Hello @yadavakhilesh कैसे कैसे लोगों को टिकट देकर विधायक बना देते हो ?? अपनी पार्टी डुबानी है क्या?? एक विधायक का काम होता है जनता से सरल स्वभाव में बात करना... एक ये विधायक हैं जो मुझे नसीहत दे रही हैं कि तुम चुनाव लड़ लो....तुम विधायक बन जाओ और काम कर लो अपने क्षेत्र में.... तो मेरी आपसे रिक्वेस्ट है कृपया करके इस बार मछलीशहर विधानसभा में टिकट अल्का मौर्या को दीजिए और फिर अलका मौर्या काम करके दिखाएगी कि काम कैसे करवाया जाता है..... लेकिन अगर अपनी पार्टी को डूबानी हो तो ऐसे ही विधायक बनाते रहो..... क्योंकि अब जनता जाग चुकी है....और हां @sonker_ragini मुझे सलाह देने के बजाय कि मैं किस से सवाल करूँ, किससे नहीं जाकर मेरी वीडियो देखिए.... और खासकर ये वीडियो आपके लिए ही है....
आरएसएस से जुड़े संगठनों को करोड़ों की फंडिंग
खोजी पत्रकारिता के लिए मशहूर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Bellingcat ने एक बड़ा ख़ुलासा किया है। उसने बताया है कि अमेरिका में रजिस्टर्ड दो गैर-लाभकारी संस्थाओं—Ekal Vidyalaya Foundation of USA और Sewa International Inc—को 2020 से 2024 के बीच कम से कम 2.44 करोड़ डॉलर डोनर-एडवाइज्ड फंड्स (DAFs) के जरिए मिले।
यह कुल 11.78 करोड़ डॉलर के योगदान का लगभग 21 प्रतिशत था। इन फंड्स का बड़ा हिस्सा भारत में शिक्षा (Ekal Vidyalaya स्कूल) और कथित तौर पर मानवीय कार्यों के लिए सेवा भारती को ट्रांसफर हुआ। Ekal USA ने 3.37 करोड़ डॉलर भारत में स्कूलों को भेजे, जबकि Sewa USA ने लगभग 2.97 करोड़ डॉलर दिए।
ये सबको पता है कि एकल विद्यालय और सेवा भारती दोनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेटवर्क का हिस्सा हैं। रिपोर्ट बताती है कि DAF के पैसे सीधे RSS को नहीं गए बल्कि US-आधारित संस्थाओं के माध्यम से भारत में आरएसएस की ही संस्थाओं को शिक्षा और सेवा परियोजनाओं के लिए भेजा गया। अब इस राशि का इस्तेमाल कहाँ, किस तरह किया गया, कोई नहीं जानता।
आरएसएस और उससे जुड़े विदेशी फंडिंग को लेकर अरसे से संदेह के घेरे में रहें हैं। कहा जाता है कि विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या आंदोलन के समय बड़ी फंडिग पाई थी और उसका दुरुपयोग भी हुआ था।
यह खुलासा भारत में विदेशी फंडिंग को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। सरकार ने FCRA कानून को सख्त किया है और क़रीब 22000 NGO के लाइसेंस रद्द किए हैं। इनमें कई मानव अधिकार, पर्यावरण और अल्पसंख्यक-संबद्ध संगठनों के साथ-साथ कुछ अन्य संस्थाएं भी शामिल हैं।
ज़ाहिर है कि सरकार चुनींदा ढंग से एनजीओ को निशाना बना रही है। संघ परिवार के संगठनों पर वह मेहरबान है, मगर जो सरकारी लाइन पर नहीं चलते उनके लायसेंस रद्द कर दिए जाते हैं।
RSS का खेल ये है कि वह खुद रजिस्टर्ड NGO नहीं है, इसलिए वह सीधे FCRA के दायरे में नहीं आता। उसके सहयोगी सेवा संगठन (जैसे सेवा भारती) शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे कार्यों के नाम पर FCRA लाइसेंस प्राप्त करके फंडिंग लाते हैं।
DAF का इस्तेमाल डोनर की पहचान छिपाने की सुविधा देता है। इससे पारदर्शिता कम होती है, चाहे फंड किसी भी दिशा में जाए। अमेरिका में ऐसे फंड्स आम हैं और टैक्स लाभ देते हैं, लेकिन जब पैसा विदेश जाता है तो प्राप्तकर्ता देश के नियमों की जिम्मेदारी अलग हो जाती है।
भारत में FCRA का उद्देश्य विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना है, लेकिन उसको मोदी सरकार एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
इस रिपोर्ट से दो बातें साफ होती हैं। पहली, RSS से जुड़े या सहयोगी माने जाने वाले संगठनों को विदेश से फंड मिलता रहा है। दूसरी, विदेशी फंडिंग पर सख्ती का दावा करने वाली सरकार के पास भी ऐसे नेटवर्क के लिए कानूनी रास्ते खुले रहे हैं। पारदर्शिता की मांग दोनों तरफ से उठनी चाहिए—चाहे फंड किसी भी वैचारिक समूह को जाए।
Manoj Agarwal - you’re a vote chor, your boss Gyanu is a vote chor & his boss Modi is a vote chor. Listen to LoP Lok Sabha if you can’t hear me clearly. I will post proof every day. File it in your next pleadings.
उत्तराखंड की बीजेपी सरकार ने मोहल्ले की आटा चक्की खोलने को तो इन्वेस्टमेंट मान ही किया है। 😂अब तो शायद जल्दी ही धामी सरकार ये भी कहने लगे कि:
विदेशी कंपनी का कोक-पेप्सी खरीदना भी अब विदेशी निवेश माना जाएगा।
जो फ्रिज ख़रीदगा, उसे कोल्ड स्टोरेज में इन्वेस्टमेंट माना जाएगा।
पकौड़े तलने को फूड प्रोसेसिंग इन्वेस्टमेंट कहेंगे।
शादी में बुलाए मेहमानों को टूरिस्ट का दर्जा मिलेगा।
मज़ाक़ बना दिया है।
कांग्रेस ने SIDCUL बनाये थे, जिनमें बड़ी बड़ी कंपनियों ने इंडस्ट्री शुरू की थी, जैसे:
Tata Motors
Bajaj Auto
Nestle India
Brittania
Dabur
Greenplu
Hero Honda
ITC
Hindustan Lever
Mahendra &Mahendra
Cipla
Intas
IPCA
उत्तराखंड में निवेश के नाम पर धामी सरकार का फ़र्ज़ीवाड़ा - और यह BJP ‘डबल इंजन' मॉडल का एक और नमूना है।
Global Investors Summit का ढिंढोरा पीटा गया: 1,779 MoU, ₹3.56 लाख करोड़। रोडशो पर जनता के लगभग ₹100 करोड़ ख़र्च हुए | फिर सरकार ने ₹1 लाख करोड़ को "ज़मीन पर उतरा निवेश" बताया।
Newslaundry ने जाँचा कि यह निवेश किसका है:
* आटा चक्कियाँ, खाद-बीज की दुकानें और छोटे क्लीनिक "निवेशक" गिन लिए गए। कुछ को पता तक नहीं था।
* ₹35,279 करोड़ - यानी 35% - सरकारी बिजली कंपनियों के हैं।
* CSR और दान से चलने वाले एक स्कूल को ₹24.49 करोड़ का "निवेशक" बताया गया।
* ₹1,200 करोड़ के "निवेशक" की कमाई चार साल से शून्य है, और रिकॉर्ड में उसका एक भी कर्मचारी नहीं।
* दुबई-लंदन के रोडशो से ₹27,975 करोड़ का दावा हुआ, पर "ज़मीन पर उतरे" निवेशकों की सूची में इन दोनों शहरों की एक भी कंपनी नहीं।
और समिट से सिर्फ़ सात दिन पहले, 1 दिसंबर 2023 को, "निवेश" की परिभाषा ही ढीली कर दी गई। इसे कहते हैं: पहले नियम बदलो, फिर आँकड़े बताओ।
मुख्यमंत्री 3,300 "निवेशकों" की पूरी सूची सार्वजनिक करें।
निवेश कागज़ पर। रोज़गार नारों में। और उत्तराखंड के युवाओं के हिस्से - पेपर लीक।
@newslaundry@Basantrajsonu
https://t.co/Iz2ZtQWycQ
Reposting this tweet today.
It took almost two years of consistent pressure from @RahulGandhi and Congress party; and protests on road for ECI to accept some demands and make amends.
Details of deleted voters, shifted voters, total number of Form 6 and Form 7 submitted will now be provided on weekly basis in SSR.
There is a renewed limit on number of Form 7 that a person can file. But this limit was earlier also! So what happens to those who violated it then, even though it was illegal offence? सब माफ़?
And still many issue remain unaddressed. So the fight is on.
Step 1: Beg the police to arrest you on camera.
Step 2: Have PR channels post "Democracy Dead!"
Step 3: Get bail from SEM court before sunset.
Step 4: Monetize the drama on Twitter & YouTube!
Pure clout chasing!
CJP is not fighting the regime. they are feeding off opposition momentum to build their own brand!
Stop handing over the democratic fight to camera-friendly influencers. Support the Youth Congress workers who stay through the storm!