Number of Princely States held by different caste/tribes in pre independence India:
Rajput - 85
Maratha - 22
Pashtun - 18
Jat - 8
Gujjar - 2
Sindhi - 2
Baluch - 2
Bhumihar - 1
Brahman - 1
Note: These are officially recognized princely states,not estates or other feudal landholdings.
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित FirstCry Intellitots Preschool में सामने आई लापरवाही ने हर अभिभावक की चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस जांच के मुताबिक, 23 महीने के एक बच्चे को करीब 30 मिनट तक बिना किसी शिक्षक या केयरटेकर की निगरानी के कमरे में छोड़ दिया गया।
इसी दौरान दूसरे बच्चे ने उस पर कई बार हमला किया और काट लिया। पूरी घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने शुरुआत में घटना की गंभीरता छिपाने की कोशिश की और बच्चे को तुरंत अस्पताल भी नहीं ले जाया गया।
शिकायत के बाद पुलिस ने CEO समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है जबकि शिक्षा विभाग ने निरीक्षण के बाद डे केयर यूनिट बंद करने के आदेश दिए हैं।
@TheTribhuvan राजस्थान विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के समय बीजेपी में 16 राजपूत विधायक थे और 13 जाट विधायक थे,लेकिन 4 जाट मंत्री बने और राजपूत केवल 3,जबकि ज्यादा मंत्री हमारे होने चाहिए थे
@Jat_Ethnic@choudhary_mpk रोस्टर सिस्टम 1999 से तो है ही,ओबीसी में आने से जाटों को डबल फायदा हुआ,क्योंकि जनरल में तो कोई भी आ सकता है,ओबीसी लिस्ट उसके बाद शुरू होती है,आप जैसे पढ़ें लिखे व्यक्ति भी कैसी हास्यास्पद बात करते है
ठसकदार 🤡 रामकेश मीणा
JEN बोल रहा हूं भागचंद मीणा तु साले MLA 5 साल रहेगा मै अधिकारी पुरे 60 साल रहूंगा झाटू 🤣🤣🤣🤣
⚠️⚠️⚠️
(रिकॉर्डिंग की पुष्टि मै नहीं करता source: facebook viral video)
7 बार का MLA, 4 बार का मंत्री राजेंद्र राठौड़ कुकुडू बना बैठा है और एक बार MLA सतीश पुनिया सीधा राज्यसभा..क्यों ..??
जाट बम्बू ठोके हैं .. जाट से राजनीति सीखो ..!
जाट नाराज हो जायेगा.. राज्यसभा भेजो उपराष्ट्रपति बनाओ.. प्रदेश अध्यक्ष बनाओ..! गुर्जर नाराज हो जायेगा तो अल्का गुर्जर ने राज्यसभा भेजो.!
राजपूत तो जड़ खरीद गुलाम है नाराज तो हो ही नहीं सकता..!
-राजेंद्र गुढ़ा पूर्व मंत्री
राहुल गांधी भी कम दिलचस्प आदमी नहीं हैं।
राजनीति में बहुत शोर हो जाए तो समुद्र में डीप डाइव लगा लेते हैं; वापस लौटते हैं तो लोकतंत्र, संविधान और बेरोज़गारी की चिंता शुरू कर देते हैं। फिर कुछ दिन किसी गुफा, जंगल, खेत या पहाड़ की ओर निकल जाते हैं; लौटकर संसद में कोई तीखा सवाल कर देते हैं। कभी ट्रक ड्राइवरों के साथ, कभी मैकेनिकों के बीच, कभी ऑटो वालों के साथ बैठ जाते हैं।
उनकी राजनीति का कैलेंडर शायद दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में नहीं, रास्तों, यात्राओं और अचानक लिए गए विरामों में बनता है। आलोचक इसे अस्थिरता कहेंगे, समर्थक सहजता; लेकिन इतना तय है कि यह आदमी राजनीति को केवल मंच और माइक्रोफ़ोन पर नहीं जीता। बीच-बीच में वह सत्ता की गंभीरता को जीवन की थोड़ी-सी मस्ती, जिज्ञासा और मानवीयता से काट देता है और शायद यही बात उसे बाकी नेताओं से अलग भी बनाती है।
@RahulGandhi
औकात से ज्यादा मौका मिलने के बावजूद गोबर यादव गोबर करने से बाज नहीं आये। अंततः अमित शाह के बेटे ने कप्तानी और टीम दोनों से भगा दिहिस।
ये PDA का अपमान है - जग्गलेश यादव 🤣