रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया
वो क्यूँ गया है ये भी बता कर नहीं गया
वो यूँ गया कि बाद-ए-सबा याद आ गई
एहसास तक भी हम को दिला कर नहीं गया
यूँ लग रहा है जैसे अभी लौट आएगा
जाते हुए चराग़ बुझा कर नहीं गया
🖤🌸
शहज़ाद अहमद
तेरी मुश्किल न बढ़ाऊॅंगा चला जाऊॅंगा
अश्क आँखों में छुपाऊॅंगा चला जाऊॅंगा
अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे
जैसे ही होश में आऊॅंगा चला जाऊॅंगा
🖤🌸
हसन अब्बासी
मायूस हो कि द्वार से लाचार जाएगा
इस झूठ का हर वार ही बेकार जाएगा
ये ठीक है कि थोड़ी देर लग रही है पर
कैसे लगा ये तुमको कि सच हार जाएगा
🖤❤️🌸
स्वयं श्रीवास्तव
तूफ़ान हो सीने में मगर लब पे ख़मोशी
हज़रात यही होते हैं आसार ग़ज़ल के
सौ बार ये सोचा कि बस अब नज़्म कहेंगे
चक्कर में मगर आ गए हर बार ग़ज़ल के
बाज़ार में हर शख़्स क़सीदे का तलब-गार
हम हैं कि लिए फिरते हैं अश'आर ग़ज़ल के
@divya_sabaa 💌🌻
समझ रहे हैं मगर, बोलने का यारा नहीं
जो हम से मिल के बिछड़ जाए वो हमारा नहीं
बस एक शाम उसे आवाज़ दी थी हिज्र की शाम
फिर उस के बा'द उसे उम्र भर पुकारा नहीं
वो हम नहीं थे तो फिर कौन था सर-ए-बाज़ार
जो कह रहा था कि बिकना हमें गवारा नहीं
~इफ़्तिख़ार आरिफ़ 🌻❤️
तुम को देखा तो ये ख़याल आया
ज़िंदगी धूप तुम घना साया
आज फिर दल ने इक तमन्ना की
आज फिर दिल को हम ने समझाया..
तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हम ने क्या खोया हम ने क्या पाया..
हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त... ने ऐसा गीत क्यूँ गाया..🌹
#जावेद_अख़्तर#जगजीत_सिंह#बस_यूंही🌸
शब-ए-फ़िराक़ थी हम ज़िक्र-ए-यार करते रहे,
ख़िज़ाँ से अख़्ज़ नशात-ए-बहार करते रहे !!
बड़े वसूक़ से दुनिया फ़रेब देती रही,
बड़े ख़ुलूस से हम ए'तिबार करते रहे !!
तमाम उम्र तिरी आरज़ू रही हम को,
तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार करते रहे !!
~ शौकत वास्ती
ये अलग बात है कि खामोश खड़े रहते हैं,
फिर भी जो लोग बड़े हैं,वो बड़े रहते हैं
ऐसे दरवेशों से मिलता है हमारा शजरा ,
जिनके कदमों में कई ताज पड़े रहते हैं
🌸🖤
~ राहत इंदौरी
हम इस तमीज़ के साथ उस के पास बैठते हैं
कि जैसे शाह के क़दमों में दास बैठते हैं
बस एक तू है जिसे दोस्त बोलता हूँ मैं
वगर्ना साथ में ऐसे पचास बैठते हैं
🖤🌸
अमूल्य मिश्रा
मौक़ा मिला तो जी लिया इक पल किसी के साथ
आगे न जाने क्या हो मेरी ज़िंदगी के साथ
इतनी मुहब्बतें मुझे पागल न कर दें यार
मुझसे मिला करो तो ज़रा बेरुख़ी के साथ
तुमसे ये मुलाक़ात मेरी आख़िरी ज़िद थी
अब मर भी गई तो मरूँगी इस ख़ुशी के साथ
🖤🌸
- मणिका
मैं नहीं कहता मुझे औरों से बेहतर चाहिए
मुझको जितनी है ज़रूरत उतनी चादर चाहिए
हैं परेशाँ इसलिए भी लोग अपनी प्यास से
प्यास की ख़ातिर सभी को इक समुंदर चाहिए
~ राघवेंद्र द्विवेदी
ख़ुशियों के तराने में ज़रा देर लगेगी
रूठे हैं मनाने में ज़रा देर लगेगी
ये दर्द ए जिगर तो मेरे अपनों ने दिया है
ये दर्द छुपाने में ज़रा देर लगेगी
बेटा मेरा धन के लिए परदेस गया है
मय्यत को उठाने में ज़रा देर लगेगी
ख़ुर्शीद हैदर
कहीं चराग़ बुझाना पड़ा कि मैं भी हूँ,
कहीं पे ख़ुद को जलाना पड़ा कि मैं भी हूँ !!
मेरे गले में जो डाला मेरे हरीफ़ों ने,
मुझे वो ढोल बजाना पड़ा कि मैं भी हूँ !!
वहाँ पे ख़ुद को दिखाया जहाँ मैं था ही नहीं
कहीं ये सच भी छुपाना पड़ा कि मैं भी हूँ !!
~ एहतिशाम हसन
वो मेरी बात को बातों में रख के भूल गया
के एक किताब किताबों में रख के भूल गया
हज़ार चेहरे जो बदले तो खो गया चेहरा
मैं अपना जिस्म लिबासों में रख के भूल गया
है याद आज भी दफ्तर का एक एक काग़ज़
मैं अपने ख़्वाब दराज़ों में रख कर भूल गया
🖤🌸
- अहमद सलमान