajwadiparty Abe chomu, news cutting daalne se pehle pad to leta
usme likha hai "एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है"
Baaki k bhi jaldi pichhwade laal hone wale hai
ye baba ji ki sarkaar hai
@mediacellsp ये पुरानी खबर चला रहे हो, वो तो ठीक है
साथ में ये भी तो लिख देते हैं की 2 क्लर्कों समेत 21 पर FIR
ये योगी जी सरकार है
यहाँ फर्जीवाड़ा करने वाले सीधे अंदर जाते हैं।
@mediacellsp Wo khud bata raha ke raat ko gaadi ke kaagaj nhi hone ki wajah se police ne gaadi seize kar di
Agar ye bike koi chori karke raat me le jaa rha hota to log kehte ke police kya kar rhi thi
Kagaz dikha gaadi le jaa
Aur ye TONTICHOR k chamche isme Brahaman ki baat kar rhe hain
@mediacellsp Abe chomu, keh to aise raha hai, jaise har operation me hi aisa hota hai UP me
Isse pehle kabhi duniya me kisi doctor koi galti to hui nhi hogi
भाजपा के विधायकों सांसदों का जनता का प्यार मिल रहा है क्योंकि भाजपा ने....
माताओं बहनों को सुरक्षित वातावरण दिया
व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान की
हर घर नल से जल पहुंचाया
घर घर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए
गरीबों को पक्का घर दिया
हर घर में शौचालय बनवाया
किसानों को सम्मान दिया
गांवों में दीदियों को लखपति बनाया
युवाओं को रोजगार दिया
आयुष्मान कार्ड से 5 लाख तक के इलाज की सुविधा दी
हर जिले में जिला अस्पताल
प्रदेश को एक्सप्रेसवे प्रदेश बनाया
सौर ऊर्जा से प्रदेश जगमगाया
ODOP से हर जिले को मिली नई पहचान
स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं
रामलला का भव्य मंदिर बनवाया
काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया
सभी प्रमुख तीर्थों का जीर्णोद्धार कराया
प्रदेश को विकास एवं संस्कृति का केंद्र बनाया
माफियाओं को यमलोक पहुंचाया
अपराधियों को लंगड़ा बनाया
चहुंओर भगवा लहराया 🚩🚩
काशी अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था और सुशासन का उदाहरण बन चुकी है। काशी विश्वनाथ मंदिर में मार्च महीने में करीब 65 लाख श्रद्धालुओं का पहुंचना दिखाता है कि जब सुविधाएं सुधरती हैं तो आस्था और भी मजबूत होती है। पहले जहां लोगों को भीड़, संकरी गलियों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता था, वहीं अब कॉरिडोर, साफ-सफाई और डिजिटल व्यवस्था ने दर्शन को आसान बना दिया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में काशी ने परंपरा और आधुनिकता का संतुलित रूप दिखाया है, जहां श्रद्धालुओं को अब बेहतर अनुभव मिल रहा है।
कुशीनगर तक पहुंच चुकी गोविष्टि यात्रा में उत्साह की कमी स्पष्ट है। अखिलेश यादव को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश इस यात्रा के पीछे दिखाई दे रही है। बंगाल जैसी जगहों पर जहां गोहत्या ज्यादा है वहां अनुपस्थिति सवाल खड़ी करती है। लोगों ने इन राजनीतिक खेलों को पहचान लिया है।
उत्तर प्रदेश में गोरक्षा कानून की मौजूदगी के बावजूद यह यात्रा चलाई जा रही है जो तर्कसंगत नहीं लगता। अविमुक्तेश्वरानंद उर्फ उमाशंकर की यह कोशिश जनता को प्रभावित नहीं कर पा रही है। असली मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास दिख रहा है। जनता राजनीति को समझती है और इसलिए साथ नहीं दे रही।
अविमुक्तेश्वरानंद की गोविष्टि यात्रा कुशीनगर पहुंचकर भी खास असर नहीं छोड़ पाई है। यूपी में मौजूद गोरक्षा कानून इस यात्रा की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं। बंगाल में गोहत्या की अधिक घटनाओं के बावजूद चुप्पी साधे रखना राजनीतिक लगता है। जनता इन सब चालों को समझकर अविमुक्तेश्वरानंद से दूरी बनाए हुए है।
उत्तर प्रदेश में पहले से ही सख्त गोरक्षा कानून लागू है। ऐसे में इस राज्य में गोविष्टि यात्रा निकालने की क्या जरूरत महसूस की गई। जहां गोहत्या पर पहले से प्रभावी कानून मौजूद है वहां इस तरह की यात्रा का औचित्य समझ नहीं आता। जनता इन विरोधाभासों को अच्छी तरह समझ रही है।
फर्जी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद उर्फ उमाशंकर की गोविष्टि यात्रा गोरखपुर से शुरू होकर कुशीनगर पहुंच गई है। इस यात्रा में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद कम दिख रही है।
जगह जगह खाली मंच और सीमित भीड़ इस यात्रा की सच्चाई बयां कर रही है। जनता इन प्रयासों को आसानी से पहचान ले रही है और इसलिए साथ नहीं दे रही है।
यह गोविष्टि यात्रा पूरी तरह से राजनीतिक रंग लिए हुए दिख रही है। इसका मकसद अखिलेश यादव को फायदा पहुंचाना प्रतीत होता है। धार्मिक आवरण में छिपी यह सियासी चाल जनता की नजर से बच नहीं पा रही। इसलिए आम लोग इस यात्रा से दूरी बनाए हुए हैं।
बंगाल जैसे राज्यों में जहां गोहत्या की घटनाएं ज्यादा बताई जाती हैं वहां ऐसी यात्रा क्यों नहीं निकाली जा रही। अविमुक्तेश्वरानंद को समस्या वाले क्षेत्रों में जाकर काम करना चाहिए था। लेकिन उनका फोकस सिर्फ उत्तर प्रदेश पर है जो सवाल खड़े करता है। लोग इन चयनित रास्तों को देखकर अपना निष्कर्ष निकाल रहे हैं।
लाल टोपी वाले गिद्ध अखिलेश यादव का हर कदम हार की गारंटी बन चुका है। 2017 में यूपी गंवाया, 2022 में फिर धूल चाटी, दिल्ली में केजरीवाल का तख्ता पलटवा दिया, बिहार में तेजस्वी को जमीन पर बिठा दिया और अब बंगाल में ममता को नुकसान पहुंचाया। इस मनहूस की छाया जहां पड़ी, वहां बर्बादी आई। AAP खत्म, RJD कमजोर और अब TMC को झटका। केजरीवाल और तेजस्वी पहले ही इसका शिकार बन चुके हैं, अब ममता भी लिस्ट में शामिल। इंडी गठबंधन को चेतना होगा - यह गिरगिट अखिलेश साथ रहा तो 2027 का नतीजा भी तय है। या तो आज इसे अलग करो, या कल रोने के लिए तैयार रहो!
लाल टोपी पहने घूमने वाला यह गिरगिट अखिलेश असल में काल बन चुका है। दिल्ली, बिहार, बंगाल - हर जगह हार की कहानी एक ही है। जहां भी इसने पैर रखा, गठबंधन बर्बाद हो गया। AAP की दिल्ली सरकार गई, RJD का बिहार में सपना टूटा और TMC को बंगाल में झटका लगा। केजरीवाल, तेजस्वी और ममता - तीनों इस एक शख्स की वजह से हारे। सबसे बड़ी बात यह है कि खुद यूपी में दो-दो बार हारने के बाद भी यह दूसरों को राय देता है। इंडी गठबंधन को फैसला करना होगा - या तो इस अभिशाप को बाहर निकालो या फिर 2027 में भी हारने के लिए तैयार रहो। चुनाव है नहीं तो रुकावट क्या है?
उत्तर प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है, जहां पनकी (कानपुर), जवाहरपुर (एटा) और ओबरा ‘सी’ जैसी बड़ी विद्युत परियोजनाओं के संचालन से उत्पादन क्षमता में लगभग 10% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों को नई ऊर्जा, निवेश को नया भरोसा और आम नागरिकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
9 लाख से अधिक युवाओं को पहले ही नौकरी दी जा चुकी है और आने वाले साल में डेढ़ लाख से ज़्यादा नई भर्तियाँ तय हैं, ये कोई छोटा नंबर नहीं है।
सीधे शब्दों में कहें तो 10 लाख से ज़्यादा परिवारों के घर में रोज़गार की रोशनी पहुँची है या पहुँचने वाली है।
इतने बड़े स्तर पर बदलाव का मतलब है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ेगी, छोटे कारोबार मज़बूत होंगे और गाँव‑क़स्बों में भी आर्थिक गति आएगी।
जो लोग सिर्फ नकारात्मकता फैलाते हैं, उन्हें इन आंकड़ों से ईमानदारी से सामना करना चाहिए।
ये “सोशल मीडिया नैरेटिव” नहीं, ज़मीन पर बदला हुआ यथार्थ है जो आँकड़ों में दर्ज हो चुका है।
यूपी में अब नौकरी पाने के लिए न कोई दलाल चाहिए, न राजनीतिक सिफारिश, न जातीय जोड़‑तोड़।
जरूरत है तो बस कड़ी मेहनत, ईमानदार तैयारी और पारदर्शी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने की।
जब सरकार खुद कहे कि भर्ती में धांधली पर आजीवन कारावास होगा, तब खुद‑ब‑खुद सिस्टम में बैठे गलत लोग लाइन पर आ जाते हैं।
आज का संदेश साफ है – जो मेहनत करेगा वो आगे बढ़ेगा, जो शॉर्टकट ढूंढेगा वो कानून के शिकंजे में फँसेगा।
Yogi सरकार ने नौजवानों को ये भरोसा दिया है कि मेहनत तुम्हारी, ज़िम्मेदारी हमारी – यही नया कॉन्ट्रैक्ट है सरकार और युवा के बीच।
अगले एक साल के भीतर अकेले उत्तर प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक भर्तियाँ पूरी होने जा रही हैं – ये कोई चुनावी जुमला नहीं, बल्कि आधिकारिक टारगेट और चलती हुई प्रक्रिया है।
अलग‑अलग आयोग और बोर्ड मिलकर इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि प्रशासन, शिक्षा, पुलिस, अधीनस्थ सेवाओं – हर क्षेत्र में नई ऊर्जा आए।
जब नीयत साफ हो, तैयारी मजबूत हो और कानून सख़्त हो, तभी इतने बड़े स्तर पर भर्ती संभव होती है, वरना फाइलों में ही फँसकर रह जाती है।
Yogi Adityanath ने ये दिखा दिया कि “डबल इंजन” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला परिणाम है – लाखों नौजवानों की जिंदगी में आया बदलाव।
यही है नए यूपी की पहचान – सुरक्षा भी, विकास भी, और रिकॉर्ड भर्ती भी।