श्री सालासर बालाजी धाम के 272 वें स्थापना दिवस पर सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। इस पावन मौके पर कामना करता हूँ कि बालाजी महाराज की कृपा सभी भक्तों पर सदैव बनी रहे।
फिर एक बार श्री @RahulGandhi की अगुवाई में सत्य और न्याय की जीत हुई। 20 जुलाई को जंतर मंतर पर छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई, जिसमें श्री साहिल गंभीर रूप से घायल हुए, छर्रे आज भी उनके दिल के पास मौजूद हैं। एक महीने से ज्यादा समय तक दिल्ली पुलिस एफआईआर दर्ज करने से बचती रही, आखिरकार श्री राहुल गांधी के धरने के आगे झुकना पड़ा।
जिस सरकार को स्वयं इंसाफ देना चाहिए था, उसे सड़क पर धरना देकर मजबूर करना पड़ा, यह भाजपा शासन में कानून व्यवस्था की असलियत है। पूरे देश में जेन-जी और युवाओं में आक्रोश बना हुआ है पर ऐसा लगता है सरकार इससे अनभिज्ञ बनी हुई है।
अब दिल्ली पुलिस को दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। श्री साहिल के साथ न्याय तभी पूरा होगा जब असली गुनहगार सलाखों के पीछे होंगे।
Once again, under the leadership of Shri @RahulGandhi , truth and justice have prevailed.
On July 20, pellet guns were fired at students at Jantar Mantar, seriously injuring Shri Sahil. Pellets remain lodged near his heart to this day. For more than a month, the Delhi Police avoided registering an FIR, but eventually had to bow to the pressure of Shri Rahul Gandhi’s protest.
A government that should have ensured justice on its own had to be forced to act through street protests. This exposes the ground reality of law and order under the BJP government. Discontent continues to simmer among Gen Z and youth across the country, yet the government appears determined to remain oblivious to it.
The Delhi Police must now identify those responsible and take strict action against them. Justice for Shri Sahil will only be complete when the real perpetrators are behind bars.
मोदी सरकार की अदूरदर्शिता और गलत फैसलों का एक और उदाहरण बिना तैयारी के पेट्रोल में बड़ी मात्रा में एथेनॉल मिलाने का फैसला है जिसका नुकसान देश की जनता को कई मोर्चों पर झेलना पड़ रहा है। गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल बनाने में लगाया जा रहा है, जिससे बाजार में चीनी की उपलब्धता ही घट गई है।
महज 15 दिन में चीनी की कीमतों में 14 से 17 रुपए प्रति किलो का उछाल आ गया है। यह सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं, एथेनॉल ब्लेंडिंग से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचन रहा है, माइलेज कम हो रहा है जिसमें आमजन का पैसा लग रहा है।
यह सीधे-सीधे आम आदमी की मेहनत की कमाई की लूट है। इस पूरे खेल में मुनाफा चंद उद्योगपतियों और सरकार को हो रहा है, त्रस्त सिर्फ आम जनता हो रही है। एथेनॉल उत्पादन से हवा-पानी प्रदूषित होने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। केन्द्र सरकार ने बिना पूरी तैयारी किए ऐसा फैसला ले लिया है जिसको देश की जनता भुगत रही है। मोदी सरकार अब जनता का भरोसा खो चुकी है इसलिए जनता को भरोसा नहीं दिला पा रही।
Modi government’s short-sightedness and flawed decisions are once again evident in its decision to increase ethanol blending in petrol without adequate preparation. The people of the country are having to bear the consequences of this decision on multiple fronts.
A large share of sugarcane is being diverted from sugar production towards ethanol production, resulting in reduced availability of sugar in the market.
In just 15 days, sugar prices have surged by ₹14–17 per kg. This is not merely an issue of price rise, ethanol blending is also affecting vehicle engines and reducing mileage, putting an additional financial burden on ordinary citizens.
This amounts to nothing less than a direct assault on the hard-earned money of the common people. In this entire arrangement, a handful of industrialists and the government are benefiting, while it is the common people who are suffering.
There have also been growing concerns about air and water pollution linked to ethanol production. The union government took this decision without making adequate preparations, and it is now the people of the country who are paying the price.
The Modi government has now lost the trust of the people & as a result, is unable to convince them.
राजस्थान में भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार इतना बढ़ चुका है कि कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए निशुल्क दवा के रूप में दिया जाने वाला इंजेक्शन दिल्ली में ब्लैक मार्केट में बेचा जाता हुआ पकड़ा गया। इस एक इंजेक्शन की कीमत करीब 1 लाख रूपये है जिसे सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है। यह बेहद गंभीर मामला है जिसमें सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
इससे पहले उड़ान योजना के निशुल्क सैनिटरी नैपकिन, बाल गोपाल योजना के निशुल्क दूध पाउडर की भी कालाबाजारी पकड़ी गई परन्तु सरकार ने कोई सख्त कार्रवाई या उच्च स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जिससे भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है।
अब जनता भी महसूस कर रही है कि भाजपा सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और जनहित की योजनाओं को दीमक की तरह खाते जा रही है। इस भ्रष्ट सरकार को अब जवाब देने का समय आ गया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, कांग्रेस के निष्ठावान नेता एवं प्रख्यात शायर मरहूम मोहम्मद उस्मान आरिफ जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। कांग्रेस को मजबूत करने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।
जीवनपर्यन्त कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती देने वाले वरिष्ठ नेता स्व. श्री अहमद पटेल की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
लोकसभा में साथ में सांसद बनने से लेकर कांग्रेस संगठन तक, हमने कई पदों पर साथ-साथ काम किया। अहमद भाई की कमी हमेशा खलती रहेगी।
(File Pic)
आज नई दिल्ली स्थित जवाहर भवन में RGSC एवं RGF द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन "हरा भरा स्वराज: Rise & Act" में संबोधन:
मुझे खुशी है कि अधिकांश जो है पूरे देश भर से आप लोग आए हैं और यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है राजीव गांधी फाउंडेशन की भी और RGSC की भी कि करीब 524 रजिस्ट्रेशन हुए हैं , उसमें 107 बच्चों ने केस स्टडी की है और 76 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पार्टिसिपेट किया जो करीब 21 राज्यों से हैं। तो आप सबको बहुत-बहुत मुबारकबाद।
राजीव जी नौजवान थे, 40 साल की उम्र में प्राइम मिनिस्टर बन गए। मुझे सौभाग्य मिला उनके साथ में राज्य मंत्री रहने का, मेरे सीनियर मिनिस्टर प्राइम मिनिस्टर खुद थे। तो मैंने बहुत करीब से उनको देखा है, जो उनकी संवेदनशीलता थी, जो उनकी दूरदृष्टि थी, नौजवानों के प्रति जो प्रतिबद्धता थी उनकी, सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात थी, पर्यावरण को लेकर जो उनकी सोच थी, वो इतिहास बन चुका है। नौजवानों को जो आज Gen Z कहलाती है, 40 साल पहले वो सपना देख लिया राजीव जी ने।
40 साल पहले उन्होंने 18 साल के छात्र को, नौजवान को उन्होंने पहली बार वोट का अधिकार पहली बार दिया। मैं खुद उस वक्त वर्किंग कमेटी में था। कितने सारे लोगों ने विरोध किया। तब भी राजीव जी का कमिटमेंट था, सोच थी कि भागीदारी जो है नौजवानों की होनी चाहिए। फिर पंचायतों के अंदर, नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया। इस प्रकार से उनकी सोच उस वक्त से यह थी और मैं समझता हूं कि एक इतिहास बन गया देश के अंदर। उन्हीं की सोच के आधार पर 21st सेंचुरी की बात की थी, लोगों ने मजाक उड़ाया था।
वाजपेयी जी तो बैलगाड़ी लेकर आए थे पार्लियामेंट के अंदर कि सब लोग बेरोज़गार हो जाएंगे अगर कंप्यूटर आ जाएगा । अब देखिए किसी का काम चलता है बगैर कंप्यूटर बगैर इंटरनेट? अब तो AI आ गया है। मैं खुद बहुत उपयोग करता हूं AI का। आप सोच सकते हो कि यह राजीव गांधी जी की सोच थी जो आज 21st सेंचुरी हम देख रहे हैं, उनकी सोच का परिणाम था और मुझे कहते हुए गर्व है कि जो सब्जेक्ट रखा गया हरा भरा स्वराज, राइज एंड एक्ट।
मुझे याद आता है इंदिरा जी का, वो दुनिया के अंदर पहली राष्ट्र अध्यक्ष थी जिन्होंने 1972 में पहली बार दुनिया के मुल्कों का ध्यान आकर्षित किया स्टॉकहोम जाकर के और दुनिया के मुल्क के राष्ट्रपति आए ही नहीं थे कि वहां पर्यावरण की स्थिति की क्या बात करेंगे हम लोग वहां, विषय वो रखा हुआ था। पहली बार दुनिया का ध्यान आकर्षित किया इंदिरा जी ने कि आने वाले वक्त के अंदर यह क्लाइमेट चेंज , ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण की जो स्थिति बनेगी, वो दुनिया के लिए चुनौती बनेगी। आज देख लीजिए आप।
इस बार मानसून ऐसा आया है कि अधिकांश जगहों पर सूखा पड़ रहा है। लन्दन में पंखे और एसी होते ही नहीं थे। इस बार लाइन लग रही है एसी, पंखे खरीदने के लिए। यूरोप में नदियां सूख रही हैं तो दुनिया भर के अंदर चैलेंज हो गया है। यह चुनौती इंदिरा जी ने उस वक्त में विश्व के सामने रखी था। लंबा इतिहास है। अगर जाएंगे तो बहुत वक्त लग जाएगा। हम राहुल जी को सुनना चाहेंगे।
1992 में रियो में अर्थ समिट हुआ, उससे पहले 89 में राजीव जी खुद गए थे यूगोस्लाविया के अंदर और वहां किस प्रकार से उन्होंने प्लेनेट प्रोटेक्शन फंड का सपना देख लिया 40 साल पहले। ऐसा फंड बने यूएन के अंदर। 0.1% जीडीपी का अगर रखेंगे तब भी 18 मिलियन अमेरिकन डॉलर इकट्ठा होगा, जो टेक्नोलॉजी है एन्वॉयरन्मेंट की उसके ऊपर खर्च होगा।
तो कहने का मतलब यह है लंबा इतिहास बनाया है तो कांग्रेस सरकारों ने बनाया है। एक के बाद एक कई एक्ट बनाए, पास किए। चाहे वो गंगा की सफाई का हो, यह भी राजीव जी के वक्त की बात है। एन्वॉयरन्मेंट प्रोटेक्शन एक्ट बना दिया। बिना प्रायर अप्रूवल के कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आ पाएगा, पहले असेसमेंट होगा, एन्वॉयरन्मेंट इम्पैक्ट कितना पड़ेगा उसका अससेमेंट होगा, उसके बाद में परमिशन देंगे। इतना बड़ा शानदार वो कानून है कि आज भी सुप्रीम कोर्ट उसको आधार बना के फैसला करता है । तो कहने का मतलब यह है कि अनेकों काम किए। वॉटर पालिसी बना दिया उन्होंने। कोई कमी रखी नहीं देश के अंदर और उसी से हम आगे बढ़ रहे हैं।
इसलिए इस मौके पर कहना चाहूंगा राहुल जी को कि राजीव गांधी स्टडी सर्किल सोनिया जी की प्रेरणा से बनाया था। करीब करीब सभी राज्यों में इसकी इकाईयां बन गई गोवा को छोड़ कर के और राजीव गांधी फाउंडेशन, दोनों मिलकर के लगातार कोई न कोई प्रोग्राम करते रहते हैं यहां पर। और मुझे खुशी है कि दिल्ली के अंदर या देश के अंदर भी एक मैसेज गया है कि कंस्ट्रक्टिव काम करने में एक नया प्लेटफार्म उपलब्ध हुआ है।
जल जंगल जमीन की बात करें तो सोनिया जी और डॉ मनमोहन सिंह जी के वक्त में पहली बार फॉरेस्ट प्रोटेक्शन एक्ट बन गया जो कि क्रांतिकारी काम है। ये सब बातें आपको मालूम है। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि जो गारंटी मिली है वन अधिकार की आदिवासियों को, वह भी अपने आप एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानता हूं मैं।
इसलिए लंबी बात नहीं कहता हुआ, राहुल गांधी जी अभी ग्रेट निकोबार गए थे, अंडमान निकोबार, वहां पर जो धज्जियां उड़ाई सरकार की, किस प्रकार बर्बाद कर रहे हो आइलैंड को, और यह जो 86 में राजीव जी ने आईलेंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी बनाई थी , उस जमाने के अंदर आईलेंड अथॉरिटी बनाना, इतना दूरदृष्टि का सपना देखना, यह अपने आप में मैं समझता हूं, आप सोच सकते हो किस प्रकार के व्यक्तित्व वो थे जो दुर्भाग्य से हमारे बीच नहीं रहे। इंदिरा जी की तरह वह भी शहीद हो गए देश के लिए और देश को दिशा दे दी है इस बात का हमें गर्व होना चाहिए आज उनके जन्म दिवस के अवसर पर।
अरावली का मामला याद है, जैसे ही हमने डीपी चेंज की, लोगों ने जन आंदोलन शुरू कर दिया पूरे देशभर के अंदर और आखिर में सरकार को मैनेज करना पड़ा सुप्रीम कोर्ट को, कहना पड़ा, रेस्क्यू में आई सुप्रीम कोर्ट और स्टे कर दिया गया और शांति हो गई अरावली को लेकर सौ मीटर की जो बात थी उसमें। ये तमाम बातें आपको मालूम हैं। इसलिए मैं यही बात कहता हुआ अपनी बात समाप्त करता हूं और पहले महाजन साहब अपनी बात कहेंगे, उसके बाद राहुल जी बोलेंगे।
हिंडोली विधानसभा क्षेत्र के 285 गांवों और 286 मजरों के करीब 85 हजार लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए कांग्रेस सरकार के दौरान स्वीकृत 900 करोड़ रुपए की चंबल पेयजल योजना पिछले छह महीने से पूरी तरह ठप पड़ी है। काम बंद होने से लगी मशीनें और उपकरण तक जंग खाने लगे हैं।
यह योजना नवंबर 2024 में पूरी होनी थी, पहले वन विभाग की आपत्तियों से पहले ही देरी हुई, फिर भाजपा सरकार में भुगतान न मिलने से ठेकेदार ने काम की रफ्तार धीमी कर दी और अब पूरी तरह रोक दिया। भाजपा सरकार द्वारा बजट की कमी और सरकार की लापरवाही से परियोजना लगातार लटकी हुई है।
भाजपा यह कब समझेगी कि योजनाएं पार्टी की नहीं, सरकार की होती हैं, जो आमजन के हित के लिए बनती हैं। हिंडोली तो सिर्फ एक उदाहरण है, भाजपा सरकार का यह "इंतजारशास्त्र" लगभग हर क्षेत्र में फैला है, हर जिले में ऐसी अटकी परियोजनाओं की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। सरकार तुरंत बजट जारी कर काम शुरू कराए, 85 हजार लोगों को और इंतजार न कराया जाए।
जोधपुर के मंडोर जिला अस्पताल के 200 बेड वाले नए भवन का केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने वर्चुअल लोकार्पण किया, फूल-मालाओं से सजाकर औपचारिकता पूरी की गई, और उद्घाटन के तुरंत बाद भवन पर ताला जड़ दिया गया। जिस अस्पताल में रोजाना औसतन 800 मरीज ओपीडी में आते हैं, वहां जरूरी स्टाफ और संसाधनों के अभाव में मरीजों को नए भवन का लाभ ही नहीं मिल पा रहा।
करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से बना यह भवन सिर्फ दिल्ली के नेताओं को खुश करने के लिए उद्घाटित कर दिया गया, जनता को कोई राहत नहीं मिली। इसी प्रकार डिगाड़ी, प्रताप नगर और चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के अस्पतालों की स्थिति है। मैंने खुद कई बार पिछले दो साल में बिगड़ी जोधपुर के सरकारी अस्पतालों की स्थिति से मुख्यमंत्री जी अवगत कराया, लेकिन न पर्याप्त मेडिकल स्टाफ लगाया गया, न जरूरी चिकित्सा सुविधाएं दी गईं। अस्पताल आज भी पुराने भवन से ही संचालित हो रहे हैं।
भाजपा सरकार के लिए उद्घाटन एक इवेंट है, जनता की सेहत प्राथमिकता नहीं। यह जोधपुर की जनता के साथ सरासर धोखा है। सरकार तुरंत स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराए, ताला खोले, और जनता को इस भवन का वास्तविक लाभ दे।
RGHS से भाजपा सरकार को आखिर क्या दुश्मनी हो गई है? इलाज के बाद पुनर्भरण के लिए बुजुर्ग पेंशनर्स आज अपने ही पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। 13.65 लाख परिवार इस योजना से जुड़े हैं, अकेले 2025-26 में ही 92.76 लाख दावों पर 2,440.69 करोड़ रुपए का खर्च दर्ज हुआ, लेकिन कुल बकाया भुगतान का आंकड़ा 1,000 करोड़ रुपए के भी ऊपर पहुंच चुका है।
सबसे ज्यादा तकलीफ पेंशनर्स को हो रही है। गंभीर बीमारियों का इलाज कराने वाले बुजुर्गों की जमा-पूंजी खर्च हो चुकी है, वे 8-8 महीने से अपने ही पैसों के पुनर्भरण का इंतजार कर रहे हैं। किसी की फाइल आपत्ति में अटकी है तो किसी का दावा मंजूर होने के बाद भी भुगतान का इंतजार खत्म नहीं हो रहा।
ऐसी हरकतों से जनता का सरकार पर भरोसा टूटता है। जो जनता पहले 25 लाख रुपए तक का इलाज भी सरकार पर पूरा भरोसा करके निसंकोच करवाती थी, आज वही जनता अस्पताल जाने से पहले सोचने पर मजबूर हो रही है। भाजपा सरकार तुरंत बकाया पुनर्भरण जारी करे और RGHS की व्यवस्था को दुरुस्त करे।
आज नई दिल्ली स्थित राजस्थान स्टेट गेस्ट हाउस में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. श्री राजीव गांधी जी की जयंती की पूर्व संध्या पर देश-भर से पधारे राजीव गांधी स्टडी सर्किल के स्टेट कोऑर्डिनेटर्स एवं सक्रिय सदस्यों से संवाद किया।
इस अवसर पर RGSC, आंध्र प्रदेश द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर राजीव जी के ऐतिहासिक UN संबोधन पर आधारित 'ग्राफिक नैरेटिव' का विमोचन भी किया।
भारत में सूचना क्रांति के जनक, आधुनिक एवं प्रगतिशील भारत के शिल्पकार, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी की जयंती पर आज 'वीर भूमि' पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
21वीं सदी के आत्मनिर्भर भारत की नींव रखने, युवाओं के सशक्तिकरण और पंचायती राज को मजबूत करने में उनका दूरदर्शी योगदान हम सभी को सदैव देश सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
आज दिल्ली में वीर भूमि पर श्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री राजीव गांधी ने युवा पीढ़ी यानी जेन जी को दो सबसे बड़ी ताकतें दीं, टेक्नोलॉजी और 21 साल की बजाय 18 साल की आयु पर वोट का अधिकार।
उन्होंने भारत में कंप्यूटर, टेलिकॉम और आधुनिक तकनीक की नींव रखी, जिसने आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के रूप में जेन जी के हाथों में सबसे बड़ा हथियार बन दिया।
साथ ही उन्होंने मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की, जिससे करोड़ों युवाओं की आवाज लोकतंत्र में सीधे दर्ज होने लगी। यही वह ताकत है जिससे बड़ी से बड़ी और ताकतवर से ताकतवर सरकारें भी डरती हैं, क्योंकि आज की जेन जी तकनीक के जरिए जागरूक है और वोट के जरिए जवाबदेह बनाना जानती है।
श्री राजीव गांधी 40 साल की आयु में देश के प्रधानमंत्री बन गए 47 साल की आयु में देश के लिए शहीद हो गए। उन्हें काम करने का बहुत कम वक्त मिला। इतने अल्प समय में भी उन्होंने शिक्षा, तकनीक, पर्यावरण, पंचायतीराज सहित हर क्षेत्र में सुशासन के लिए उल्लेखनीय कार्य किया।
जेन जी अपनी ताकत पहचानती है और यही श्री राजीव गांधी की सबसे बड़ी दूरदर्शी विरासत है।