आरक्षण की समीक्षा और उसकी माँगों पर बात करने के लिए, दिखावे के लिए ही सही, इस सरकार के सलाहकारों की मूर्खता देखिए कि उन्होंने एक ब्राह्मण मंत्री @JPNadda को आगे किया है।
जहाँ माँगों में 'उपवर्गीकरण' एक प्रमुख माँग है, वहाँ भील, मुसहर, बाल्मीकि, लोहार, घुमंतू आदि जातियों के नेताओं के दल को आगे करना क्या उचित नहीं रहता?
ये लोग एकदम ही नहीं सोचते कि ऑप्टिक्स कैसा रहेगा? मुझे क्या, मैंने तो माँग पत्र दे ही दिया है, अब इन्हें जो करना है करें!
RHA की अब तक की सबसे बड़ी जीत:
१. आरक्षण पर सोशल मीडिया और मीडिया में लगातार चर्चा
२. आरक्षण पर ‘दलित नेता’ की जगह अमुक जाति बनाम अमुक जाति का वाक्युद्ध
३. आरक्षण पर लोगों के पास आँकड़े, तथ्य और तर्क
४. सरकार द्वारा एकता तोड़ने के प्रयास, जो लोगों को दिख रही है
५. आरक्षण पर उपेक्षित जातियों के कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा खुल कर अपनी बात रखने का आरंभ
आने वाले दिनों में यह और वृहद् और व्यापक होने वाला है। नवंबर की प्रतीक्षा कीजिए।
जैसा कि मैंने कहा है, हर आंदोलन के लिए जंतर मंतर नहीं चाहिए। वो भी जा कर हमने दिखा दिया, पर कई आंदोलन घर बैठे, केवल सूचित करने से भी होते हैं। आंदोलनों में गर्मी केवल जलती बस की आग से नहीं आती, गर्मी हम दूसरे तरह से भी उत्पन्न कर सकते हैं।
यह आंदोलन हमारा है ही नहीं, या आंदोलन हर उस प्रताड़ित व्यक्ति का है जो कभी SC/ST एक्ट, तो कभी UGC तो कभी आरक्षण के कारण घुटता रहता है। कानपुर, आगरा, प्रयागराज, नागपुर, दिल्ली आदि में जो भी सड़क पर हैं, मेरा पूर्ण समर्थन है आपको। जब तक जागरूकता नहीं आएगी, सरकार आपका चूतिया बनाती रहेगी।
Please note:
We don't want just National Commission for General Category.
We want National Commission for General Category with SAME CONSTITUTIONAL STATUS & POWER as NCSC, NCST and NCBC.
A toothless NCGC is useless.
UP में आज की तारीख में एक भी सवर्ण नेता नहीं है। अगर होता, तो पिछले कई महीनों से मैं भागीदारी भवन का मुद्दा उठा रही हूँ, जहाँ निःशुल्क आवासीय कोचिंग सिर्फ SC/ST/OBC छात्रों को दी जाती है। लेकिन सबके सब मुँह छुपाए बैठे हैं।
@JPNadda अगर आपको लगता है कि एक बच्चे को पकड़कर, उससे अपनी बात कहलवाकर इस आंदोलन को रोक देंगे, तो ऐसा नहीं होने वाला। इसमें कोई एक चेहरा हर्ष दुबे नहीं था, बल्कि लाखों लोग शामिल थे और यह उनकी लड़ाई है।
इसीलिए RHA Reforms की माँगें जब तक पूरी नहीं होंगी, यह आंदोलन चलता रहेगा।
आधा अधूरा डेटा दिखाकर लोगों को कैसे मूर्ख बनाया जाता है, देखिये:
सरकार के ही डेटा अनुसार SC का central govt jobs में प्रतिनिधित्व है 17.14% (आबादी 16.6%)
ST का प्रतिनिधित्व है 8.7% (आबादी 8.6%)
मतलब SC/ST का प्रतिनिधित्व उनकी आबादी से ज़्यादा है!
सुनिए आरक्षण पर चर्चा @roypranesh के साथ!
Govt needs to stop hiding behind Harsh Dubey.
If you are copying our demands, come & talk to us directly. Fulfil all the demands.
Otherwise, the movement won’t STOP !!
गढ़मुक्तेश्वर में आरक्षण सुधार को लेकर आवाज बुलंद, प्रदर्शनकारियों ने कहा: ‘न डरेंगे, न दबेंगे’
गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़: उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर में आरक्षण सुधार और UGC से जुड़े प्रावधानों के विरोध में लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “हम न डरेंगे, न दबेंगे और न अपनी बात से पीछे हटेंगे।”
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के तहत आंदोलन जारी रखने की बात कही।
जो आइटी सेल या नस फाड़ कर चिल्लाने वाले यूट्यूबर यह कह रहे हैं कि ‘आरक्षण की बात योगी को हराने के लिए की जा रही है’, वो निर्लज्ज कल को नाचेंगे और हम सबका मजाक उड़ाएँगे यदि हमने इस आंदोलन को धीमा किया या रोका, और उसका लाभ भाजपा को मिला।
इन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी को हराना नहीं है। हम भी चाहते हैं कि योगी जीतें। आरक्षण या यूजीसी का योगी जी से कोई लेना-देना नहीं है। और भाजपा ही सत्ता में है, तो नीतियाँ वही बदलेगी।
पर हाँ, भाजपा और मोदी जी ने आरक्षण में जो-जो प्रावधान किए हैं, वह देशी की बर्बादी की पटकथा है। हम बस पक चुके हैं और हम अपनी बात कहना चाहते हैं। इसका विरोध हम करेंगे और पूरे बल से करेंगे।
मैंने तो फरवरी से सुधारों की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से रखी है। केन्द्र द्वारा अनौपचारिक रूप से भेजे गए प्रतिनिधि से भी मैंने बात कर अपनी माँगें रखी। पाँच दिन बीत चुके हैं। हमारी कोई भी माँग ऐसी नहीं है कि किसी भी को समस्या हो सके।
व्हाइट पेपर हो, EWS की बात हो, रैशनलाइजेशन हेतु महादलित जातियों के आरक्षण की बात हो… ऐसा क्या है जो मानने योग्य नहीं है? आप यह कहिए कि आपको चार जातिवादी नेताओं से भय है, जबकि अंबेडकर का नाम ले कर दंगे की धमकी देने वालों के अनुयायी भी आपको वोट नहीं देते।
"अब तुम्हारे भाई, बाप दादा हमारे खेत में ट्रैक्टर चला रहे हैं, 100-50 के लिए! अपने लिमिट में रहकर घूम! 1990-1995 वाला समय मत समझ! ये 2026 है, अब तुझमें और मुझमें कोई फर्क नहीं है! अब चमार किसी से कम नहीं है, तुझे औकात दिखा दिया जाएगा!"
-भीम आर्मी जिलाध्यक्ष वीरेंद्र भारती
जब ये खुद कह रहे हैं कि ये किसी से कम नहीं, इनके पास बहुत पैसा है, जमीन है, अब ये हर तरह से हमसे अच्छी स्थिति में हैं, तो इनको आरक्षण क्यों दिया जा रहा है????
ये रेकॉर्डिंग हर जगह फैलाइये ताकि लोगों को समझ आये कि अब इस जाति को आरक्षण की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि अब ये खुद मान रहे हैं कि ये बराबरी हासिल कर चुके हैं🙏
आदरणीय @JPNadda जी, ये है आपका 'सौहार्दपूर्ण' वातावरण? बालक कुछ बोलना चाह रहा है और आपने उसे किडनैप करके कमरे में बंद कर दिया!
नड्डा जी भी जानते हैं कि ब्रो जितना बोलेगा, उतना अपने धागे खोलेगा।
Harsh Dubey has nothing to do with RHA.
Neither he understands reservation.
Stop this drama.
This is not called Positive step.
This is called Deception!!
श्री नेगोशिएशन प्रताप @JPNadda जी,
सादर चरणस्पर्श! अभी आपका यह पोस्ट प्राप्त हुआ और मन आह्लादित हो गया कि सरकार ने आदरणीय हर्ष भाई जी की चिट्ठी पर (जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं था) विचार किया और आप पुनः मिलेंगे। आपसे एक त्रुटि हो गई कि आपने आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे श्री आनंद स्वरूप जी को साथ नहीं लिया!
आपने पहले तो (अपने ही द्वारा प्लांटेड) आदरणीय हर्ष भाई को किडनैप करवाया (जैसा कि आदरणीय हर्ष जी ने वीडियो में कहा था), और फिर नीली कलम से दो कौड़ी की डिमांड वाली चिट्ठी लिखवाई, और अब आप सौहार्दपूर्ण वार्ता भी कर रहे हैं।
यह पोस्ट पाते ही @RHAreforms वाले सारे लोग, इंक्लूडिंग @neha_laldas, लिखना छोड़ चुके हैं और उस चिट्ठी का प्रिंट आउट ले कर उत्तर प्रदेश के गाँवों में ड्रोन से गिरा रहे हैं कि सरकार ने हमारी माँगें मान ली!
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यदि सरकार को ऐसा कोई भी भ्रम है तो कोई टेबलेट खा लो। ये पुरानी और सर्वविदित तकनीक है: अपने ही द्वारा प्लांटेड व्यक्ति को नेता मान कर नेगोशिएट करने का स्वाँग रचो, फिर वास्तविक माँगों को डकार जाओ। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मुझे आपके साथ बैठना नहीं पड़ेगा और आप हमारी माँगें भी मानोगे।
थोड़ी भी लज्जा बची है और पार्टी की थोड़ी भी चिंता है, तो खेल खेलना बंद करो। लोग ब्रजेश पाठक वाले स्टंट से ही हर्ष को नकार चुके हैं।