@SaktiDistrict@ChhattisgarhCMO@DPRChhattisgarh महोदय,
11 अक्टूबर 2024 को अष्टमी और नवमी के दिन आपके प्राधिकार के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र चंद्रपुर में राजपरिवार के द्वारा अपने प्रांगण में धार्मिक बलि के नाम पर पशुओं का अवैध वध किया जाएगा। यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और अन्य कानूनों का उल्लंघन है। इस घटना को रोकें।
पिछले 12 वर्षो से हसदेव के जंगलों को बचाने का संघर्ष सिर्फ पर्यावरण की लड़ाई नही बल्कि आदिवासियों के अस्मिता की भी लड़ाई है।
यह देश के संविधान और लोकतंत्र पर विश्वास के बचे रहने का भी संघर्ष है।
यह लूट और जीवन के बीच का संघर्ष है।
#SaveHasdeo
निवेदन है कि जिन लोगों ने भी मणिपुर का वह वीडियो शेयर किया है, उसे हटा लें।
इसके तीन कारण हैं।
1. सरकार इस वीडियो को प्रचारित करने पर अब कार्रवाई करेगी। आप जानते ही हैं कि वंचित समुदायों के लोग जब इन विवादों में फँसते हैं तो उन्हें बचाने कोई नहीं आता। विवादों में फँसकर नेता बनना सवर्ण युवाओं का विशेषाधिकार है। वह आपके लिए नहीं है। पढ़ाई, बिज़नेस और नौकरी पर ध्यान दें। कोई क्रांति नहीं हो रही है।
2. आप इस बात को समझिए कि हाई कोर्ट के एक बेवक़ूफ़ी भरे फ़ैसले के बाद से मणिपुर हिंसा में डूब गया है। दोनों तरफ़ से हिंसा हो रही है। एक ह्वाट्सऐप फारवर्ड के जवाब में दूसरा समुदाय नई हिंसा कर देता है और उसकी प्रतिक्रिया में पहला समुदाय फिर हिंसा कर रहा है। जब आप एक ऐसा वीडियो शेयर करते हैं तो अनजाने में आप अन्य समुदाय को नई हिंसा के लिए उकसा रहे हैं।
3. सरकारें आती जाती रहती हैं। महाबली इंदिरा गांधी और वाजपेयी भी हारे हैं। नरेंद्र मोदी भी अमृत पीकर नहीं आए हैं। सब जाएँगे। पर राष्ट्र किसी भी नेहरू, इंदिरा, वाजपेयी और मोदी से बड़ा है। इसलिए राष्ट्र की सोचिए। राष्ट्रीय एकता की सोचिए।
हिंसा रोकने में अगर कोई भूमिका नहीं निभा सकते तो कम से कम हिंसा भड़काने में हिस्सेदार न बनें।
इस मैसेज को शेयर करें ताकि हमारा कोई भोला भाला युवक उत्तेजना में अपना नुक़सान न कर ले।
- दिलीप मंडल
@ParveenKaswan वन विभाग की नाकामी का सबूत है जीव। अपनी अंतरात्मा से पूछिए क्यूं विलुप्त हो रहा है ये जीव। दिल पर हाथ रखकर सोचेंगे तो आप पाएंगे कि कही न कही तो कमी रह गई है ।