خدا بھی خوب ہے بھگوان کی مورت بھی سندر ہے
مگر جب ماں نہیں ہوتی تو گھر پورا نہیں ہوتا
شکیل اعظمی
ख़ुदा भी ख़ूब है भगवान की मूरत भी सुन्दर है
मगर जब मां नहीं होती तो घर पूरा नहीं होता
- शकील आज़मी
ग़ज़ल
याद की लपटों से उठता वो धुआँ खींचता है
राख हो कर भी मुझे मेरा मकाँ खींचता है
रात आती नहीं और क़ब्र में जा गिरते हैं
नींद खुलती नहीं और कार-ए-जहाँ खींचता है
जब भी सच बोलने का ज़ेह्न में आता है ख़याल
ऐसा लगता है कोई मुँह में ज़ुबाँ खींचता है
~राजेश रेड्डी
दरार और तिरे मेरे दरम्यां आ जाय
तिरी तरह जो मिरे मुंह में भी ज़बां आ जाय
ये और बात कि ख़ुद में सिमट के रहता हूं
उठाऊं हाथ बांहों में आसमां आ जाय
मैं आब-ओ-दाना के चक्कर में बेठिकाना हूं
भरूं उड़ान तो पल भर में आशियां आ जाय
- शकील आज़मी
Kolkata airport abhi abhi fly to Mumbai
तुम्हारी ही सत्ता है हे ईश्वर ,,बस स्मरण और वंदन ,,जिसके लिए न मंदिर न मस्ज़िद न चर्च न गुरुद्वारा बस कुछ पल मन के द्वार चले जाइए।।
जय श्री कृष्णा 🙏
#neetusharma#शब्दनिधि#शायरांश