जिस पेड़ ने मरुस्थल को जीवन दिया,
आज वही खतरे में है!
🌳 खेजड़ी की रक्षा = भविष्य की रक्षा
खेजड़ी बचेगी,
तो ���रुधरा बचेगी।
❌ अवैध कटाई बंद करो
✅ संरक्षण सुनिश्चित करो
✊ अब चुप नहीं रहेंगे!
#WeWillSaveKhejari
@BhajanlalBjp
@PMOIndia | @RajCMO | @HMOIndia
रा��� 11:00 बजे बीकानेर 📍
यह उस नैतिक ऊर्जा का प्रमाण है, जो अक्सर रेगिस्तान की खामोशी में दबा दी जाती है, लेकिन मिटती नहीं। आज उसी खामोशी को सामने लाने के लिए पर्यावरण प्रहरी बैठे है।
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
कितनी उमंग है,
कितना उत्साह है।
मानो सबके हृदय में माँ अमृता देवी का सहज प्रकृति-प्रेम हिलोरे ले रहा हो।
जब रामसेतु का निर्माण हो रहा था, तब एक छोटी-सी गिलहरी जल में भीगकर रेत में लिपटती और पुल निर्माण में अपना योगदान देती थी। उस गिलहरी के मन में न तो प्��सिद्धि की चाह थी, न किसी प्रतिफल की अपेक्षा। युग बीत गए, पर उसका योगदान आज भी हमारी प्रेरणाओं का अभिन्न अंग बना हुआ है।
बीकानेर में जो हो रहा है, उसे देखिए यह सब भी वही गिलहरी-भावना है। इनके मन में न सोलर के नाम पर अवैध वसूली की इच्छा है, न बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्�� पाने की लालसा। इन्हें तो बस उसी खेजड़ी के लिए कठोर कानूनी संरक्षण चाहिए, जिसके लिए उनकी माँ अमृता देवी ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ये लोग स्वार्थरहित भाव से संघर्ष को पीड़ा नहीं, बल्कि आवश्यक त्याग मानकर आनंद के साथ झूम रहे हैं।
जब माँ अमृता देवी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, तब उनके मन में पूजनीय बनने का कोई अभिमान नहीं था। उनके हृदय में तो अपनी प्रकृति के प्रति अद्भुत प्रेम और गुरु ज��्भेश्वर जी महाराज की शिक्षाओं के प्रति अपार श्रद्धा थी। बाद में, जब इतिहास ने करवट ली, तब उन 363 वीर प्रकृति-प्रेमियों को स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया गया।
आज माँ अमृता देवी का नाम लेते ही सिर स्वतः श्रद्धा से झुक जाता है। थार के वीरान मरुस्थल में कहीं अकेली खड़ी एक खेजड़ी को देखकर उन त्यागमय, प्रकृति-रक्षक मूल्��ों का स्मरण हो आता है। क्षण भर के लिए ही सही, पर खेजड़ी निगाहों से ओझल नहीं हो पाती।
जिस प्रकार उस इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया, ठीक उसी प्रकार आने वाली पीढ़ियाँ भी इस समय को इतिहास में दर्ज करेंगी कि बीकानेर की धरती पर अनगिनत लोग केवल एक पेड़ की रक्षा के लिए सर्द रातों में सत्ता के सामने, गांधी के मूल्यों पर अडिग रहकर संघर्ष कर रहे थे। खेजड़ी किसी एक व्यक्ति, जाति या धर्म का विषय नहीं ��ै; यह तो हम सबको प्राण देने वाली, थार के लोगों को भीषण अकालों में जीवन देने वाली माँ है।
आज इस संघर्ष में कौन किस पक्ष में खड़ा है इसका भी लेखा-जोखा इतिहास लिखेगा। उन तमाम लोगों को भी स्थान मिलेगा, जो पर्दे के पीछे से व्यवस्था निर्माण में लगे हैं और मंच पर प्रतिनिधि चेहरों के रूप में सामने खड़े हैं।
यह संघर्ष प्रकृति की प्रेरणा से, गुरु जम्भेश्वर भगवान के आशीर्वाद से, माँ अमृता देवी के त्याग स��� और ग���ंधी के मूल्यों पर लड़ा जा रहा एक ऐसा ऐतिहासिक आंदोलन है, जो आने वाले कल में सदा के लिए स्मृतियों में दर्ज हो जाएगा।
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
#खेजड़ी_बचाओ_पर्यावरण_बचाओ
“सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण"
खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहाँ खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। ���ैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूँ। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है।
राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। मैं खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूँ।
#Bikaner #Orans #Jaisalmer
आज प्रातः काल सभी #खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव से कलेक्ट्रेट तक मौन जुलूस निकाल कर खेजड़ी का पूजन किया। अनशन पर बेठे साधु संतों सहित सभी पर्यावरण प्रेमियों ने मौन जुलूस के माध्यम से संदेश दिया। कि हम शान्ति से अपनी मांगे मनाना चाहते ह��।
सरकार के समक्ष हमारी दो स्पष्ट माँगें हैं।
१. सरकार खेजड़ी सुरक्षा अधिनियम लागू करने की निश्चित तिथि घोषित करे।
२.जब तक कानून विचाराधीन है, तब तक मुख्य सचिव द्वारा तत्काल सर्कुलर जारी कर यह निर्देश दिया जाए कि राज्य में खेजड़ी व अन्य हरे वृक्ष नहीं काटे जाएंगे।
सरकार से निवेदन है कि पर्यावरण प्रेमियों के धैर्य की परिक्षा नहीं ली जावें। यदि कीसी भी अनशन पर बेठे व्यक्ति के साथ कुछ अप्र���य हुआ तो सारी ज़िम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी।
#WeWillSaveKhejari #खेजड़ी_बचाओ @RajCMO @BhajanlalBjp @IgpBikaner @BikanerDm @PMOIndia
खेजड़ी बचाने के लिए जिसके पास जो भी माध्यम है, वह उसी से अपनी आवाज उठाए।
चुप बैठना गुनाह है।
सैंड आर्टिस्ट अजय सिंह रावत ने अपनी मिट्टी कला के माध्यम से खेजड़ी बचाओ आंदोलन को समर्थन दिया है। धन्यवाद
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव#खेजड़ी_बचाओ
यह दृश्य कोई नेता जी की सभा का नहीं है। राजस्थान के बीकानेर जिले मे चल रहे बिश्नोई समाज की महिला शक्ति द्वारा खेजड़ी बचाओ यान�� पर्यावरण संरक्षण आंदोलन का है।
वैसे हम सबका दायित्व बनता है पर्यावरण संरक्षण का।
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
#खेजड़ी_बचाओ_आंदोलन
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव | बीकानेर
आज बीकानेर महापड़ाव स्थल पर 29 संत, 1 साध्वी तथा 68 मातृशक्ति व 439 पुरुषों के साथ कुल 537 लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं।
अन्य हज़ारों लोग साथ में महापड़ाव पर है।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई वार्ता या संवाद नहीं हुआ है।
सरकार के समक्ष हमारी दो स्पष्ट माँगें हैं।
१. सरकार खेजड़ी सुरक्षा अधिनियम लागू करने की निश्चित तिथि घोषित करे।
२.जब तक कानून विचाराधीन है, तब तक मुख्य सचिव द्वारा तत्काल सर्कुलर जारी कर यह निर्देश दिया जाए कि राज्य में खेजड़ी व अन्य हरे वृक्ष नहीं काटे जाएंगे।
यदि ��मारी न्यायसंगत माँगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया और अनशनकारियों के साथ कोई अप्रिय स्थिति बनती है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
कल आप सभी अधिक से अधिक संख्या में बीकानेर महापड़ाव पहुँचें।
जो बंधु घर पर हैं, वे एक दिन का व्रत रखकर सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थन देकर आंदोलन को सशक्त करें। यह आंदोलन एक जन आन्दोलन है । सभी की इसमें भागीदारी होनी चाहिये । @RajCMO @BhajanlalBjp @IgpBikaner
आवाज़ ऐसे वैसे नियमो की दुहाई देती है
मरते जीवन की ची�� किसे सुनाई देती है
किशोर चौहान
जुड़े @shabdsahity
आज सभी तक पहुंचे , पर्यावरण के लिए 🙏🔂🔂
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव