@3no_hostel आजकल राजस्थान ही नहीं पूरे देश में ज्यादातर चुनाव जाती के आधार पर ही होते हैं चाहे अपनी जाती का प्रत्याशी निठल्ला ही क्यों ना हो। लोग तो यही कहेंगे कि अपनी जाती का ही है तो वोट उसी को देंगे। छात्र संघ चुनाव में ही जातीवाद बहुत देखा जाता है।
@RahulGandhi जिस कांग्रेस पार्टी ने अपने 2014 और 2019 के घोषणा-पत्र में एपीएमसी के शिकंजे से किसानों को आजाद करवाने के वादे किए थे आज वही इस कानून का सिर्फ इसलिए विरोध कर रही है क्योंकि उसे विरोध करना है.