“आज 500 दो, कल फिर दुकान लगाना… हम कल दोबारा वसूलने आएंगे।”- नगर निगम के कर्मचारी का कथित फरमान।
आखिर बांकीपुर में यह कैसा ‘दैनिक वसूली मॉडल’ चल रहा है? 😀
बांकीपुर में ठेला लगाकर जीवनयापन करने वाले लोग नगर निगम की वसूली से त्रस्त हैं। उनका कहना है कि इस उपचुनाव में वे सरकार को सबक सिखाते हुए प्रशांत किशोर को जिताएंगे।
जब एक पत्रकार ने बांकीपुर विधानसभा के निवासी सज्जन राय से पूछा कि उन्हें प्रशांत किशोर में क्या पसंद है, तो उन्होंने बड़ी ईमानदारी से जवाब दिया। उनका जवाब सुनने लायक है- “वो एक शांत नेता हैं और उनमें कोई लालच नहीं है।” ❤️❤️❤️
People are celebrating Narendra Modi for becoming the longest-serving Prime Minister.
But I think that, day by day, he is becoming like our Nitish Chacha. They governed well during their first five years, but afterward they seemed more focused on staying in power, while the problems of ordinary people took a back seat.
विकास दिव्यकीर्ति के AI-जनरेटेड वीडियो पे कुछ छपरी लोग बहुत माइलेज लेना चाहते हैं I कोई नहीं लगे रहो, अगर इतनी ही तत्परता से बिहार को आगे बढ़ाने में लगायेंगे, सत्ता धारी से सवाल पूछेंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा I
हम लोग नारा लगाते हैं - “एक बिहारी, सौ पर भारी।”
लेकिन सच्चाई यह है कि आज सौ बिहारी मिलकर भी एक गुजराती के बराबर नहीं हैं। एक गुजराती फैक्ट्री लगाता है और उसमें एक लाख बिहारी काम करते हैं।
जिसका वर्तमान और भविष्य अंधकारमय होता है, वह अतीत को याद करके ही खुश हो जाता है। अतीत गौरवशाली होना अच्छी बात है, लेकिन केवल उसके सहारे ज़िंदगी नहीं चल सकती। वर्तमान और भविष्य को भी उतना ही मज़बूत बनाना पड़ता है।
हमारे बारे में वह कड़वा सच, जिसे इस वीडियो में प्रशांत किशोर उजागर कर रहे हैं - बतियाने के लिए जात और खाने के लिए 5 किलो भात। इतना मिलता रहे, ज़िंदगी चलती रहे। बिहार का जो होना होगा, होता रहेगा।
बांकीपुर में जब प्रशांत किशोर भाषण दे रहे थे, तभी एक व्यक्ति अचानक खड़ा हो गया और बोला, “हम आपको कम से कम एक बार इस सीट से चुनाव लड़ते और जीतते हुए देखना चाहते हैं। आप चुनाव लड़िए, हम आपको ज़रूर जिताएंगे।”
यह प्रशांत किशोर के प्रति लोगों के प्यार, भरोसे और दीवानगी को दर्शाता है।
हमने बिहार की तुलना में तमिलनाडु में केवल 2% प्रयास किया था। फिर भी तमिलनाडु में हम सरकार बदलने में सफल रहे, जबकि बिहार में हमें शून्य परिणाम मिला।
जिस राज्य में हमारे बिहार के लगभग 20 लाख लोग मज़दूरी करने जाते हैं, जो हमारे राज्य से कहीं अधिक विकसित है, वहाँ के लोग और बेहतर चाहते हैं। लेकिन हम आज भी दाल-भात-चोखा पाकर संतुष्ट हो जाते हैं।
बांकीपुर विधानसभा में पिछले चुनाव में केवल 39% लोगों ने वोट डाला था। साहब, बड़ी-बड़ी बातें करने से काम नहीं चलेगा। अगर आप वोट ही नहीं देंगे, तो बदलाव कैसे आएगा?
प्राचीन यूनानी दार्शनिक प्लेटो से जुड़ा एक प्रसिद्ध कथन है: ‘राजनीति में भाग लेने से इनकार करने की एक सज़ा यह है कि अंततः आप अपने से कम योग्य लोगों द्वारा शासित होते हैं।’ इसलिए शिकायत से पहले मतदान ज़रूर कीजिए।
आने वाले उपचुनाव में बड़ी संख्या में घरों से निकलें, मतदान करें और अपने विवेक से सही उम्मीदवार का चयन करें। लोकतंत्र तभी मज़बूत होगा जब नागरिक अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।