एक दिन आएगा जब मोदी जी आम सभा में गिन कर बताएंगे कि ट्रंप जी ने उन को कितनी बार संसार के सामने याद किया है,और किस तरह याद किया है। किसी सयाने ने कहा है--
कितने शीरीं हैं तेरे लब कि ऐ ग़लीज़ नवाज़
गालियां खाके मज़ा सौ गुना हो जाता है
वेनेज़ुएला में तो भारत के धनकुबेर "ए2" का ही धंधा है-- तेल निकालने से तेल आयात करने का।उन का क्या होगा-- क्या ट्रंप अपनी, विश्व में सबसे बड़ी,तेल कंपनियों में इन की कंपनी को भी अपना मान रहे हैं?
हमारी,यानी NewIndiaकी, यानी दुनियाभर में लोकप्रिय हमारे नेता की तो घिग्घी ...
Is the Nobel Peace Prize committee safe and secure? Or should it now offer its prize in a trade off for Venezuela, and its own life span?
Donald Trump will have it. His hook failed, but the crook is intact.