#वेदों_अनुसार_कबीरप्रभु_लीला
जब कबीर परमेश्वर सतलोक से आये थे उस समय शिशु रूप कबीर साहेब की परवरिश कुंवारी गाय से हुई थी
जिसका प्रमाण ऋगर्वेद मण्डल 9 सुक्त1 से9 में भी है कि जब पुर्ण परमात्मा शिशु रूप धारण करके पृथ्वी पर आता है।
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कबीर परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते।
ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 4 मंत्र 3
पूर्ण परमात्मा जब शिशु रूप धारण करके यहां आते हैं तब उनका जन्म किसी मां के द्वारा नहीं होता।
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ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
“अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।
परमेश्वर जब भी शिशुरूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।
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कबीर परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते।
कबीर, "ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशीपुरी जल कमल पे डेरा तहां जुलाहे ने पाया।।
मात पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी। जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरे हासी।।"
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ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 मे प्रमाण
परमात्मा जब भी शिशु रूप में पृथ्वी पर आते है उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।
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ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) काशी शहर की पवित्र भूमि पर सोमवार सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूर्ण परमेश्वर कबीरजी स्वयं अपने सतलोक से आकर लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए।
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जब कबीर परमेश्वर सतलोक से आये थे, उस समय शिशु रूप कबीर परमेश्वर की परवरिश कुंवारी गाय के दूध से हुई थी। जैसा कि हमारे वेद परमाणित करते है।
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