मुझे अफ़सोस है सोनां
कि मेरी नज़्म से हो कर गुज़रते वक्त बारिश में,
परेशानी हुई तुम को
बड़े बेवक्त आते हैं यहाँ सावन,
मेरी नज्मों की गलियाँ यूं ही अक्सर भीगी रहती हैं।
कई गड्ढों मैं पानी जमा रहता है,
अगर पाँव पड़े तो मोच आ जाने का ख़तरा है-
मुझे अफ़सोस है लेकिन..
#गुलज़ार
लेकिन इस कच्ची दीवार की दूस��ी जानिब,
क्यों ऐसा सन्नाटा है
कौन है जो आवाज नहीं करता लेकिन...
दीवार से टेक लगाए बैठा रहता है.
#गुलजा़र
#HappyBirthday
#GulzarSahab
उड़ के जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हिलती रही वह शाख़ फ़िज़ा में
अलविदा कहने को ? या पास बुलाने के लिए ?
*
क्या पता कब कहाँ मारेगी ?
बस कि मैं ज़िंदगी से डरता हूँ
मौत का क्या है, एक बार मारेगी
~ गुलज़ार ✍️
त्रिवेणी● छंद के सृजक,कवि,शाइर,
मशहूर गीतकार #जन्मदिन🎂
खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है
वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा
@Gulzar079Kalra
थोड़ी देर ज़रा-सा और वहीं रुकतीं तो...
सूरज झांक के देख रहा था खिड़की से
एक किरण झुमके पर आकर बैठी थी,
और रुख़सार को चूमने वाली थी कि
तुम मुंह मोड़कर चल दीं और बेचारी किरण
फ़र्श पर गिरके चूर हुईं
थोड़ी देर, ज़रा सा और वहीं रूकतीं तो...
#गुलज़ार
CIL’s CSR initiative “Project नादान बुद्ध” for rehabilitation of #Divyangs in association with Arushi Society, Bhopal to rehabilitate 40 differently abled children has received appreciation from eminent lyricist, poet, author, screenwriter and film director Shri. Gulzar
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है..
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है..
#गालिब#BirthAnniversary