गोरेगाव पूर्व शर्मा इंडस्ट्रील mmrda वसाहत समोर सिमेंट काँक्रेट गटार खचला आहे
जो कोणी अधिकारी दोशी असतील त्यांना तात्काळ निलंबित करावे ही विनंती
लवकरात लवकर दुरुस्ती करावे.
@mybmcWardPS@mayor_mumbai@mybmc@MCGM_BMC
राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष व रायगड जिल्हा चे खासदार मा श्री सुनील तटकरे साहेब यांना वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा!
@SunilTatkare@iAditiTatkare@ATatkare
गोरेगाव पी दक्षिण विभागात जेवढे मेन हॉल असलेल्या गटार वर जाली नसल्या मुळे अपघात होऊ नये त्या साठी महानगरपालिका अधिकारी यांनी एकदा पाहणी करावे ही विनंती @mybmcWardPS
महाराष्ट्र में सूचना मांगने के लिए उद्देश्य बताना अनिवार्य?
महाराष्ट्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक साप्रवि/१२०२०/४/२०२५-साप्रवि-कार्या-६ के माध्यम से घोषित ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ में बढ़ाए गए शुल्क, सूचना प्राप्ति पर लगाए गए प्रतिबंधों तथा नागरिकों के सूचना अधिकार को प्रभावित करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार कर नियमावली तत्काल वापस लेने की मांग सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की है। महाराष्ट्र में सूचना मांगने के लिए उद्देश्य बताना अनिवार्य किए जाने से नागरिकों में नाराजगी है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में अनिल ���लगली ने कहा है कि सूचना का अधिकार नागरिकों का लोकतांत्रिक और प्रभावी अधिकार है, जो शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण का महत्वपूर्ण माध्यम है। किंतु नए नियमों की कुछ व्यवस्थाएं सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना एवं केंद्र सरकार की वर्तमान व्यवस्था से मेल नहीं खाती प्रतीत होती हैं।
विशेष रूप से, नए नियमों के तहत नागरिकों को सूचना मांगते समय सूचना प्राप्त करने का उद्देश्य या कारण बताना अनिवार्य किए जाने पर भी आप��्ति दर्ज की गई है। अनिल गलगली ने कहा कि सूचना का अधिकार व्यवस्था की मूल भावना के अनुसार नागरिकों को सूचना मांगने का कारण बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए तथा ऐसी शर्त सूचना प्राप्ति के अधिकार पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध का कारण बन सकती है।
पत्र में निम्न प्रमुख आपत्तियां दर्ज की गई हैं:
• आवेदन शुल्क बढ़ाकर ₹30 किया गया है, जो आम नागरिकों के लिए आर्थिक बाधा उत्पन्न कर सकता है।
• सूचना की प्रति के लिए प्रति पृष्ठ ₹5 शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि पूर्व व्यवस्था और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ₹2 प्रति पृष्ठ शुल्क लागू है।
• आवेदन को 150 शब्दों तक सीमित करना तथा एक आवेदन में केवल एक विषय रखने की शर्त अनावश्यक प्रतिबंध मानी गई है।
• आवेदन के साथ नागरिकता सिद्ध करने हेतु पहचान पत्र की स्व-सत्यापित प्रति संलग्न करने की अनिवार्यता प्रक्रिया को जटिल बना सकती है।
• प्रथम अपील हेतु ₹50 तथा द्वितीय अपील हेतु ₹100 शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
• अपील प्रक्रिया में विधि व्यवसायी (एडवोकेट) के प्रतिनिधित्व पर रोक को अनुचित बताया गया है।
• इतने महत्वपूर्ण नियम लागू करने से पहले सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जानी चाहिए थीं।
• नियमों को लागू करने से पूर्व वैधानिक प्रक्रिया और व्यापक जनपरामर्श सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
अनिल गलगली ने मांग की है कि इन सभी बिंदुओं पर पुनर्विचार होने तक ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ के अमल पर तत्काल रोक ���गाई जाए तथा नागरिकों, सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और विधि विशेषज्ञों के साथ चर्चा क�� अधिक जनहितकारी एवं पारदर्शी संशोधित नियमावली जारी की जाए।
“सूचना का अधिकार कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। शासन को सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल, सुलभ और नागरिक हितैषी बनाना चाहिए,” ऐसा अनिल गलगली ने कहा।
हार्दिक अभिनंदन! 🌷
महाराष्ट्र विधानपरिषद स्थानिक स्वराज्य संस्था निवडणूक २०२६ मध्ये बिनविरोध आमदारपदी निवड झाल्याबद्दल मा. अनिकेतजी तटकरे यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन!
@ATatkare