*#StoryOfShriKrishna*
KABIR IS GODश्री विष्णु (श्री कृष्ण) केवल चार भुजा से युक्त हैं। ये दो भुजा तो बना सकते हैं, परंतु चार से अधिक का प्रदशर्न नहीं कर सकते। काल ब्रह्म हजार (संहस्र) भुजा
युक्त है। यह एक हजार तथा इन से नीचे भुजाओं का प्रदर्शन कर सकता है। हजार भुजाओं से अधिक का
*#StoryOfShriKrishna*
KABIR IS GODकबीर जी ने कहा है कि:-
कबीर, अक्षर पुरूष एक पेड़ है, क्षर पुरूष वाकी डार।
तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।।
अथार्त् गीता अध्याय 15 के श्लोक 1-3 में जो संकेत दिया है, उसको परमेश्वर कबीर जी ने स्पष्ट किया है कि संसार रूप वृक्ष का तना तो अक्षर
*#StoryOfShriKrishna*
श्री कृष्ण उर्फ श्री विष्णु तीन लोक के मालिक हैं। ये भी राहत दे सकते हैं, परंतु परमेश्वर कबीर जी असंख ब्रह्मण्डों के मालिक (प्रभु) हैं। वे ��ो राहत दे सकते हैं, वह श्री कृष्ण (श्री विष्णु) जी नहीं दे सकते। श्री कृष्ण जी ने तो केवल अठासी हजार
KABIR IS GOD
गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में कहा है कि उत्तम पुरूष यानि पुरूषोत्तम तो अन्य ही है जो परमात्म�� कहा जाता है। वास्तव में अविनाशी परमेश्वर यानि परम अक्षर ब्रह्म है।
इस प्रमाण से स्पष्ट हुआ है कि श्री विष्णु उर्फ श्री कृष्ण से अन्य परमेश्वर है जो वास्तव में अविनाशी है।
*#StoryOfShriKrishna*गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में कहा है कि उत्तम पुरूष यानि पुरूषोत्तम तो अन्य ही है जो परमात्मा कहा जाता है। वास्तव में अविनाशी परमेश्वर यानि परम अक्षर ब्रह���म है।
इस प्रमाण से स्पष्ट हुआ है कि श्री विष्णु उर्फ श्री कृष्ण से अन्य परमेश्वर है जो वास्त
KABIR IS GOD
*#StoryOfShriKrishna*गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में गीता ज्ञान दाता ने बताया कि हे अर्जुन! मैं बढ़ा हुआ काल हू��। अब प्रवृत हुआ हूँ अथार्त् श्री कृष्ण के शरीर में अब प्रवेश हुआ हूँ।
सर्व व्यक्तियों का नाश करूँगा। विपक्ष की सर्व सेना, तू युद्ध नहीं करेगा तो भी नष्ट हो
KABIR IS GOD
*#गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 18 के श्लोक 62 में अपने से अन्य परमेश्वर की शरण में जान��� की राय दी है। कहा है कि हे भारत! (तू) सब प्रकार से उस परमेश्वर की शरण में जा (जिसके विषय में ऊपर कहा है), उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति को तथा सनातन परम धाम को*
KABIR IS GOD
#गीता अध्याय 2 श्लोक 12:- इसमें गीता ज्ञान बोलने वाले ने कहा है कि ‘‘न तो ऐसा ही (है कि) मैं किसी काल में नहीं था। और तू नहीं था अथवा ये राजा लोग ��हीं
थे और न ऐसा (है कि) इससे आगे हम (मैं, तू तथा
ये राजा व सैनिक) सब (आगे) नहीं रहेंगे।
गीता ज्ञान दाता ने अर्जुन को उसकी शरण में जाने के लिए कहा है। कहा है कि यदि अर्जुन तू जन्म-मरण तथा जरा (वृद्धावस्था) से पूर्ण रूप से छुटकारा चाहता है तो मेरे से अन्य उस प��मेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म) की शरण में
��ा।
प्रमाण: अध्याय 2 श्लोक 17, अध्याय 18 श्लोक 46, 61 तथा 62
#क्या मिलावटखोरी से आजादी संभव है?
हाँ, बिल्कुल संभव है।
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी इसका जीता-जागता प्रमाण है। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी ईमानदार हैं वे को�� मिलावट नहीं करते। तत्वज्ञान के आधार पर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी बुराइयों से कोसों दूर हैं।
#देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी अपने अनुयायियों को ऐसा निर्मल ज्ञान दे रहे हैं जिससे उनके अनुयायी न रिश्वत लेते हैं और न देते हैं।
#तत्वज्ञान के प्रभाव से बुराइयों को समाज से हमेशा के लिए समाप्त कर देता है।
वर्तमान में यह नेक कार्य संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं। हम सभी को उनकी शरण में जाना चाहिए।
#तत्वज्ञान के प्रभाव से बुराइयों को समाज से हमेशा के लिए समाप्त कर देता है।
वर्तमान में यह नेक कार्य संत रामपाल जी ��हाराज कर रहे हैं। हम सभी को उनकी शरण में जाना चाहिए।
#क्या हम स्वतंत्रत हैं?
��हीं! अभी तो आज़ाद होना है नशे से, भ्रष्टाचार से, पाखण्ड से, दहेज से, जातिवाद से, साम्प्रदायिकता से, राग द्वेष से, हिंसा से, दुराचार से, कुप्रथाओं से।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने सभी बुराइयों से आजादी दिलाने और भारत को विश्वगुरु बनाने का बीड़
#क्या मिलावटखोरी से आजादी संभव है?
हाँ, बिल्कुल संभव है।
संत रामपाल जी म��ाराज के अनुयायी इसका जीता-जागता प्रमाण है। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी ईमानदार हैं वे कोई मिलावट नहीं करते। तत्वज्ञान के आधार पर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी बुराइयों से कोसों दूर हैं।
#देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी अपने अनुयायियों को ऐसा निर्मल ज्ञान दे रहे हैं जिससे उनके अनुयायी न रिश्वत लेते हैं और न देते हैं।ए
#तत्वज्ञान के प्रभाव से बुराइयों को समाज से हमेशा के लिए समाप्त कर देता है।
वर्त��ान में यह नेक कार्य संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं। हम सभी को उनकी शरण में जाना चाहिए।