भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री , पूर्व गृहमंत्री भारत सरकार एवं वर्तमान में देश के यशस्वी रक्षामंत्री मा. राजनाथ सिंह जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !
ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु होने की कामना करता हूं !! #RajnathSingh
समाजवादी पार्टी के समय में हॉकी के महान खिलाड़ी के. डी. सिंह बाबू की हवेली तक बिकने की नौबत आ गई थी।
हमने कहा कि उनकी हवेली नहीं बिकेगी, सरकार पैसा चुकाकर उनकी स्मृति को पुनर्जीवित करेगी...
जी कृष्णैया हत्याकांड में एक साजिश के तहत आनंद मोहन को फंसाया था।
दीगर बात ये है कि आनंद मोहन ने हत्या नहीं की थी, हत्या भुटकुन शुक्ला और आजकल बेउर जेल में बार बाला नचाने वाले मुन्ना शुक्ला ने की थी।
कोर्ट ने सबको छोड़ दिया और आनंद मोहन को पकड़ लिया। जबकि आनंद मोहन घटना के समय हाजीपुर में थे। लेकिन, उन पर जनता को भड़काकर DM की हत्या कराने का आरोप लगाया गया।
याद रहे, बाबरी ध्वंस में अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी ने भी लोगों को उकसाया था और मस्जिद गिराई थी। बाद में अटल मुकरे और कोर्ट ने इसे सही मानकर उन्हें छोड़ भी दिया, जबकि उनके भाषण के वीडियो आज भी हैं।
ये दोनों मामले न्यायपालिका के ब्राह्मणवादी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है।
अब आगे देखिए। साल 2002 में आनंद मोहन से परेशान राबड़ी देवी की सरकार ने बिहार जेल मैनुअल में बदलाव किया, ताकि आनंद मोहन नाम के काँटे को हमेशा के लिए निकाला जा सके।
राबड़ी देवी की सरकार ने 10 दिसंबर 2002 को अधिसूचना जारी करके बिहार मैनुअल नीति में संशोधन कर लोक सेवक की हत्या सहित कुछ श्रेणियों के दोषियों को समय से पहले रिहाई का लाभ देने पर रोक लगा दी।
यह पूरा मसला ही राजनीतिक था। आनंद मोहन का जेल में रहना नीतीश कुमार और भाजपा के लिए भी लाभदायक था, क्योंकि क्षत्रिय एवं भूमिहार सहित अन्य सवर्ण वोट भाजपा यानी NDA की झोली में गिरने थे। इसलिए विपक्ष में रहते हुए भी इन्होंने इसका विरोध नहीं किया।
जी कृष्णैया की हत्या के फर्जी केस में आनंद मोहन 1994 के अंत यानि घटना के दौरान से ही जेल में थे। जेल में किसी के रहते हुए कानून में बदलाव करने का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
अब यहां सवाल है कि DM की हत्या 1994 में हुई थी। जेल मैनुअल में बदलाव 2002 में हुआ। तो क्या आनंद मोहन पर यह नया कानून लागू होगा? कायदे से नहीं।
जब सुप्रीम कोर्ट आनंद मोहन को निकालने के लिए कानून में बदलाव पर सवाल उठाकर रिपोर्ट मांग सकता है तो आनंद मोहन को जेल में हमेशा रखने के लिए 2002 में हुए कानूनी बदलाव पर भी बिहार सरकार से उसे जवाब मांगना चाहिए था।
उम्मीद है कि आनंद मोहन पर कठोर टिप्पणी करने के अलावा सुप्रीम कोर्ट कुछ और नहीं कर सकता। इसकी दो वजह है। पहला, जो हुआ है कानूनन हुआ है। अगर ये कानून गलत है तो 2002 में बदलाव भी गलत था।
दूसरा, एक ही आदमी को एक ही अपराध के लिए दो बार सजा नहीं दी जा सकती भारतीय कानून में। तीसरा, अपराध 1994 में हुआ तो कानून का प्रावधान 1994 वाला ही लागू होना चाहिए।
लेकिन, अगर राजनीतिक साजिश रचनी ही है तो भूतकुन और मुन्ना शुक्ला को बचाने की तरह न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांत का गला यहां भी घोंटा जा सकता है।
आज राजस्थान के प्रथम परमवीर चक्र विजेता हवलदार मेज़र पीरू सिंह शेखावत के बलिदान दिवस पर सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट यशवर्धन सिंह जी झेरली का संबोधन!!!
@yashvardhansngh
वर्ण व्यवस्था केवल क्षत्रियो को शासन का अधिकार देती थी। गैर क्षत्रिय शासन तभी कर सकते थे जब वो स्वयं को किसी तरह क्षत्रिय सिद्ध करें या क्षत्रियो के संरक्षण में उनकी स्वीकृति से शासन करें। इस बात को आप किताब से समझ सकते हैं।
150 वर्ष पहले तक बिहार का दरभंगा राजपरिवार अपने को राजपूत कहता था। बिहार के राजपूतो ने कभी इस बात को स्वीकृति तो नहीं दी कि दरभंगा राजपरिवार राजपूत है लेकिन लेकिन मौन साध कर शासन की स्वीकृति दी इसीलिए दरभंगा राज परिवार शासन कर सका।
यही स्थिति अन्य गैर क्षत्रिय जातियों के राजाओं की थी सब अपना निकास राजपूतो से बताते थे। यहाँ तक की शिवाजी को भी अपने को मेवाड़ के सिसोदिया वंश से जोड़ना पड़ा था। लोकतंत्र में डींगे हांकने से या सोशल मीडिया पर लिखने से इतिहास नहीं बनते।
सत्ता का एक नैसर्गिक दोष होता है इस दोष से कोई अछूता नहीं होता चाहे वह आपकी वोटों से बनी सरकार हो या आप स्वयं सत्ता में हों।
इसीलिए लोकतंत्र में विपक्ष केवल एक दल नहीं, बल्कि व्यवस्था का संतुलन होता है। उसका दायित्व सत्ता को मर्यादित रखना, जनता की आवाज़ बनना और सरकार से जवाब मांगना है।
बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव यह जानते हैं कि लालू प्रसाद यादव द्वारा वर्षों में अर्जित सामाजिक और राजनीतिक पूंजी के कारण विपक्ष की कुर्सी उनसे कोई आसानी से नहीं छिनेगी कम से कम पंद्रह वर्षों तक शायद यही कारण है कि जनता के बीच संघर्ष की अपेक्षा उनकी उपस्थिति सड़कों से अधिक देश-विदेश में दिखाई देती है।
लेकिन इसी दौर में एक ऐसा व्यक्ति भी है, जो बिना किसी बड़े पद बिहार में कुल 40 सांसदों की तरह वह भी एक सांसद मात्र है लेकिन विपक्ष की वास्तविक भूमिका निभा रहा है। वह गाँव, जड़, जमीन, किसान, बेरोजगार और आम जनता के मुद्दों को लगातार उठा रहा है। लोकतंत्र में पद से बड़ा दायित्व होता है, और जनता के प्रश्नों के साथ खड़ा होना ही सच्चे जननेता की पहचान है और यह भूमिका Sudhakar Singh बखूबी निभा रहे है किसान के मुद्दे पर जिस कुर्सी के लिए लोग बागी बाहुबली बलशाली बन जाते है उस मंत्री की कुर्सी को बिना एक पल गवाए लात मारने वाले शख्सियत का नाम सुधाकर सिंह है।
✍️ अभिषेक कुमार सिंह
भूदान आंदोलन में बिहार–झारखंड से कुल 22 लाख एकड़ भूमि दान दी गई थी, जिसमें से 15 लाख एकड़ से अधिक भूमि क्षत्रिय (राजपूत) समाज द्वारा दान की गई थी |
तुलनात्मक रूप से यह दिल्ली के क्षेत्रफल का लगभग चार गुना है। और यह दान मात्र 02 प्रदेश के क्षत्रियों से प्राप्त है,
विचार करिए, पुरे भारतवर्ष के क्षत्रियों ने भूमिहीनों, वंचितों, पिछड़ों, गरीबों के लिए कितना जमीन दान किया...
आज उन्हीं दानकर्ताओं को शोषणकर्ता बताया जा रहा...
उन्हीं क्षत्रियों के बेटो व पोतों को गा’ली दिया जा रहा, फर्जी नैरेटिव गढ़कर उन्हें शोषणकर्ता बताकर उनका छवि धूमिल किया जा रहा है...
क्या उन क्षत्रियों के संघर्ष, बलिदान, त्याग व दान का यही ईनाम देने के लायक है आप ....?
खैर, प्रमुख 𝗥𝗔𝗝𝗣𝗨𝗧 दानकर्ता 👇
@thethakurforce काश ये इसी तरह EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश में करने के लिए करते तो जो हाल UPSI के रिजल्ट में पश्चिमी यूपी का है वो सुधार सकता है और समाज की प्रतिनिधि भविष्य में और बढ़िया होगी। लेकिन ऐसा ये करेंगे नहीं। जब तक जमीन व मकान की शर्तें नहीं हटेगी तब तक भला नहीं होगा।
@b_bhushansharan मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
@sachinsgaur मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
@b_bhushansharan मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
रूटलेस नहीं हूं, लोहिया का शिष्य हूं, आरजेडी में सिर्फ लालू है मेरे ऊपर:- जगदानंद सिंह जी!
बिहार की समाजवादी राजनीति के वरिष्ठ नेता व राजद के माननीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जगदानंद सिंह जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर आपको स्वास्थ्य एवं दीर्घायु रखें।
जल संसाधन विभाग (पूर्व में सिंचाई विभाग) के पूर्व आयुक्त (कमिश्नर) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पूर्व अध्यक्ष IAS दीपक गुप्ता ने एक साक्षात्कार में लालू प्रसाद यादव जी के कार्यकाल की सच्चाई उजागर की, जब श्री जगदानंद सिंह राज्य के सिंचाई मंत्री सहित अन्य विभागों के मंत्री थे।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन सिंचाई मंत्री श्री जगदानंद सिंह जी थे उस समय मैं सिंचाई आयुक्त(Commissioner) था। मेरे कार्यकाल के दौरान द्वारा कभी कोई गलत कार्य नहीं कराया गया। उस समय में कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत दबाव नहीं था। सभी फैसले प्रशासनिक प्राथमिकताओं और जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाते थे।
उस समय न तो ट्रांसफर में हस्तक्षेप होता था, न ही किसी अफसर पर निजी दबाव डाला जाता था। अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर मिला और हमने पूरी निष्ठा से बिहार के किसानों और जल संसाधन प्रणाली को बेहतर बनाने का काम किया। कई बांध बनाये गए, सिंचाई का व्यवस्था सुचारू रूप से किया गया, सिंचाई के क्षेत्र में वृद्धि हुई एवं राज्य का राजस्व भी बढ़ा। आज भी उस समय किए गए कार्यों का लाभ राज्य के किसान उठा रहे हैं।
यह बयान विरोधी दलों को करारा जवाब मिला है, जो पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली सरकार को “भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति” से जोड़कर लगातार बदनाम करने की कोशिश करते रहे हैं।
दीपक गुप्ता जैसे वरिष्ठ IAS की यह सार्वजनिक टिप्पणी भाजपा और NDA के नेताओं का मुंह बंद कर देगा।
यह बयान किसी साधारण व्यक्ति का नहीं नहीं हैं बल्कि UPSC के पूर्व अध्यक्ष का हैं। जिसके द्वारा ही परीक्षा लेकर आज लोग IAS, IPS एवं अन्य अधिकारी बनते हैं ऐसे में राष्ट्रीय जनता दल के बारे में उनका ये बयान विरोधियों के जुबान पर ताला जड़ेगा।
@thethakurforce जब तक राजस्थान की तर्ज पर EWS सरलीकरण नहीं होगा तब तक ऐसा ही रिजल्ट आएगा। जमीन व मकान की शर्तें क्षत्रिय समाज को नौकरी से बाहर करने के लिए ही लगाया गया है।
@thakur__0 जब तक राजस्थान की तर्ज पर EWS सरलीकरण नहीं होगा तब तक ऐसा ही रिजल्ट आएगा। जमीन व मकान की शर्तें क्षत्रिय समाज को नौकरी से बाहर करने के लिए ही लगाया गया है।
@thethakurforce मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
@thakur__0 मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
@LSinghShekhawat मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
@SureshRanaBJP@Bhupendrapbjp मांग कीजिए EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #JusticeForEWS#EWS_सरलीकरण
@_Sudhaker_singh सांसद जी इस पर भी ध्यान दें EWS सरलीकरण राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश व प्रदेश में हो। जैसे वहां जमीन व मकान की शर्तें हटा कर सिर्फ 8 लाख रुपए सलाना इनकम ही मान्य है और आयु में OBC के समान छूट है व EWS सर्टिफिकेट की मान्यता भी 1 साल से बढ़ा कर 3 साल OBC के समान है। #EWS_सरलीकरण