@BJP4Rajasthan वाह राठौड़ साब वाह क्या आपको अभी राजस्थानी का पता नही कौनसी की बात हो रही
वही राजस्थानी जिसे विदेशी अतिथी के आने पर गाते हो स्वागत के लिए -केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश
मान गऐ बहाने बनाने की कला को अब तो जागो और भाषा को राजभाषा का सम्मान दो
यह पढ़ कर हंसी आती है
और गुस्सा भी आता है
राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ कह रहे हैं कि भाजपा राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता दिलवाने के लिए प्रयासरत है और कांग्रेस मान्यता के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। मैं कहता हूं ये दोनों ही पार्टियां राजनीति कर रही हैं। आठ करोड़ राजस्थानियों की भावना के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
दोनों ही पार्टियों ने राजस्थानी भाषा प्रेमियों को बारी-बारी से ठगा है। ऊपर से मूर्ख बनाने के प्रयास अलग से किए जा रहे हैं। यह बेहद शर्मनाक है। राजस्थानी भाषा की मान्यता का आंदोलन बरसों से चल रहा है। 1992 में दिल्ली में दिया गया धरना तो ऐतिहासिक था। पीढ़ियां खप गई मान्यता के इंतजार में कन्हैयालाल जी सेठिया जैसे कवि मान्यता की साध लिए दुनिया से ही चले गए। प्रेम भंडारी जी जैसे लोग बरसों से मान्यता मिलने पर ही अपना जन्मदिन मनाने की ठाने हुए हैं। जीवन तो एक बार ही मिलता है।
अब आपको भाजपा और कांग्रेस दोनों के दोगलेपन से रूबरू करवाना बेहद जरूरी है। 2003 में राजस्थान की विधानसभा ने राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया था। उस ऐतिहासिक घटना को आज 23 साल पूरे हो गए। इस दौरान पूरे 10 साल केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही। इस दौरान पूरे 13 साल केंद्र में भाजपा की सरकार रही। इस दौरान 2008 से 2013 तक राजस्थान और केंद्र दोनों में कांग्रेस की सरकार रही। इस दौरान 2014 से 2018 तक और 2023 के अंत से आज तक राजस्थान और केंद्र दोनों में भाजपा की सरकार है।
किसी भी पार्टी के पास कोई भी बहाना नहीं है और कोई भी सफाई नहीं है। इन्हें सिर्फ आरोप लगाने आते हैं। बचाव करना आता है। सफाई देना आता है और सबसे बढ़िया काम आता है गोली देने का। शर्म दोनों ही पार्टियों को नहीं आती। दोनों ही पार्टियों को आज फैक्ट्स के साथ शर्मिंदा करने की जरूरत है। राजस्थानी भाषा के साथ बहुत खिलवाड़ हो चुका है। अब आपको सबूत देना होगा कि आपने सच में किया क्या है?
अगर आप कह रहे हैं कि राजस्थानी को भाषा बनाने के लिए भाषाविदों को जुटाना होगा तो फिर बताइए राजस्थान के लोगों को कि सहमति बनाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए? नहीं है आपके पास कोई भी जवाब। नहीं ही होगा क्योंकि आपने अब तक इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं किया है।
संवैधानिक मान्यता देना राज्य के हाथ में नहीं है, समझ में आता है। लेकिन राजभाषा बनाने का अधिकार राज्य सरकार के हाथ में है। दोनों ही पार्टियां बताएं, पिछले 30 साल में दोनों पार्टियां तीन-तीन बार सत्ता में आ चुकी है। राजभाषा बनाने की दिशा में क्या कदम उठाए गए? नहीं होगा आपके पास कोई भी जवाब। क्योंकि आपने कुछ भी नहीं किया।
बयान जारी करने में और काम करने में बड़ा फर्क होता है। कुछ करके दिखाइए, वरना चुपचाप बैठे रहिए। होना-जाना कुछ है ही नहीं तो इन बयानों और आरोप-प्रत्यारोपों का अर्थ क्या है? जनता कुछ समझती नहीं है क्या?
#राजस्थानी
जद खुद ने ध्यान नि होवे तो नि बोलणो। Marathi एक कुणसी है। कांई आ marathi मुंबई में सब जिग्या एक जिसी बोलिजे।
Pune की बोली सब जीग्या कोनी बोलीजे
शर्म होवे अर पुरखो री इज्जत होवे तो नाजोगी बात मत करो
@madanrrathore
दूजा राज्य की भासा जरुरी कोनी राजस्थानी उ पेला अठे
@BJP4Rajasthan हम केवल उसी राजस्थानी की बात कर रहे हैं जिसमें UGC नेट पीएचडी और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा 11वीं 12वीं कक्षा में पढ़ाई जाती है और राजस्थान स्टेट ओपन बोर्ड द्वारा दसवीं कक्षा में परीक्षा करवाई जाती हैफिर कौन सी राजस्थानी का प्रश्न कहां रह गया घुमाइए मत राजभाषा का दर्जा दे
🚨 एक और तमाचा… राजस्थान की अस्मिता पर!
बधाई हो राजस्थान…!
आज फिर साबित हो गया कि अपनी मातृभाषा के सम्मान की लड़ाई हम खुद ही हार चुके हैं।
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा के केंद्र खुलेंगे, लेकिन करोड़ों राजस्थानियों की मातृभाषा राजस्थानी आज भी अपने ही प्रदेश में सम्मान और अधिकार के लिए भटक रही है।
हम वर्षों तक यही पूछते रहे—
"कौन-सी राजस्थानी?"
"मारवाड़ी अलग, मेवाड़ी अलग, शेखावटी अलग…!"
हम अपनी ही भाषा को बांटते रहे और दूसरे अपनी भाषा को सम्मान दिलाते रहे।
जिस प्रदेश की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है, उसी प्रदेश में राजस्थानी भाषा आज भी उपेक्षित है। यह केवल भाषा का सवाल नहीं, बल्कि राजस्थान के स्वाभिमान, संस्कृति और पहचान का प्रश्न है।
अगर आज भी राजस्थानी समाज नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी।
अब समय आ गया है—एकजुट होकर राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग स्थापित करने की मांग बुलंद करें।
राजस्थानी हमारी पहचान है, हमारी मातृभाषा है, हमारा स्वाभिमान है।
अब नहीं तो कभी नहीं!
#राजस्थानी_भाषा #राजस्थान #राजस्थानी_को_मान्यता_दो #मातृभाषा #राजस्थानी_अस्मिता #8वीं_अनुसूची
@BJP4Rajasthan डबल इंजन की सरकार सूं राजस्थान्यां नं घणी आस छै।। अब देखा दका, डबल इंजन मातृभाषा राजस्थानी नं मान दिलावैगो , कै फैर इंजन मं तेल ईं बीत जावैगो।। राजस्थानी बणै राजभासा 🔥🔥
राजस्थान में अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और उनका अध्ययन स्वागत योग्य है। यदि हमारे विश्वविद्यालयों में मराठी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ जैसी समृद्ध भाषाओं के केंद्र खुलेंगे तो इससे भाषाई विविधता मजबूत होगी और 'राष्ट्रीय एकता' (National Integration) की भावना को बल मिलेगा।
लेकिन यह चिंता का विषय है कि आज प्रदेश के मात्र 4 विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा का अलग विभाग है। मैं राज्य सरकार और राजभवन से आग्रह करता हूँ कि बाहरी भाषाओं से पहले प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 'राजस्थानी' भाषा के विभाग और अध्ययन केंद्र स्थापित कर इसे मजबूत किया जाए।
हमारी कांग्रेस सरकार ने 25 अगस्त 2003 को विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बृज, वागड़ी, मालवी और शेखावाटी जैसी समृद्ध बोलियों सहित 'राजस्थानी भाषा' को संवैधानिक दर्जा दिलाने की जो मुहिम शुरू की थी। केंद्र सरकार राजस्थानी भाषा को अविलंब 8वीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक मान्यता दे। मायड़ भाषा का सम्मान और इसका संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
राजस्थान में अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और उनका अध्ययन स्वागत योग्य है। यदि हमारे विश्वविद्यालयों में मराठी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ जैसी समृद्ध भाषाओं के केंद्र खुलेंगे तो इससे भाषाई विविधता मजबूत होगी और 'राष्ट्रीय एकता' (National Integration) की भावना को बल मिलेगा।
लेकिन यह चिंता का विषय है कि आज प्रदेश के मात्र 4 विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा का अलग विभाग है। मैं राज्य सरकार और राजभवन से आग्रह करता हूँ कि बाहरी भाषाओं से पहले प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 'राजस्थानी' भाषा के विभाग और अध्ययन केंद्र स्थापित कर इसे मजबूत किया जाए।
हमारी कांग्रेस सरकार ने 25 अगस्त 2003 को विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बृज, वागड़ी, मालवी और शेखावाटी जैसी समृद्ध बोलियों सहित 'राजस्थानी भाषा' को संवैधानिक दर्जा दिलाने की जो मुहिम शुरू की थी। केंद्र सरकार राजस्थानी भाषा को अविलंब 8वीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक मान्यता दे। मायड़ भाषा का सम्मान और इसका संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
माननीय न्यायालयों में किसी भी प्रकार का अभद्र व्यवहार संविधान की आत्मा और न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा आघात है।
जब लोकतंत्र के अन्य स्तंभ चरमरा चुके हों, तब "बार और बेंच" ही जनता की अंतिम आशा बनकर खड़े रहते हैं।
न्यायालयों की मर्यादा और जनता के विश्वास से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर एवं उदाहरणीय कार्रवाई होनी चाहिए।
#SupremeCourt #CJI #RuleOfLaw
योगी आदित्यनाथ नाथ की लोकप्रियता के सामने गुजराती गैंग फेल हुई तो कही षडयंत्र उनके खिलाफ करने लगी । शुरुवात दौर में जब यूपी में बीजेपी का पहली बार आगमन हुआ उसमें गुजराती गैंग शामिल नहीं थी । यूपी चुनाव जीतने के बाद गुजराती गैंग को लगा योगी मोदी से कही गुना भारी है । तो योगी को मुख्यमंत्री तक नहीं बनाना चाहते थे । पर सोसल मीडिया में हर ओर से योगी की मांग उठी । तो मजबूरन घुटनों के बल आ गए ओर मजबूरी में बनाना पड़ा । अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाना चाहता है तेली ओर खुद राष्ट्रपति बनना चाहता है। इस लिए उनके इस इस अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को क्षत्रिय योगी ने पकड़ लिया जो छुड़ा नहीं पा रहे । इन्होंने योगी के अलावा मात्र ऐसे मुख्यमंत्री बनाए है जो इनकी माला के जप करे ये कहे वहां साइन करे । पर यूपी की धरती पर बुरे फंस गए क्योंकि इस धरती पर राक्षस भी हुए ओर भगवान भी पर वीरों की भूमि है शक्तिशाली लोगों की भूमि रही है । UGC इस लिए ही नहीं लाए स्वर्णों पर ही लगाम लगानी थी । योगी को भी गिराना था । योगी का दूर दूर तक UGC में हाथ नहीं होने के बाद भी बीजेपी IT सेल से योगी को घसीटा ताकि स्वर्ण वोट नाराज होकर योगी से दुरिया बना ले इनको पता है इनको वोट की जरूरत नहीं EVM से जीत जायेंगे चुनाव तो पर इस योगी नाम की गले की हड्डी को कैसे निकाले जो फंस गई सारे डॉक्टर फेल हो चुके। ये राम मंदिर घोटाले में सीधा केन्द्र का काम है ताकि योगी को इसमें षडयंत्र में फंसा ले । पर योगी पर इनकी कोई क्रिया नहीं चल पा रही वो गुरु गोरख नाथ के गद्दी पर बैठे हैं ।महादेव की गद्दी पर बैठे हैं । इस लिए खुद गुजरातियों का हर ओर पतन होना शुरू हो गया ।योगी उगता हुआ सूरज है आसमान के काले बादलों में वो ताकत नहीं जो सूर्य की रोशनी को रोक सके
परंपरा का अर्थ अतीत की आत्मा को संजोना है, उसका प्रदर्शन करना नहीं।
यह एक बालसुलभ कृत्य है।
विरासत और इतिहास का निर्माण प्रतीकात्मक आयोजनों से नहीं, बल्कि पीढ़ियों के त्याग, शौर्य, मर्यादा और लोककल्याणकारी कर्मों से होता है।
जो आचरण आने वाली पीढ़ियों को विवेक, संस्कार और उत्तरदायित्व का बोध न करा सके, वह गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
जय राजपूताना। 🚩
जय क्षात्र धर्म। 🙏
बून्दी - हमारी प्राचीन और अनुपम नगरी की स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
बून्दी नगर और हाड़ौती राज्य के संस्थापक, राव श्री देवराज सिंह हाड़ा को सादर नमन व विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏
"नकली गढ़ दीधो नहीं, बिना घोर घमसाण;
सिर टूटयां बिन किम फिरै, असली गढ़ पर आण।"
यह वीरता, स्वाभिमान और अटल क्षात्र परम्परा का अमर संदेश है जिसने बून्दी को युगों-युगों तक गौरवान्वित रखा।
जै जै हाड़ौती। 🚩
जय माँ राजराजेश्वरी आशापुरा। 🙏
जय श्री रंगनाथ जी महाराज। 🙏
#Jodhpur: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूलों राजस्थानी भाषा के अध्ययन अध्यापन की खुली राह
राजस्थानी भाषा के विषय को पूर्व न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने बताया बेहद गंभीर, कहा-'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का...
#GKVyas#RajasthaniBhasha#RajasthanWithFirstIndia
जय श्री रंगनाथ जी। 🙏
हमारी गौरवशाली विरासत, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण किसी एक समाज का नहीं, बल्कि प्रत्येक जागरूक नागरिक का साझा दायित्व है।
दुर्भाग्यवश, राजस्थान में वर्तमान विरासत एवं पैनोरमा नीति के अंतर्गत अनेक स्थानों पर स्थानीय इतिहास, प्रामाणिक धरोहरों और क्षेत्रीय प्रेरणास्रोतों की उपेक्षा कर बाहरी अथवा विवादास्पद आख्यानों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह प्रवृत्ति हमारी सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक सत्य और स्थानीय गौरव के लिए चिंताजनक है।
इसी संदर्भ में आज 16 जून 2026 को आयोजित "सर्व समाज एकता रैली" में हम अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण हेतु लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे।
📍 स्थान:
रामसागर की पाल, हिण्डौली (बून्दी)
📍 मुद्दा:
हाड़ा-चौहान राजवंश से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर - भवन, बारहदरी एवं बगीची - के संरक्षण, संवर्धन तथा उनकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने की मांग।
आइए, हम सब मिलकर अपनी विरासत बचाएँ और आने वाली पीढ़ियों को उनकी सच्ची ऐतिहासिक पहचान सौंपें।
एकता • जागरूकता • संरक्षण
सादर। 🙏
@RajCMO@KumariDiya
#बून्दी #SaveHeritage