दुख हमेशा हम लड़कियों के हिस्से में ही आया है 💔 🥹
30 लड़कों ने एक लड़की का दिन दहाड़े अपहरण किया
इनके हौसले इतने बढ़ गए कि पुलिस का भी खौफ नहीं
लड़कियों यहां जन्म लेना ही पाप हे 🥹
यह मंजर मेरे लिए असहनीय ओर कातर हे
“1 के पास 1 है तो 2 होता है🤯
लेकिन 1 के साथ 1 होता है तो 11 हो जाता है🤯
भारत और ऑस्ट्रेलिया साथ-साथ है इसलिए 1 के बगल में 1, 2 नहीं हो रहा
1 के बगल में 1 - 11 हो रहा है”🤯
कोई रोक लो मोदी जी को
विदेश में कितनी बार साबित करेंगे कि ऊपर का माला खाली है 🥴
मुजफ्फरनगर में कांवड़िए इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा को धमकी दे रहे हैं- "ज्यादा वर्दी का गुरुर हो तो 5 मिनट में उतरवा दूंगा"
मेरठ SSP अविनाश पांडेय कांवड़ियों के साथ वही कर सकते हैं क्या जो दलितों के साथ किए हैं?
सिंघम बने UP पुलिस वाले यहां बिल्लिम बन गए हैं?
एक पॉस्को के अपराधी विनय पंडित के समर्थन में ब्राह्मणों ने SP कार्यालय को घेरकर प्रदर्शन किया था, उनको हाथ तक नहीं लगा पाए थे क्योंकि ब्राह्मण पूजनीय है,
एक दलित बेटी की जघन्य हत्या के बाद 2 महीने तक न्याय नहीं मिला तो दलित वर्ग प्रदर्शन कर रहा था उनके ऊपर लाठी चार्ज किया गया, मुकदमे दर्ज़ किए, प्रिजन वैन में मारा क्योंकि दलित थे,
सरकार और पुलिस दोहरा रवैया अपना रही है, यह बेहद खतरनाक पुलिसिया दमन है, शर्मनाक।
कप्तान SSP अविनाश पांडेय को पुलिस वैन में जाकर आंदोलन में डिटेन किए गए लोगों को थप्पड़ नही मारना चाहिए था.
पुलिस को Crowd Control की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है.
पुलिस भीड़ पर हल्का बल प्रयोग कर सकती है. लेकिन पुलिस कस्टडी में किसी को भी पीटने का अधिकार पुलिस के पास नही है.
जब मामला शांत हो चुका था. आंदोलनकारियों पकड़कर पुलिस वैन बंद कर दिया, तो वैन का दरवाजा खोलकर थप्पड़ क्यों मारा ?
UPSC को भंग करना चाहिए. इस देश को आईएएस आईपीएस से कभी कोई भला नही हुआ है. आईपीएस आईएएस आम जनता से मिलते भी हैं तो एक राजा की तरह. आम नागरिक को थप्पड़ मारना कोई बहादुरी नही है.
जब सवर्ण प्रोटेस्ट करता है तो प्रशासन दांत निपोरते हुए उनके साथ हाहाहा करते हैं, पर जब दलित न्याय मांगता है तो यही पुलिसवाले उन्हें गाली देते हैं, थप्पड़ मारते हैं।
जाति और सत्ता का फर्क है बाबू। वर्ना अविनाश पांडेय की क्या औकात कि वह दलितों को बहन की गाली दे देता।
मैं इसीलिए कहता हूँ कि दलित समुदाय के लोग अपने घर में आग लगाकर पड़ोसी के महल में बैठकर खुश होने वाली सोच का दंश झेल रहे हैं। अगर समाज ने आज बसपा को कमजोर न किया होता, तो क्या एक IPS अफसर की इतनी औकात होती कि वह "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने, इनके पिता जी की रोड नहीं है" जैसी गालियां देता? क्या वह आंदोलन में खड़े युवाओं को थप्पड़ मारता और बंदी वाहन में घुसकर समाज के युवाओं पर अपना जातीय रौब दिखाता? चूंकि वह मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का खास अफसर है, जाति से ब्राह्मण है, इसलिए सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
दलितों को हिंदू कहकर हिंदू एकता का नारा देने वाले लोगों का दोहरा चरित्र देखिए। आज वे खुलकर गालीबाज SSP अविनाश पांडेय के समर्थन में हैशटैग चला रहे हैं। इससे साफ सिद्ध होता है कि सवर्णों की हिंदू एकता का मतलब सिर्फ सवर्ण हितों को सुनिश्चित करना है। वरना जो द्विज हिंदू कल तक बिहार के कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के लिए विलाप कर रहे थे, आज वे अविनाश पांडेय की गालीबाजी और गुंडागर्दी का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सवर्ण प्रभुत्व ही इनकी हिंदू एकता का सार है; भाजपा सरकार और उसके अफसर इसी हित को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
पंडित जी ग्रंथ को पढ़ते हुए कह रहे हैं "अप्राकृतिक संबंध महापाप है" 🔥
फ़िर मुंह से पैदा होना प्राकृतिक कैसे हुआ, पंडित जी बताएं, महात्मा ज्योतिबा फुले ने सवाल किया था, उस बेटिचो* के मुंह में गर्भ कैसे ठहरा होगा ?
पीएम मोदी का स्क्रिप्ट राइटर मूर्ख है!
कल इंडोनेशिया के भाषण में 7+1 = 8 जैसा छिछलापन
आज ऑस्ट्रेलिया वाले भाषण में 1+1 = 11 वाला छिछोरापन!
गोदी मीडिया “मास्टर स्ट्रोक” कब कहेगा ? या सुनकर ही “ब्रेन स्ट्रोक” हो गया?
बिहार में ₹800 करोड़ का चारा घोटाला लालू "यादव" के नाम से जुड़ा था। अब मध्य प्रदेश में मोहन "यादव" के काल में लगभग ₹1,200 करोड़ का चावल घोटाला सामने आया है। दोनों मामलों में एक ही चीज़ कॉमन है--"जाति"..
सरकारी गोदाम के ₹4,000 प्रति क्विंटल वाले चावल को सड़ा हुआ घोषित करके ₹2,300 प्रति क्विंटल की दर से एथेनॉल प्लांट को बेच दिया गया।
एथेनॉल प्लांट ने देखा कि चावल तो ठीक है, इसलिए उसे ₹2,800 प्रति क्विंटल में राइस मिल को बेच दिया।
इसके बाद राइस मिल ने वही चावल दोबारा ₹4,000 प्रति क्विंटल की दर से सरकार को बेच दिया।
मज़ा आया ना? 🤔😂
@amitkilhor@ajeetbharti
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिज़र्वेशन नहीं है। वहाँ 24 कैरेट का शुद्ध मेरिट और टैलेंट उबल रहा है और ये देश की सबसे निठल्ली संस्थाएँ हैं।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 60 लाख केस पेंडिंग हैं। 20-20 सुनवाई के बाद इनसे जजमेंट नहीं लिखा जाता। इन्हें खुद को भंग कर लेना चाहिए।
यह भाई इसी कोलेजियम सिस्टम से परेशान लग रहा है। इसलिए अपना आपा खो बैठा। और ब्राह्मण सूर्यकांत शर्मा को गाली दे डाली।
हज़ारों स्त्रियों के साथ यौन अपराध करने वाले शैतान के समर्थन में वोट माँगने वाले व्यक्ति को आप स्वीकार करते हैं
और फिर 11 साल की बच्ची के साथ रेप करने वालों के लिये फाँसी माँगते हैं
अपने धर्म के बलात्कारियों के पक्ष में जुलूस निकालने वालों का आप समर्थन करते हैं
और फिर 13 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले 32 लड़कों को दरिंदा भी कहते हैं
आपको स्वीकार है कि संसद में बलात्कारी बैठे और देश की नीतियाँ बनाए मगर रोते हैं कि जनता ही बहुत ख़राब है इसमे सरकार क्या करेगी?
आप पहलवान लड़कियों के यौन शोषण की अपील को , उनके दुख पीड़ा को जाट राजपूत की राजनीति कहकर ख़ारिज कर देते हैं,
मगर घर की बेटी को उसी नेता के पास भेजने से पहले 10 बार सोचेंगे.
आप हाथरस की बच्ची के बलात्कार पर चुप रहते हैं कि वह दलित है
सरकार जब बिलकिस बानो के बलात्कारियों को मालाएँ पहना कर प्रोत्साहन देती है तो आपको लगता है कि सही ही करती है, इनके साथ ऐसा ही होना चाहिए
फिर इतने मासूम भी बने रहते हैं कि बलात्कारी हमेशा दूसरे धर्म की और सनातनी पायदान पर नीचली कहे जाने वाली जाति की लड़कियों का ही बलात्कार करेंगे. समान धर्म और जाति वालों की लड़कियों का नाम जाति धर्म पूछकर छोड़ देंगे.
जब आप बलात्कारियों के पक्ष में ताली थाली बजाते ही हैं, जब आपको कुछ शर्तों के साथ समाज मे बलात्कार के वैध होने पर कोई ऐतराज है ही नहीं, तो प्लीज़ देश की बच्चियों पर हो रहे शारीरिक अपराधों पर दुखी होने का नाटक मत कीजिये. इतना दोगलापन भी ठीक नहीं.
यह निरंतर वहशी होता समाज हमारा ही बनाया हुआ है,
हम एक बेहद स्त्री द्वेषी समाज हैं,
ऐसे समाज में बच्चियों का बलात्कार नही होगा तो कहाँ होगा
अपराधियो को फाँसी मिले , ठीक
और हमको❓
- @Kanupriya236 जी की पोस्ट ✍️
• पुलिस के पास न्याय लेने जाओ
तो घूस दो ,
• तहसील काम करवाने जाओ तो
घूस दो ,
• मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना है तो
घूस दो ,
• जन्म प्रमाण पत्र बनवाना है तो
घूस दो ,
• ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है तो
घूस दो ,
• पासपोर्ट वेरिफिकेशन करवाना है
तो पुलिस को घूस दो ,
• DM ऑफिस में कोई काम
करवाना है तो बाबू को घूस दो ,
• अपनी ही जमीन माफिया और
अपराधियों के चंगुल से छुड़वानी है
तो घूस दो ,
• सरकारी अस्पताल में बिस्तर
चाहिए तो घूस दो या सेटिंग करो
• बिजली कनेक्शन का मसला है तो
घूस दो ,
• बिजनेस चालू करना है तो
लाइसेंस के लिए घूस दो ,
• न्याय चाहिए तो पैसा खर्च करो
क्या इस देश में कोई भी ऐसा
डिपार्टमेंट है जहाँ बिना घूस के
काम चलता हो?
“पेट्रोल में क्या मिलाना है और क्या नहीं मिलाना है वो मेरा काम नहीं है,
मेरा काम ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री का है”
सब गुड़गोबार करने के बाद मंत्री जी झोला उठा लिए हैं