कृष्ण और सुदामा की जोड़ी ने मिलकर स्वामी प्रसाद को चेतावनी थप्पड़ दिया है ।
धन्यवाद शिवम् यादव , धन्यवाद रोहित द्विवेदी जी सनातन धर्म आप दोनों धर्म योद्धाओं का ऋणी रहेगा ।
अभी 98 % यादव सनातनी हैं वो धर्म का अपमान नहीं सह सकते ।
केवल 2% यदमुल्ले हैं जो हिंदू धर्म को समाप्त करने का सपना देख रहे हैं।
कंचन बनर्जी की पुस्तक द बेनेगल ब्रदर्स में लेखक द्वारा यह तर्क दिया गया है कि डॉ. अंबेडकर को “architect of the Indian Constitution” कहे जाने के पीछे राजनीतिक कारण थे, जबकि वास्तविक प्रारूप, रूपरेखा और बुनियादी ढांचा बी. एन. राव द्वारा तैयार किया गया था।
लेखक यह भी मानते हैं कि इतिहास लेखन में हिंदुत्व विरोधी वामपंथी धारा के कारण कई राष्ट्रवादी और वास्तविक योगदानकर्ता हाशिए पर चले गए, जिनमें बेनेगल ब्रदर्स भी शामिल हैं।
लेखक ✍️ का तर्क है कि बी. एन. राव को 1946 में “संविधानिक सलाहकार” नियुक्त किया गया था:
उन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन किया।
उन्होंने ही पहला मसौदा तैयार किया, जिसे बाद में ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंपा गया। लेखक का कहना है कि अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाना, एक राजनीतिक समझौता था ताकि वे हिंदू कोड बिल आदि के लिए सहयोग दें।
इस अध्याय में यह तर्क आता है कि अंबेडकर की भूमिका अधिकतर “संपादन” और “सहमति बनाने” की थी, जबकि मूल ढाँचा राव ने तय किया।
लेखक बताते हैं कि बी. एन. राव एक प्रशासक, न्यायविद और अंतरराष्ट्रीय विधि के जानकार थे। उनके पास वह विधिक समझ थी, जो एक संविधान-निर्माता के लिए आवश्यक होती है।
लेखक ने कहा है कि “यदि संविधान की संरचनात्मक दृष्टि और विधिक बौद्धिकता का श्रेय किसी एक व्यक्ति को दिया जाए, तो वह अंबेडकर नहीं, बी. एन. राव हैं।”
बी. एन. राव की भूमिका को इतिहास ने अंडरप्ले किया।
यह जानबूझकर हुआ क्योंकि इतिहास लेखन पर “वामपंथी और अंबेडकरवादी दृष्टिकोण” हावी रहा।
लेखक यह बताने का प्रयास करते हैं कि डॉ. अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाना एक “राजनीतिक निर्णय” था, न कि उनकी योग्यता के कारण।
कांग्रेस नेतृत्व (विशेषकर नेहरू और पटेल) चाहते थे कि अंबेडकर को सत्ता में “शामिल” किया जाए ताकि दलितों और निचली जातियों में राजनीतिक असंतोष कम हो।
अंबेडकर की नियुक्ति एक प्रकार का “inclusive symbolism” था।
लेखक की मूल स्थापना में यह लिखा है कि भारत का संविधान बी. एन. राव की बौद्धिक और विधिक प्रतिभा का परिणाम था, न कि डॉ. अंबेडकर की।
डॉ. अंबेडकर को ‘संविधान निर्माता’ के रूप में प्रतिष्ठित किया जाना – एक राजनीतिक और वैचारिक ‘नैरेटिव’ था, जो कांग्रेस, नेहरू और अंबेडकर समर्थक गुटों ने मिलकर स्थापित किया।
गोली डंडे खाएंगे राम मन्दिर वही बनाएंगे✊
ये वो हिन्दू थे जिनका छाती असल मे 56 इंच का था, ये वो हिन्दू थे जिन्होंने 462 साल पहले लगा माथे का कलंक बाबरी ध्वस्त करके हटाया !
ठीक उसी तरह अब अब हिन्दुओ को एक होना पड़ेगा समय बदल गया है कानूनी तरीके से हर एक मंदिर लेना होगा ..
संभल में सर्वे दौरान हुई पत्थरबाजी से सर्वे रुकने वाला नही सर्वे का कार्य पूरा हो गया है अब रोककर दिखाओ खड़े खड़े पे*** दिए जाओगे ।।
तारीख पर तारीख से कब छुटकारा मिलेगा?
Justice Within Year कब लागू होगा?
Police Charter कब लागू होगा?
Judicial Charter कब लागू होगा?
Citizen Charter कब लागू होगा?
Administrative Charter कब लागू होगा?
जागो सांसद जागो, जागो विधायक जागो,
जागो सरकार जागो, जागो माई लार्ड जागो,
Why I hate Reservation so much ..??
Coming from a lower middle class Brahmin Family ..since childhood I was always told :- अच्छे से पढ़ लो और कोई ऑप्शन नहीं है । My ancestors barely had any cultivable land ( thanks to GANGA MATA ) .
My interactions with Reservation
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हराम-हलाल का ढोंग केवल सोसल मीडीया पर नफरत के लिए है
जब हवस की बात आती है तो ये लोग सड़क पर टेंपो में नंगे हो जाते हैं
तगड़क
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थराली उत्तरकाशी उत्तराखंड में आए जल प्रलय के लिए काली सेना की टीम पहुंच चुकी है
राहत सामग्री के साथ ।
यदि आपको किसी प्रकार का सहयोग चाहिए तो दिए गए नंबर पर संपर्क करे ।
भूपेश जोशी प्रदेश संयोजक काली सेना
98706 20875
अजय कप्तान (महामंत्री) काली सेना उत्तराखंड
+91 95369 49116