UGC पर आपने जैसे न्याय पूर्ण तरीके से अपनी बात रखी ,आपके सही सोच को मैं प्रणाम करती हूं🙏,ऐसा ही नेता सरकार में होना चाहिए ,जो सच्चाई का आईना दिखाए। 🙏✍️
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
दिल्ली की गलियों में पंकज धवरैय्या को दौड़कर बूढ़ी माँ ने पकड़ा बेटा इस UGC कानून को खत्म कराओ
भारत बचाओ यात्रा का पांचवां दिन -
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
ललितपुर का विष्णु तिवारी नाम का एक आदमी है। साल 2000 में पड़ोसियों से ज़मीन का झगड़ा हुआ। बस, एक झूठा बलात्कार और Sc St Act का केस ठोक दिया गया। सबूत? कुछ नहीं। गवाहियों में इतने छेद कि चलनी भी शर्मा जाए। फिर भी 20 साल जेल में सड़ गया।
परिवार तबाह। माँ-बाप और भाई जेल में रहते-रहते मर गए। पुश्तैनी ज़मीन बेचनी पड़ी। 43 साल की उम्र में निकला तो ज़िंदगी का कबाड़ा हो चुका था। 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी किया सबूत नहीं,लेकिन जो बीत गया, वो कौन लौटाएगा?
ये कोई अकेला मामला नहीं है। ऐसे हज़ारों विष्णु तिवारी इस देश में सड़ रहे हैं। SC/ST एक्ट को निजी बदले का हथियार बना दिया गया है। आँकड़े भी यही चिल्लाते हैं कितने केस झूठे साबित होते हैं, कितने सबूत के अभाव में बंद होते हैं। लेकिन नैरेटिव वाले बंधु चुप। क्योंकि असली पीड़ित अगर सवर्ण निकला तो वो ‘सामाजिक न्याय’ का हिस्सा नहीं रहता।
इस दुरुपयोग पर लगाम लगनी चाहिए। वरना ये कानून न्याय नहीं, बदले की मशीन बनकर रह जाएगा।
खागा नाका की सुषमा जाटव सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं अभद्र टिप्पणी कर रही है। हिंदू भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
@fatehpurpolice तुरंत कड़ी से कड़ी कार्रवाई करो, गिरफ्तारी तक RT जारी रहेंगे। जय श्री राम 🚩
आतंकवाद से कई गुना ज्यादा निर्दोष झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जाँच और झूठी गवाही के कारण मरते हैं।
घटिया नियम-कानून और सिस्टम कब बदलेगा?
@PMOIndia@narendramodi
CJP वाले आशुतोष रांका पर राजस्थान में Sc St Act लगा, राहुल गांधी पर उत्तराखंड में Sc St Act लगा, दोनों केस में गिरफ्तारी का नामोनिशान नहीं। लेकिन स्वतंत्र भारद्वाज के तीन महीने पुराने मामले में अचानक Sc St Act जोड़ दिया गया और उसी दिन गिरफ्तारी भी हो गई। अब बताओ, कानून एक है या हर शख्स के लिए अलग-अलग ड्राफ्ट छपवाया जाता है?
संविधान सबके लिए बराबर है, ये किताब में लिखा है। लेकिन अमल में देखो तो एक तरफ कोई गिरफ्तार ही नहीं होता, दूसरी तरफ पुराना केस अचानक जीवित हो जाता है।
अगर कानून का यही हाल रहा तो लोग पूछेंगे ही कि ये संविधान सबके लिए एक है या सिर्फ कागज पर छपा हुआ है।