Give but don't let yourself be used. Love but don't allow your heart to be abused. Trust but don't be Naive. Listen to others but don't lose your own voice.
ये लड़कियां यूपी के CM हेल्पलाइन (1076) में काम करती हैं।
इन्हें सैलरी के तौर पर महीने के 7 हजार रुपए दिए जाते हैं। कोई छुट्टी नहीं, कोई ब्रेक नहीं।
ये है BJP सरकार का 'बंधुआ मजदूरी मॉडल'
नरेंद्र मोदी बातें तो महिला सम्मान की करते हैं, लेकिन असल में इनकी सरकारें महिलाओं का हर स्तर पर शोषण करती हैं।
सोचकर देखिए- 7 हजार रुपए में कोई कैसे नौकरी कर रहा होगा और उसके जीवन का स्तर क्या होगा?
PM CARES Fund में भी Electoral Bonds जैसी धांधली और भ्रष्टाचार चल रहा है. Quint की जाँच - आगे पढ़िए👇
▪️एक जापानी कंपनी को महाराष्ट्र में अपनी फैक्ट्री फिर से शुरू करने की परमिशन मिलती है
▪️कुछ ही दिनों बाद वही कंपनी PM CARES Fund में डोनेट करती है
▪️ठीक यही Electoral Bonds में हुआ था: चंदा दो, धंधा लो
▪️Electoral Bonds तो बैन हो गए लेकिन
👉PM CARES Fund का तो CAG ऑडिट
भी नहीं हो सकता
👉PM CARES Fund तो RTI से भी बाहर है
👉PM CARES Fund पर तो संसद में भी सवाल नहीं पूछ सकते
🔺यह पैसा कौन डोनेट कर रहा है, क्यों डोनेट हो रहा है, इसमें किन विदेशी कंपनियों ने डोनेट किया है?
🔺इसमें तो सरकारी कंपनियों ने भी पैसा डोनेट किया है - तो यह जांच और जवाबदेही से बाहर कैसे है?
कहॉं हैं ‘लाला’ रामदेव जो ‘मोदी-भक्ति’ की बीन बजाते हुए 2014 में कहते थे कि…
मोदी जी ‘काला धन’ वापस लाएँगे तो 50 साल कोई Tax नहीं देना पड़ेगा
पेट्रोल-डीज़ल 30-35 ₹ लीटर मिलेगा
और रसोई गैस का सिलेंडर 200 ₹ में
आज की टीवी डिबेट ने एक बार फिर उस कड़वे सच को उजागर कर दिया, जिसे हम लंबे समय से महसूस कर रहे हैं, “जनता की आवाज़” के नाम पर मंच सजाया जाता है, लेकिन असल में वह एक सुनियोजित, प्रायोजित और पक्षपातपूर्ण तमाशा बन चुका है।
जहाँ सत्ता पक्ष के समर्थकों को “आम जनता” बनाकर बैठाया जाता है, और विपक्ष को घेरने के लिए सवालों की एकतरफा बौछार की जाती है। एंकर, जिनका दायित्व निष्पक्षता और सत्य होता है, खुलेआम तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, और जब सच्चाई तस्वीरों में सामने आ जाती है, तब भी उसे नकारने का दुस्साहस किया जाता है।
यह सिर्फ एक डिबेट नहीं थी, यह लोकतंत्र के मूल्यों के साथ किया गया एक सुनियोजित खिलवाड़ था। जिस मीडिया को कभी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, आज वही स्तंभ सत्ता के संरक्षण में खड़ा होकर एक पार्टी विशेष का प्रचार-प्रसार करने का माध्यम बनता जा रहा है। सवाल सत्ता से होने चाहिए थे, लेकिन कटघरे में विपक्ष को खड़ा किया गया, यही आज के मीडिया का दुर्भाग्यपूर्ण सच है।
हमारे प्रवक्ताओं को बार-बार दबाने, रोकने और उनकी आवाज़ को कुचलने का प्रयास किया जाता है, लेकिन यह भूल जाते हैं कि सच को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता। आज अजय उपाध्याय जी ने जिस साहस और आत्मसम्मान के साथ इस प्रायोजित मंच का बहिष्कार किया, वह किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि उस हर आवाज़ का प्रतिनिधित्व है, जो झुकने से इनकार करती है।
यह समय कठिन है, लेकिन इतिहास गवाह है, जब-जब सच को दबाने की कोशिश हुई है, तब-तब वह और अधिक ताकत के साथ उभरा है। हमें कितना भी डराने, दबाने या बदनाम करने का प्रयास किया जाए, हम न डरेंगे, न झुकेंगे।
क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं है, यह लड़ाई सत्य और असत्य के बीच है, लोकतंत्र और प्रोपेगेंडा के बीच है, और हम उस पक्ष में खड़े हैं जहाँ सच अभी भी जिंदा है।
हम सब अजय उपाध्याय जी के साथ हैं, और हर उस आवाज़ के साथ हैं जो इस अंधेरे में भी सच की मशाल जलाए हुए है।