आतंकी, गद्दार, देशद्रोही, लिंब्रांडू, नमाजवादी, जिहादी, भ्रष्ट्राचारी, घोर हिन्दूविरोधी२०१४ से ही झुठा नेरेटिव्ह फैलाकर जनताको गुमराह कर रहे है! लेकीन ये नया भारत है देशद्रोही यो को जबाब देना जानता है! अभि तो गोरखपूर वाले बाबाजी का शासन देखना है भारतपर
2029 का चुनाव देश की दिशा तय करेगा। 🇮🇳
कुछ लोग मानते हैं कि अगर BJP फिर सत्ता में आती है तो देश के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं, जबकि कुछ लोग इससे सहमत नहीं हैं।
आपकी क्या राय है?
🅰️ हाँ
🅱️ नहीं
अपना जवाब कमेंट में दें और चर्चा में शामिल हों। 👇
हिन्दू मुस्लिम तो पप्पूखान तु तेरी माँ, बाप, दादी, परनाना और मौलाना मोहम्मद दास गांधी सन १९४७ से करते आ रहे है! धर्म के नामपरदेश का विभाजन किया फिर भी मुसलमानो को भारतमे रखकर सिर्फ उन्हीके हितोकी देखभाल की हजारो कायदे उन्ही के फायदे के लिये किये! नतिजा अपने ही देशमे हिन्दू.
मैं 50 नहीं 500 चुनाव भी अगर हार जाऊँ …..
तो भी हिंदू मुस्लिम करके और झूठ बोलकर दंगे करवा कर चुनाव नहीं जीतूँगा।
— राहुल गांधी, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष
राहुल गांधी इसीलिए बाक़ी नेताओं से अलग माने जाते हैं।
नौंवी फेल, पहले तु अपनी अनपढ- गवॉर माँ को बोल, सत्ता जाने के बाद सरकारी निवास, वाहन सबकुछ लौटाना पडता है! वो जाहिल औरत कबसे सरकारी बंग ला हडपने की कोशिश कर रही है, क्या यही तेरी और RJD की सोच है?
सम्राट चौधरी Chief Minister नहीं बल्कि Cheap Minister हैं।
Cheap राजनीति कर रहे हैं। छोटी सोंच और घृणा भाव के साथ।
हमारे लिए घर और सिक्योरिटी मुद्दा नहीं है ।मुद्दा पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी है।
~ तेजस्वी जी
अब Cheap राजनीति करने वाले को Chief Minister कैसे कहा जाए?
इमरान तु तो कांग्रेस और नकली गांधी( असली खान ) परिवारके गुण गायेगा ही! क्योकी इसी हरामी गांधी नेहरू परिवारने विभाजन करवाने के बाद भी मुसलमानो को भारतमे बसाया, वरना तुभी आज पाकिस्तान के किसी गाँव मे ४०० रु किलो आटे के लाईनमे खडा होता
नेहरू जी की लकीर छोटी करने की बातें करने वालों, कभी नहीं कर पाओगे…….सात जन्मों में नहीं कर पाओगे।
थोड़ा पंडित नेहरू के बारे में पढ़ो तब समझ में आयेगा नेहरू किस शख़्सियत का नाम है।
टोटी कोई भी बात जरा सोच समझकर बोलना? ये तेरे बाप मुल्ला यम या तेरा राज नही युपी मे ये बाबाजी का राज है! यहाँ उठ पटांग या कोई बकलोली की तो फिर बाबाजी की पुलीस डंडा सिधा तेरे पिछवाडे डाल देगी! फिर मत कहना,
नेहरु का रिकॉर्ड साल , महीने और दिन गिनकर नहीं तोड़ा जा सकता. नेहरु ने अपने कालखंड में जो किया और देश को जो दिया , उससे इन 12 सालों की तुलना ही नहीं की जा सकती . समाज में नफ़रत और ज़हर का घोल नेहरु ने नहीं घोला था . नेहरु ने बड़े -बड़े संस्थान तब बनाए थे , जब देश गुलामी से आज़ाद हुआ था . हज़ार तरह की चुनौतियां थी. आर्थिक तौर भारत बहुत कमज़ोर था. अंग्रेज गरीबी और तंगी हमारे हिस्से में छोड़ गए थे . वैश्विक पटल भी भारत एक आज़ाद मुल्क के तौर पर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था . तब भी नेहरु ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना को साकार करने की कोशिश की थी , जिसमें भाईचारा हो , मोहब्बत हो .धर्म आधारित राजनीति न हो , सांप्रदायिकता न हो .
नेहरु ने तरक्की की ऐसी बुनियाद रखी थी , जिसमें नफ़रत और साम्प्रदायिकता की कोई जगह नहीं थी . और आज ?
मीडिया को गुलाम बनाकर अपनी चाटुकारिता करवा लेने से कोई नेहरु नहीं बन सकता .
तुलना और वो भी देश के लिये जीनेवाले, देशहित, धर्महित, लोकहित सर्वोपरी माननेवाले मोदीजी और रंडीबाज, गद्दार, मुस्लीम परस्त जवाहर इनके बीच हो ही नही सकती!
2029 का चुनाव सिर्फ़ सत्ता का नहीं, विचारों और मुद्दों की लड़ाई होगा।
राहुल गांधी क्या रणनीति अपनाते हैं, कैसे जनता के बीच अपनी बात रखते हैं और चुनावी मुकाबले को किस दिशा में ले जाते हैं—यह पूरा भारत देखेगा। 🔥
राजनीति में अंतिम फैसला जनता करती है। 🇮🇳
आपकी राय में 2029 का चुनाव कैसा होगा? 👇
अबे उबा ले हुवे अंडे के छिलके, अमेरिका इरान युद्धसे सारे संसारमे हाहाकार मचा हुवा है! शुक्रकर मोदी का भारत मे दुनिया के मुकाबले बहुतही मामुली दाम बढे है तेल और गैसके