ख़ुदा तुम्हारा नहीं है ख़ुदा हमारा है
उसे ज़मीन पे ये ज़ुल्म कब गवारा है
लहू पियोगे कहाँ तक हमारा धनवानो
बढ़ाओ अपनी दुकाँ सीम-ओ-ज़र के दीवानो
निशाँ कहीं न रहेगा तुम्हारा शैतानो
हमें यक़ीं है कि इंसान उस को प्यारा है
ख़ुदा तुम्हारा नहीं है ख़ुदा हमारा है
- Habib Jalib ☘️
मैं कब कहता हूँ जग मेरी
दुर्धर गति के अनुकूल बने,
मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू
नंदन-कानन का फूल बने?
काँटा कठोर है, तीखा है,
उसमें उसकी मर्यादा है,
मैं कब कहता हूँ वह घटकर
प्रांतर का ओछा फूल बने?
- अज्ञेय ☘️
ग़ौर से देखो, अपने चारों तरफ़
चीज़ों का गिरना
और गिरो।
गिरो पतझर की पहली पत्ती की तरह
एक कोंपल के लिए जगह ख़ाली करते हुए
गाते हुए ऋतुओं का गीत
“कि जहाँ पत्तियाँ नहीं झरतीं
वहाँ वसंत नहीं आता।”
- नरेश सक्सेना ☘️
दूर हूँ तुमसे न अब बातें उठें
मैं स्वयं रंगीन दर्पण तोड़ आया
वह नगर, वे राजपथ, वे चौंक-गलियाँ
हाथ अंतिम बार सबको जोड़ आया
थे हमारे प्यार से जो-जो सुपरिचित
छोड़ आया वे पुराने मित्र, तुम निश्चिंत रहना
यह दिये की काँपती लौ, और यह पागल पतँगा दूर नभ के वक्ष पर सहमी हुई आकाश-गंगा एक-सी सबकी कथा है, एक ही सबकी व्यथा है, है सभी असहाय, मेरी या स्वयम् की बात छोड़ो!
बीत चला यह जीवन सब प्रिय! न दो विश्वास अभिनव मिल सको तो अब मिलो, अगले जनम की बात छोड़ो
#किशन_सरोज 👍
जाने कैसे हुआ
कि प्रिय की पाती पढ़ना भूल गए
दायें-बायें की भगदड़ में
आगे बढ़ना भूल गए
नित फैशन की
नये चलन की
रोपी फ़सल अकूते धन की
वैभव की खेती -बारी में
मन को गढ़ना भूल गए
ना मुड़ने की
ना जुड़ने की
ज़िद ऊपर-ऊपर उड़ने की
ऊँचाई की चिंताओं में
सीढ़ी चढ़ना भूल गए
#दिनेश_सिंह ☘️
जनम के सिरजे हुए दुख
उम्र बन-बनकर कटेंगे
ज़िन्दगी के दिन घटेंगे
कुआँ अन्धा बिना पानी
घूमती यादें पुरानी
प्यास का होना वसन्ती
तितलियों से छेड़खानी
झरे फूलों से पहाड़े --
गन्ध के कब तक रटेंगे?
ज़िन्दगी के दिन घटेंगे ।
- #दिनेश_सिंह ☘️ #DineshSingh
इतना मत व्यवधान रखा कर
अपना थोड़ा ध्यान रखा कर
भीड़ में तन्हा क्यूँ रहता है
इक-दो से पहचान रखा कर
सारे सयाने ठीक नहीं हैं
कुछ मुझसे नादान रखा कर
मन की मर्ज़ी करने वाले
मेरे कहे का मान रखा कर
तू तोता मैं जादूगर हूँ
ख़ुद में मेरी जान रखा कर
~ डॉ.पूनम यादव
गए वो दिन कि कोई ग़म-शनास आएगा
जो आ गया भी तो क्या दिल को रास आएगा
वो साफ़-गो है मगर बात का हुनर सीखे
बदन हसीं है तो क्या बे-लिबास आएगा
#अमरदीप_सिंह ☘️
इस से पहले नज़र नहीं आया
इस तरह चाँद का ये हाला मुझे
आदमी किस कमाल का होगा
जिस ने तस्वीर से निकाला मुझे
मैं तुझे आँख भर के देख सकूँ
इतना काफ़ी है बस उजाला मुझे
#रसा_चुगताई ☘️
चाँदनी, पुष्पछाया में पल,
नर भले बने सुमधुर, कोमल,
पर, अमृत क्लेश का पिये बिना,
आतप, अन्धड़ में जिये बिना।
वह पुरुष नहीं कहला सकता,
विघ्नों को नहीं हिला सकता।
#रामधारी_सिंह_दिनकर ☘️ #रश्मिरथी