How anyone in senses can translate * SAMVEDNA * that too by a person who is not fluent in SANSKRIT.
He will add things as per his understanding & not as per it's actual meanings wrt Sanatani beliefs.
कानून के जानकार बताए इस सरकारी अध्यापक पर IPC & CRPC के तहत कौनसी धाराएं लग सकती है।
अब अति हो रही है इस के द्वारा।
@DrBDKallaINC जी
@maheshsharmacm जी
Cc- @VedParkashUpad1
@KumarHa98707098@ashishvyas__@SJoshi67652378 सचमुच।
यदि अगड़ी जातियों के नेता चाहते तो आरक्षण विकराल रूप नहीं ले पाता।
एस सी/ एस टी एक्ट कभी पास नहीं होता।
लेकिन सबने मौन धारण किया हुआ है इसलिए जातिवादी नेता सरकार पर, सरकारी तंत्र पर हावी हो गए हैं और मनचाहा मलाई अपने जातियों को दिलवा रहे हैं।
@Ekthi_MeenuD यह समाचार सोसल मीडिया पर कई दिनों से है और बहुत वायरल भी हुआ।
लेकिन इसका खंडन आज आ रहा है।
तत्काल खंडन होता तो अच्छा रहता।
भ्रम की स्थिति नहीं बनता।
@love_you_Dears@Profdilipmandal महीने भर नहीं नहाएंगे, शौच से आने के बाद हाथ साफ नहीं करेंगे, फिर कहेंगे की साथ में खाना खाओ।
यह कभी संभव नहीं था और न होगा।
@AhmedKhabeer_ सर तन से जुदा का नारा नहीं लगता सरेआम तो शायद यह भी नहीं लगता।
पहले जिसने किया उस समय तो अच्छा लगा आप लोगों को। उस समय ही विरोध करना चाहिए था।
पहला सही नहीं था और यह भी नहीं।
ऐसा कहने की हिम्मत दिखाईए, उसी में सबकी भलाई है।
@Ramashray93@RajeevRai जातिवादी काम करके ही आज अंबेडकर देश भर में छा गए हैं।
जितना सम्मान उनको सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं, व्यक्तियों से मिल रहा है उतना किसी महापुरुष को नहीं मिल रहा है।
यह कटु सत्य है।
@RajeevRai भईया सोच तो वीपी सिंह, बीएन राऊ और अटल बिहारी बाजपेई जी की भी अच्छी थी, जिन्होंने अपने समाज के लिए कुछ नहीं किया, बदले में जातिगत आरक्षण,ScStAct, मण्डल कमिशन लाद दिया। जिससे उनको दलित ओबीसी ( मुस्लिम ईसाई बौद्ध) भगवान माने। पर क्या हुआ? जग जाहिर है।
@AmIAmbrish@KumarHa98707098 आरक्षित संसदीय/ विधानसभा सीट से एक ही व्यक्ति अनगिनत बार चुनाव लड़ता है, उस क्षेत्र से अपनी पार्टी टिकट कख नहीं मिलने पर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ते हैं।
अपने बाद वहां से अपने पुत्र, पुत्री को टिकट दिलवाकर चुनाव लड़ते हैं।
यह प्रजातांत्रिक व्यवस्था न होकर * राज शाही * है।
कोई भी राज्य सरकार ब्राह्मणों के उत्थान के लिए कार्य करती है, उनको सरकारी योजनाओं में " अछूत " नहीं मानती हो और उन योजनाओं का लाभ देती है तो उस सरकार का खुलकर समर्थन करना चाहिए , चाहे वो किसी पार्टी की सरकार हो।
ब्राह्मण महापंचायत जैसे आयोजन चुनाव से पहिले होना आम बात है। ऐसे आयोजन मुख्य रूप से विपक्ष की पार्टियां कराती है। राजस्थान में ब्राह्मणों की तादात अच्छी है। मौजूदा वक्त में अन्य राज्यो के मुकाबले सबसे अच्छा कार्य ब्राह्मणों के लिए @ashokgehlot51 ने किया है इसमें कोई 2 राय है।
@visaradah01@shashank_ssj Hindu temples has plenty of money but is taken by govt & is used for every other things except for Hindu cause.
Let Govt get out of mandir.
दलित ओबीसी को Vote देकर जिताओं तो वो अपने समाज के लिए कार्य करते हैं, भूमिहार ब्राह्मण क्षत्रिय लाला को जीताओ तो ओ भी दलित ओबीसी के लिए कार्य करते हैं। जेनरल समाज कब एक होगा? अपने बच्चें अपने अपने समाज के लिए। #EWS_आरक्षण_भी_अधूरा_दिया