@myogiadityanath जी Freebies के अलावा भी कुछ है?
आम आदमी अपनी मेहनत के कमाए पैसे से टैक्स देता है.
बच्चों को बेहतर शिक्षा देता है कि पढ़कर आगे बढ़ेगा.
आपका तंत्र उसे कुचल देता है वो पूरी जिंदगी यही सोचता है कि फेल कहां हुआ?
एक तरफ आपकी सरकार सुहागरात से लेकर श्मशान घाट हर तरह का खर्च उठाती है.
जम्मू कश्मीर के पूर्व DGP शेष पाल वैध जी ने कहा,
"सरकार ने सीजेपी के सामने सुप्रीम कोर्ट में लिखकर दे दिया कि उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भी दूसरे राज्यों में दर्ज ऐसे मामलों को वापस लेने की बात कही।
तो सवाल है कि आगे से कोई अराजकता फैलाए, पुलिसवालों को घायल करे, पब्लिक प्रॉपर्टी और गाड़ियाँ तोड़े, तो क्या पुलिस को कार्रवाई करने से पहले पूछना चाहिए कि FIR करनी है या नहीं?
दिल्ली पुलिस ने जिन लोगों को आइडेंटिफाई किया, उनमें कथित तौर पर कई लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड था। अगर पहले की FIR ठीक थी तो नई FIR क्यों?
मुझे लगता है, यह बहुत खतरनाक ट्रेंड है। झारखंड में जेनुइन बच्चे अपने हक के लिए लड़ रहे थे, उन पर लाठीचार्ज हुआ, लेकिन उनके केस वापस लेने की कोई बात नहीं हुई। यहाँ मापदंड अलग क्यों है?
भारत सरकार ने जिस तरह सीजेपी के सामने सरेंडर किया, उससे गलत संदेश जाएगा कि कोई भी पुलिस के सिर फोड़ दे, पब्लिक प्रॉपर्टी तोड़ दे और पुलिस कार्रवाई भी न करे।
मेरी अपील भारत सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से है कि इस चीज से बचना चाहिए।"
@mktyaggi 80 करोड़ लोग मतलब 10 करोड़ परिवार कम से कम जो कि भारत सरकार से मुफ्त राशन ले रहे हैं इसके लाभार्थी होंगे.
साल के 8 लाख कमाने वाले परिवार भारत की जनसंख्या के 10% होंगे. क्या पता इससे भी कम क्योंकि प्राइवेट जॉब में आज भी maximum 30k/Month ही मिल पाता है 80-90% स्टाफ को.
माँ के निधन के बाद पैतृक गाँव लौटा बेटा, अब जान बचाने की गुहार, SC-ST Act की धमकियों से हालात ऐसे कि कह रहा है: “या तो गाँव छोड़ना पड़ेगा, या मेरी जान चली जाएगी!”
"मैं राजपूत ठाकुर जाति से संबंध रखता हूँ और मेरा जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश है। दरअसल, मैं काफी लंबे समय से दिल्ली में रह रहा था। अभी दो महीने पहले मेरी माता का निधन हुआ, तो मुझे अपने पैतृक गाँव में आकर रहना पड़ा।
तो यहाँ की स्थिति ये है कि मेरे पड़ोसी जो भीम आर्मी संगठन से जुड़े हुए हैं। उन लोगों ने मुझे इतना बुरी तरह से प्रताड़ित कर रखा है कि वे मेरे घर में जबरदस्ती घुसने का प्रयास करते हैं, मुझे हमेशा गालियाँ देते हैं, धमकियाँ देते हैं और आते-जाते हुए रास्ते में मुझे परेशान करते हैं।
मेरे पास वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिसमें मुझसे ये तक कहा गया है कि, तू हमारी तरफ देखता क्यों है? तू हमारी तरफ देखेगा नहीं और तू जमीन कि तरफ नीचे नज़र करके चलेगा, हमारे सामने।
मैंने पुलिस को भी इस संबंध में कई बार शिकायत दी है। एक महीने से मैं कई बार पुलिस को शिकायत दे चुका हूँ। पुलिस का हमेशा आश्वासन रहता है कि कार्रवाई की जाएगी।
इसी क्रम में आज सुबह मेरे साथ इन लोगों ने मारपीट की है, गाली-गलौज की है और मुझे धमकी दी है कि हम तुम्हें फर्जी एससी-एसटी एक्ट और महिला उत्पीड़न के केस में किसी न किसी तरह फँसाकर जेल भेजवा देंगे। तुम्हें आज के आज यहाँ से जाना पड़ेगा, या तो तुम यहाँ से कहीं बाहर चले जाओ, नहीं तो हम तुम्हें जेल भेज देंगे।
मेरे घर में बहुत सारे लोग नहीं हैं। दरअसल, मैं अकेला हूँ और मेरे वृद्ध पिता हैं। मेरा बहुत बुरी तरह से शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा है।
तो मेरा सभी संगठनों से, जो भी सवर्ण संगठन हैं या जो भी इस तरह के कुकृत्यों के संबंध में हम जैसे लोगों की रक्षा करते हैं या सुरक्षा करते हैं, उनसे निवेदन है कि मेरी सुरक्षा की जाए।
आज जिस तरह से मेरे साथ मारपीट की गई है, मुझे अपनी हत्या तक किए जाने का डर है। अगर मुझे कुछ होता है तो यही लोग, जिनके खिलाफ मैंने शिकायत और प्रार्थना पत्र में नाम दिया है, वही लोग उसके जिम्मेदार होंगे।
इन लोगों के द्वारा गलियों में तलवारें लहराई जाती हैं, गली में नीला गमछा डालकर और तरह-तरह से मुझे उत्पीड़ित किया जाता है।
तो मेरा यही निवेदन है कि सभी लोग मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि मैं पुलिस में भी कई बार कंप्लेंट दे चुका हूँ। आज पुलिस के द्वारा मुझे आश्वासन दिया गया है कि जो संबंधित लोग मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं, उनके खिलाफ आज मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
परंतु मेरा कहना ये है कि अगर मुझे इसी तरह प्रताड़ित किया गया और मेरे बचाव में कोई संस्था या कोई लोग नहीं आते हैं, या मेरे ऊपर किसी तरह का फर्जी मुकदमा दर्ज होता है, तो मेरे पास दो रास्ते होंगे। एक रास्ता होगा कि मैं अपने प्राणों की आहुति दे दूँ या अपनी जीवन समाप्त कर लूँ, क्योंकि मैं एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूँ और मुझे इस तरह प्रताड़ित करके या जेल भेजने का अगर काम किया जाएगा, तो मैं अपने प्राण देने के लिए मजबूर रहूँगा और मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं होगा।
इसके अलावा, मुझे पलायन करना पड़ेगा। मुझे समझ में नहीं आता कि मेरे कई पीढ़ियों से मेरे पूर्वज यहाँ पर रहे हैं, तो अचानक ऐसा क्या हुआ है कि मुझे यहाँ से भगाया जा रहा है।
चूँकि मेरा घर इस गाँव में अंतिम पंक्ति में है, ठाकुरों के गाँव में जो घर होते हैं, उसकी अंतिम पंक्ति में मेरा घर है। इन लोगों की कम्युनिटी ने चारों तरफ घर बनाकर हमें चारों तरफ से घेर रखा है।
तो अब इन लोगों का ये है कि इन्होंने मुझे वल्नरेबल समझ लिया है कि मैं इनके लिए बहुत ईज़ी टारगेट हूँ।
तो अगर मेरी किसी तरह हत्या हो जाती है या मुझे किसी केस में फँसाया जाता है, तो उसके लिए वही लोग जिम्मेदार होंगे।
मेरे पास दूसरा रास्ता ये भी है, जो मेरे दिमाग में आ रहा है, कि मुझे धर्म परिवर्तन कर लेना चाहिए, ताकि मेरे ऊपर से ये ठाकुर वाला दाग हट जाए। इसको मैं दाग कहूँगा।
एक्चुअली, मैं इस पर पहले गर्व महसूस करता था। गर्व इसलिए महसूस करता था कि हमारे पूर्वजों ने काफी वीरताएँ दिखाई हैं, युद्ध लड़े हैं और कई युद्ध जीते हैं। उन्होंने देश को आगे बढ़ाने में प्रयास किया है।
लेकिन अभी मुझे इस बात का भय है कि जिस जाति से मैं बिलॉन्ग करता हूँ, वही जाति मेरे प्राणों के लिए काफी कष्टकर साबित हो रही है।"
RHA की अब तक की सबसे बड़ी जीत:
१. आरक्षण पर सोशल मीडिया और मीडिया में लगातार चर्चा
२. आरक्षण पर ‘दलित नेता’ की जगह अमुक जाति बनाम अमुक जाति का वाक्युद्ध
३. आरक्षण पर लोगों के पास आँकड़े, तथ्य और तर्क
४. सरकार द्वारा एकता तोड़ने के प्रयास, जो लोगों को दिख रही है
५. आरक्षण पर उपेक्षित जातियों के कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा खुल कर अपनी बात रखने का आरंभ
आने वाले दिनों में यह और वृहद् और व्यापक होने वाला है। नवंबर की प्रतीक्षा कीजिए।
@NijiSachiv जो मुसहर जाति मेरे गाँव ke आसपास हैं उनका जीवन यापन खाने के लिए पत्तल और दोने बनाते है ! देश में फैले आरक्षण नामक बीमारी का उनको कुछ नहीं पता है.
यहां तक कि उन्हें बिजली मकान पानी जैसी बेसिक जरूरत की आपूर्ति नहीं है.
अब बात स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की करें तो सब शून्य है.
लहसुन का लोकतंत्र
देखिए कि सरकार कितनी नंगी और अराजकतावादियों की गोद में बैठने वाली हो गई है कि ये आज सुप्रीम कोर्ट में यह कहने गए कि तिलचट्टों के प्रदर्शन में जिन्होंने पत्थरबाजी की, पुलिस पर डंडों से प्रहार किया, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाई, उन पर हुए केस निरस्त किए जाएँ।
@BJP4India वालों, वह तुम्हारे बापों की संपत्ति थी? कितनी बार तुम अपनी घटिया राजनीति के लिए @DelhiPolice को पिटवाते रहोगे? पूरी पुलिसिंग को पंगु बना कर रख दिया है, जो भी आता है इनका सर फोड़ कर चला जाता है।
पर हाँ, पुलिस कुछ न करे क्योंकि माननीय @narendramodi जी को रात के एक बजे ‘जेन जी’ के लिए रील बना कर, उन्हें माफ करते हुए बड़ा हृदय वाला दिखना है। आज कल रील और उसके व्यू नहीं गिन रहा कोई!
सरकार चाहती है कि वो ये केस माफी की भी नौटंकी करे और वही सरकार फिर कोर्ट को यह भी कहती है कि तिलचट्टों का पाँच सितम्बर वाला मार्च रोक दिया जाए। माननीय सूर्यकांत जी ने कहा है कि अभी से वो यह नहीं मान सकते कि कुछ गलत ही हो जाएगा।
जबकि माननीय सूर्यकांत के समक्ष ऐसे उदाहरण हैं कि इन्हीं आयोजकों के कारण दिल्ली में तीन दिन क्या होता रहा। फट्टू सरकार की %# इतनी फटी हुई थी कि आयोजकों को नामित तक नहीं कर पाई कि इनका ही दायित्व बनता था।
ये चल रहा है इस देश में। दंगाइयों को सरकार बचा रही है ताकि उनके राम मंदिर लूट के पाप को डायवर्ट करने का रिवार्ड उन्हें दिया जा सके। जनता सब देख रही है।
नीले कबूतरों का साप्ताहिक कार्यक्रम 👇
सोमवार: हम भगवान नहीं मानते
मंगलवार: हमें मंदिर का पुजारी बनाओ
बुधवार: भगवान काल्पनिक है
गुरुवार: हमको मंदिर में रिजर्वेशन दो
शुक्रवार: हम चार घंटे भगवान के आगे घंटा नहीं बजाते
शनिवार: मनुवादी पाखंडी हैं
रविवार: मनुवादी हमको मंदिर में नहीं घुसने देते....
जय बीम जय सीमेंट जय सरिया जय रेता जय गिट्टी 😂
आज कोर्ट में मेरे केस पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश महोदय ने अगली सुनवाई तक केस पर पुलिस जाँच के लिए मुझे बुलाने से पूर्व जाँच अधिकारी को मुझे नोटिस देने कहा। यही नोटिस कोर्ट को भी दी जाएगी ताकि कोर्ट यह तय करेगा कि इसमें कोई तर्क है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हमारे अधिवक्ता @jai_a_dehadrai ने हमारा पक्ष रखा कि उक्त व्यक्ति पर न तो कोई जातिगत टिप्पणी हुई, न ही उसका इस विषय में जातिसूचक शब्दों से कोई अपमान हुआ। अतः, कोई केस ही नहीं बनता।
जय अनंत जी समेत श्री सिंह एवम् प्रत्युष भाई आदि अधिवक्ताओं को मेरा ससम्मान आभार जिन्होंने मेरा पूर्ण पक्ष रखा। अगली सुनाई सप्ताह भर बाद है।
Aura बनाना है? आरक्षण उस औरे का #% बना देगा।
टैलेंट खींचने की क्षमता? आपके माननीय का वश चले तो इस सेक्टर में भी -40 वाले को एडमिशन दिलवाने को जस्टिफाय करने लगेंगे।
SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर सवाल आज का नहीं, दैनिक जागरण की 2018 की इस रिपोर्ट में पाँच वर्षों में सामने आए 60 फर्जी मामलों का जिक्र है। कानून न्याय के लिए हो, किसी निर्दोष को फँसाने का हथियार नहीं।