ईरान में भगवान शिव का मंदिर, शिव स्तुति गाती ईरानी महिला, सिक्कों पर शिव। सदियों के रिश्ते और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से होता है यह।
कोई इजरायल में एक मंदिर दिखा दे मुझे...
Prepaid Recharge Customers के साथ हो रही लूट का मुद्दा आज मैंने Parliament में उठाया।
(a) अगर आपका recharge खत्म हो जाए तो Outgoing Calls बंद होना समझ में आता है, लेकिन Incoming Calls बंद करना मनमानी है।रिचार्ज खत्म होते ही न कोई आपसे संपर्क कर सकता है और न ही आपके फोन पर OTP जैसे जरूरी मैसेज आ पाते हैं। Emergency के हालातों में व्यक्ति बेसहारा हो जाता है।
(b) 28 दिन का Recharge plan एक scam है। साल में महीने 12 होते हैं लेकिन रिचार्ज 13 बार करवाना पड़ता है (28 days x 13 times = 364 days).
Recharge plan की वैधता calender months (30–31 दिन) के हिसाब से होनी चाहिए, क्योंकि 28 दिन के चक्कर में लोगों को साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
मोबाइल आज के समय में Luxury नहीं, बल्कि आम नागरिक की Necessity बन चुका है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ Fair और Transparent रवैया रखना चाहिए।
@DwivediMadan यह बात तो सपने देखने वाला ही बेहतर बता सकता है कि सपने देखने पर कोई रोक है या नही। 🤣
हम तो आंकड़ो, तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करते है तब बोलते और लिखते है।
@narendramodi जी,अमेरिका भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत देने वाला होता कौन है?
भारत संप्रभु देश है जो पूर्ण रूप से स्वतंत्र है और किसी बाहरी शक्ति या देश के नियंत्रण में नहीं है।अतःभारत के पास यह निर्णय लेने की सर्वोच्च शक्ति है कि वह किससे और कब तेल खरीदेगा।
@yadavakhilesh
अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की 'इजाजत' दी है. 30 दिन की छूट दी गई है.
- अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पोस्ट कर ये आदेश दिया
मोदी सरकार ने देश का ये हाल बना दिया है. अब अमेरिका तय कर रहा- भारत कहां से तेल खरीदेगा और कहां से नहीं.
ये बात PM मोदी तय नहीं कर रहे, ना ही भारत की सरकार तय कर रही है.
आज देश के नागरिकों के मन में यही सवाल है- अमेरिका होता कौन है भारत को इजाजत देने वाला? हम किसी देश के गुलाम नहीं, आजाद राष्ट्र हैं.
लेकिन नरेंद्र मोदी अमेरिका से ये सवाल नहीं पूछ सकते, क्योंकि वो पूरी तरह से compromised हैं और देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है.
शर्मनाक!
@narendramodi जी आज नेहरू जी,इंदिरा जी,राजीव जी और अटल जी कि कमी खल रही है क्योंकि यदि आज वो होते तो अमेरिका यह दुस्साहस करने कि हिम्मत ही ना करता। आप बस इस कृत्य के विरुद्ध दो शब्द ही बोल दीजिये।
@yadavakhilesh
@narendramodi जी भारतीय पर्यटन मंत्रालय ने अतुल्य भारत की व्यापक थीम के तहत अतिथि देवो भव अभियान शुरू किया है जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अपने पूरे प्रवास के दौरान भारत के अतिथि/पर्यटक सुरक्षित,सहज और सम्मानित महसूस करें परंतु यहाँ तो वापस लौटते अतिथि को मार दिया गया।😡
@narendramodi@PMOIndia जी याद दिलाना चाहूंगा कि सनातन संस्कृति मे "अतिथिदेवो भव" कि परंपरा है मतलब हम भारतीय अतिथियों के साथ देवताओं के समान आदर और व्यवहार करते है।
अमेरिका ने हमारे अतिथि पर रास्ते मे तब हमला किया जबकि वह लौटकर अपने घर जा रहा था।
#अतिथिदेवो_भव💔
@yadavakhilesh
—18 फरवरी 1983 नेल्ली नरसंहार
भारत के इतिहास में यह का एक दर्दनाक अध्याय है, जो असम आंदोलन के दौरान हुआ था, असम के नौगांव जिले के नेल्ली गांव और आसपास के 14 गांवों में करीब 7 घंटों में हजारों बंगाली मुसलमानों की हत्या कर दी गई!
▪️1979-1985 के बीच ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) और अन्य संगठनों ने मिलकर एक आंदोलन चलाया था, जिसमें स्थानीय असमिया लोगों की संस्कृति खतरे में हैं, कह कर 'बंगाली मुसलमानों' को 'बांग्लादेशी घुसपैठिए' कहा गया (जिस तरह आज "बिहार चुनाव में घुसपैठिया" पर राजनीती हो रही हैं)
▪️18 फरवरी 1983 को असम में राष्ट्रपति शासन लागू था, और राज्यपाल पद पर प्रकाश मेहरोत्रा थे,(दिसंबर 1981 से मार्च 1983 तक) क्योंकि असम आंदोलन के कारण निर्वाचित सरकार भंग कर दी गई थी!
▪️राज्यपाल को राज्य की कार्यकारी शक्तियां सौंपी गई थीं, वे केंद्र सरकार को सलाह देते थे और स्थानीय प्रशासन को निर्देश जारी करते थे, नेल्ली क्षेत्र में हिंसा की आशंका पहले से थी—असम आंदोलन के कारण चुनाव बहिष्कार हो रहा था, और बंगाली मुसलमानों को "घुसपैठिए" मानकर तनाव चरम पर था!
▪️फिर भी राज्यपाल ने केंद्र सरकार को लोकसभा चुनाव रोकने की सलाह तक नहीं दी, आंदोलनकारियों ने चुनाव का विरोध किया, और 'घुसपैठियों' की पहचान न होने तक चुनाव टालने और नेल्ली में रहने वाले बंगाली मुसलमानो का नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग की!
▪️नेल्ली को "संवेदनशील" क्षेत्र घोषित किया गया था, जहाँ पुलिस महानिरीक्षक के.पी.एस. गिल ने पहले से हिंसा की चेतावनी दी थी, राज्यपाल के कार्यालय को इन रिपोर्टों की जानकारी थी, और पर्याप्त सुरक्षा बल (करीब 1.5 लाख सैनिक CRPF और आर्मी) की तैनाती भी थी, पर सही समय पर कार्यवाही ना होने कारण नरसंहार को रोक नहीं पाये!
▪️17-18 फरवरी को चुनाव से ठीक पहले, स्थानीय पुलिस को नेल्ली के आसपास 1,000 से अधिक सशस्त्र लोगों के जमा होने की खबर मिली (जगिरोद पुलिस स्टेशन से वायरलेस मैसेज "माइनॉरिटी पीपल्स ऐर इन पैनिक एंड अप्रेहेंडिंग अटैक) यह मैसेज राज्यपाल के कार्यालय तक पहुंचा, लेकिन तत्काल कार्यवाही नहीं हुई!
▪️सुबह 8 बजे से शुरू हुए हमले जो करीब 6 से 7 घंटे तक चले, जिनमें हजारों बंगाली मुसलमान मारे गए, किन्तु प्रशासन तुरंत कुछ कर नहीं सका, राज्यपाल मेहरोत्रा ने बाद में केंद्र को रिपोर्ट भेजी, लेकिन तुरंत कोई सक्रिय हस्तक्षेप जैसे इमरजेंसी मीटिंग या अतिरिक्त फोर्स डिप्लॉयमेंट की मांग नहीं की!
▪️यह प्रशासनिक स्तर पर सीधे लापरवाही थी, क्योंकि नेल्ली को पहले से ही "ट्रबल्ड स्पॉट" माना गया था, के. पी. एस. गिल ने बाद में अपनी किताबों में लिखा कि "स्थानीय अधिकारियों ने शांति समितियां बनाने की सलाह दी थी, किन्तु राज्यपाल स्तर पर समन्वय की कमी थी"
▪️नरसंहार के बाद मार्च 1983 में राज्य में कांग्रेस सरकार बनने पर, जस्टिस त्रिभुवन प्रसाद तिवारी आयोग गठित हुआ, जिसकी रिपोर्ट 1984 में आयी, जिसमें राज्यपाल के कार्यकाल पर विफलताओं का आरोप लगा—जैसे हिंसा रोकने के उपायों की कमी, खुफिया जानकारी पर कार्यवाही न करना!
▪️इतिहासकार और पत्रकार हेमेंद्र नारायण अपनी किताब 'Nellie Massacre' में राज्यपाल को सीधे जिम्मेदार ठहराते हैं, क्योंकि राष्ट्रपति शासन में वे सारे फैसले ले रहे थे, 'प्लेन्स ट्राइबल काउंसिल' ने आरोप लगाया कि मेहरोत्रा ने शांति बहाली के बजाय लापरवाही में काम किया, और इसे "सिस्टेमिक फेलियर" माना, पुरे आंदोलन को लेकर राज्यपाल मेहरोत्रा की भूमिका निष्क्रिय रही!
▪️अब 42 साल बाद असम सरकार नेल्ली नरसंहार की तिवारी आयोग रिपोर्ट को विधानसभा में टेबल करने का फैसला लिया है, क्योंकि ये लाशों के गिद्ध हैं, जो पुराने जख्मो को कुरेद कर गोदी मिडिया के जरिये फिर से एक नये नरसंहार की पृष्ठभूमि तैयार करेंगे !!
#नेल्ली_नरसंहार