लगातार कुर्मी जाति के युवा प्रगति के राह पर हैं तो प्रदेश और देश की विभिन्न जातियां कुंठा से ग्रसित हो गई हैं उन्हें हम कहना चाहते हैं कुर्मी के युवा मेहनत कर रहे हर छेत्र में इनसे जलन छोड़ के देश और प्रदेश के प्रगति के लिए आप सब भी अपने युवाओं को प्रेरित करे ,जलन से कुछ नहीं होगा।
अशोक महतो गैंगस्टर नही, बिहार का टाइगर है.
RJD ने मुन्ना शुक्ला की बेटी को टिकट दिया तो सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थकों ने स्वागत किया.
RJD ने सामंतवाद से लोहा लेने वाले अशोक महतो की पत्नी को टिकट दिया तो इस खबर को बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया पर अशोक महतो पुरानी तस्वीर वायरल वायरल, और गैंगस्टर लीखकर अपमानित कर रहे हैं.
अशोक महतो गैंगस्टर नही, दलित गरीब और पिछड़े समाज का रखवाला है. अशोक महतो ने जातिवादी बाहुबलियों और सामंतवाद से आमने सामने मुकाबला किया.
अशोक महतो का किसी दलित DM की हत्या में हाथ नही रंगा है. ना कभी किसी गरीब या मजबूर को सताने का आरोप है. सामंतवादियों को रेलने वाले सरदार अशोक महतो जिंदाबाद.
इसी देश की संसद में भगवान राम और हनुमान के नाम को शराब के साथ जोड़ा गया मगर CJI गवई ने कुछ कहा तो उस पर भावनाएं उन्माद बन गई। जूता से मारने की कोशिश की गई।
CJI व्यक्ति नहीं संस्थान होता है, उन पर जूता चलाने की कोशिश करने वाले को ग्लोरिफ़ाई कैसे किया जा सकता है? जिस घटना को प्रधानमंत्री से नेता विपक्ष तक आघात बता चुके हैं, उस कृत्य को करने वाले का महिमामंडन करने वालों को पहचानते चलिए
याद रखिएगा- ऐसे लोगों को ग्लोरिफ़ाई करने वाले ही देश को उन्माद के गर्त में ले जा रहे हैं।
राजीव मेरे IIMC के जूनियर थे। उत्तराखंड में मेहनत करके अपना YouTube चैनल चलाते थे। उत्तरकाशी में सरकारी अस्पताल का भ्रष्टाचार दिखाया। 10 दिन लापता रहे,फिर नदी ने एक दिन लाश उगल दी।
चमक-धमक वाला बड़ा पत्रकार होता तो नेता मंत्री ट्वीट करते मगर अभी कोई पूछने वाला नहीं है! CM @pushkardhami जी क्या न्याय होगा?
जब पत्रकार ही पत्रकार की बात नहीं कर रहे तो बाकी क्यों करेंगे? हिंदू-मुस्लिम करने वाली पत्रकारिता के लिए ये खबर नहीं होगी क्योंकि इसमें कोई सेलिब्रिटी या सांप्रदायिकता नहीं है।
कोई बात नहीं! जलते घर को देखने वालों…
माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार ने जातिगत रैलियों, FIR और पुलिस रिकॉर्ड में जाति लिखने पर रोक लगा दी है। सरकार इसे “समानता” का कदम बता रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह फैसला जातिवाद को खत्म करने में नाकाम सरकार की हताशा और बहुजन समाज की आवाज़ दबाने की साज़िश है।
हैरत की बात यह है कि अपने धर्म के भगवान को भी अपनी जाति का बताकर जाति पर गर्व करने की नसीहत देने वाले, हनुमान जी की जाति बताने वाले और जाति के नाम पर सम्मेलन करवाने वाली सरकार के मुखिया को अब जाति के नाम पर राजनीति असंवैधानिक और समाज तोड़ने वाली लगने लगी है।
खैर, मान लेते हैं कि यह आदेश स्वागत योग्य है, लेकिन यह अधूरा है। अगर वास्तव में अदालतें और सरकार देश और प्रदेश से जातिवाद मिटाना चाहती हैं, तो सिर्फ जाति आधारित रैलियों को रोककर या FIR और पट्टियों से जाति हटाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नामों के बाद लगने वाले जाति ‘सरनेम’ हटाने का आदेश भी पारित करना पड़ेगा।
और हां, जातिगत असमानता और भेदभाव खत्म करना है तो जाति देखकर की जाने वाली ट्रांसफर-पोस्टिंग, इंटरव्यू, नियुक्तियाँ, सरकारी ठेके और अपराधियों या माफियाओं पर कार्रवाई में भी रोक लगानी होगी।
हालांकि यह आदेश केवल कागजी खानापूर्ति न बने, इसके लिए यह सरकारों की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। वरना इन आदेशों की आड़ में कमजोर तबके के लोग परेशान होते रहेंगे, जबकि जाति के नाम पर बनी तमाम सेनाओं को तलवार लहराकर गुंडई करने की खुली छूट मिलती रहेगी।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की लड़ाई जातिवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और संवैधानिक बराबरी व सामाजिक न्याय की है। इसलिए हमारी मांग है कि अगर जातिवाद वास्तव में खत्म करना है, तो जाति आधारित उत्पीड़न और जाति बताने वाले सरनेम पर कठोर प्रतिबंध का आदेश जारी किया जाए।
"सत्ता के लिए जाति चले तो नियम,
हक़ की लड़ाई में जाति चले तो अपराध!"
…और 5000 सालों से मन में बसे जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए क्या किया जाएगा?
और वस्त्र, वेशभूषा और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से जाति-प्रदर्शन से उपजे जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए क्या किया जाएगा?
और किसी के मिलने पर नाम से पहले ‘जाति’ पूछने की जातिगत भेदभाव की मानसिकता को ख़त्म करने के लिए क्या किया जाएगा?
और किसी का घर धुलवाने की जातिगत भेदभाव की सोच का अंत करने के लिए क्या उपाय किया जाएगा?
और किसी पर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाकर बदनाम करने के जातिगत भेदभाव से भरी साज़िशों को समाप्त करने के लिए क्या किया जाएगा?
लखीमपुर खीरी कोऑपरेटिव बैंक भर्ती घोटाला योगी सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और जातिवादी मानसिकता का जीता-जागता सबूत है।
गुपचुप तरीके से निकाली गई 27 भर्तियों में से 15 पद सीधे CM के सजातीयों को बाँट दिए गए। रेवड़ी की तरह बाँटी गई इन नौकरियों में ज़्यादातर स्थान मुख्यमंत्री @myogiadityanath के मंत्री, विधायक, सांसद और @BJP4UP के स्थानीय नेताओं के नाते-रिश्तेदारों को नियम-क़ानून ताक पर रखकर दिए गए।
आरक्षण नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए SC/ST को केवल 2 पद और OBC को मात्र 6 पदों का झुनझुना थमा दिया गया।
भ्रष्टाचार और जातिवाद की पराकाष्ठा तो देखिए—इस मामले का जांच अधिकारी भी उसी लाभान्वित जाति से बनाया गया, जिसने अपने ही भतीजे को नौकरी दिलाकर पूरे प्रकरण को दबा दिया।
यह नौकरी घोटाला सिर्फ़ संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था की धज्जियाँ नहीं उड़ाता, बल्कि दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, गरीब और समाज की अन्य जातियों के हर बेरोज़गार युवाओं के सपनों और अधिकारों पर सीधा हमला है।
यह सिर्फ़ एक भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और संविधान की धारा 16(4) का खुला उल्लंघन है, जो समान अवसर और न्याय की पूरी भावना को कुचलता है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) @UPGovt से माँग करती है कि अगर सरकार वास्तव में आरोपियों को संरक्षण नहीं दे रही है, तो—
1. इन भर्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए।
2. दोषियों पर सख़्त कार्रवाई हो।
3. नई भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ, तथा आरक्षण नियमों के अनुसार दोबारा शुरू की जाए।
@CMOfficeUP
फतेहपुर में मृतक काली शंकर उत्तम पटेल के सुपुत्र का न्याय हेतु मार्मिक अपील...
उन्होंने कहा कि मेरे समाज के लोगों 13 सितंबर को फतेहपुर आइये..मृतक केशपाल पटेल एवं हमारे पिता मृतक काली शंकर पटेल को न्याय दिलाइए...
आप सबसे अनुरोध है कि वीडियो ज्यादा से ज्यादा शेयर करिए।
उत्तर प्रदेश के जिला अंबेडकरनगर में सिर्फ़ एक महीने के भीतर 56 बेटियों का अपहरण होना अत्यंत भयावह और शर्मनाक है। इनमें अधिकांश दलित–पिछड़े और कमजोर वर्ग से आती हैं। यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित षड्यंत्र और प्रदेश सरकार की पूरी विफलता का प्रमाण है।
जिले के 18 थानों में दर्ज इन 56 मुकदमों के अलावा अपहरण से पीड़ित दर्जनों परिवार ऐसे भी हैं, जो डर और लोकलाज के कारण शिकायत तक नहीं कर पाए।
सबसे चिंताजनक और शर्मनाक पहलू यह है कि कई मामलों में पुलिस ने पीड़ित परिवारों की गुहार के बावजूद एफआईआर तक दर्ज नहीं की। यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि अपराधियों को खुली छूट देने जैसा है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी से सवाल है कि –
अगर बेटियाँ ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आपके “मिशन शक्ति” और “बेटी बचाओ” जैसे नारे आखिर किसके लिए हैं – बेटियों की रक्षा के लिए या सिर्फ़ सत्ता की राजनीति के लिए?
क्या दलित–पिछड़े समाज की बेटियों की शिकायत दर्ज करने से इनकार करने वाली पुलिस जनता की सुरक्षा करेगी या अपराधियों की ढाल बनेगी?
हम @UPGovt से माँग करते हैं:
1. सभी अपहरण मामलों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
2. दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया जाए।
3. पीड़ित परिवारों को न्याय, सुरक्षा और मुआवज़ा दिया जाए।
4. सबसे पहले उन पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए, जिन्होंने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर पीड़ित परिवारों को निराश किया।
यह अपराध नहीं, बल्कि बेटियों की अस्मिता पर सीधा हमला है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
@CMOfficeUP
परशुराम का वंशज बताकर जय श्री राम बोलते हुए श्याम जी पांडे ने फरसे से अजरौली पल्लवन,धाता फतेहपुर के तीन पटेलों कों काट डाला, एक की दुखद मौत,दो की हालत गंभीर है.।
@fatehpurpolice
आखिर कब तक मौन बने रहेंगें.?
उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने वाले पटेलो को गाजर मूली की तरह काटा जा रहा है और @UPGovt चिर निद्रा में सोए हुए हैं। @myogiadityanath जी से कहना चाहता हूं कि अगर अपराधी की तत्काल गिरफ्तारी के साथ उसका एनकाउंटर नहीं हुआ तों @SARDARSENAOrg फतेहपुर में आंदोलन करेगी और जो भी समस्या उठेगी उसकी सारी जिम्मेदारी योगी सरकार की होगी।
@dmfatehpur@Uppolice@dgpup@ADGZonPrayagraj@igrangealld
उप्र में 2022 के विधानसभा चुनावों में नाम काटने को लेकर हमने जो 18000 शपथपत्र दिये थे, भाजपा सरकार उनमें से एक का भी जवाब सही तरीक़े से देना नहीं चाहती है। ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता। इस मामले की गहन जाँच-पड़ताल हो। डीएम साहब दिखाएं कि नाम काटते समय जो ‘मृतक प्रमाणपत्र’ लगाए गये थे वो कहाँ हैं। अगर ये झूठ नहीं है तो ये सफ़ाई देने में इतने साल क्यों लग गये?
गोरखपुर के बिछिया स्थित पीएसी ट्रेनिंग कैंपस में महिला सिपाहियों की ट्रेनिंग 21 जुलाई, सोमवार से शुरू हुई। लेकिन महज़ दो दिन में ही ट्रेनिंग सेंटर की सुरक्षा, सुविधाओं और अमानवीय व्यवहार के खिलाफ़ 600 से ज़्यादा महिला सिपाहियों ने रोते, चिल्लाते सड़क पर उतरने का साहसिक कदम उठाया।
उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाए कि ट्रेनिंग सेंटर में उनकी निजता, गरिमा और स्वास्थ्य से जुड़ी मूलभूत ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ किया गया।
बाथरूम और गैलरी जैसे संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए,
अविवाहित महिला सिपाहियों को जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए बाध्य किया गया,
बिजली, पीने के पानी और रहने की मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव था,
360 क्षमता वाले परिसर में 600 से अधिक महिलाओं को ठूंस-ठूंसकर रखा गया।
यह घटना गोरखपुर में हुई है — जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी का जिला है।
ऐसे में यह सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की सीधी नैतिक और राजनीतिक जवाबदेही का प्रश्न है।
गोरखपुर पीएसी ट्रेनिंग सेंटर में जो कुछ भी हुआ — वह महिला सिपाहियों की गरिमा पर एक संगठित हमला है।
यह घटना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था, और सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
हम यह मानते हैं कि —अगर वर्दी पहनने वाली महिलाएं भी राज्य में सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर आम नागरिकों की सुरक्षा का दावा खोखला है।
इस घटना का सख़्ती से संज्ञान लिया जाए!
दोषियों के चेहरों की पहचान करके तुरंत कार्रवाई हो। सुरक्षा बलों के मान-सम्मान के साथ समझौता किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
बिहार के जिला पूर्णिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रानीपतरा टेटगामा गांव में 40 से 50 लोगों की भीड़ ने डायन बताकर एक ही आदिवासी परिवार के 5 लोगों को ज़िंदा जला दिया। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं — 70 वर्षीय कातो, बाबूलाल उरांव, सीता देवी, मनजीत कुमार और रानी देवी।
बच्चों की मौत का "जादू-टोने" से संबंध बताते हुए गांव के लोगों ने पूरे परिवार को पेट्रोल डालकर जलाया और शवों को बोरे में भरकर बहियार में फेंक दिया।
यह सिर्फ अंधविश्वास नहीं, संगठित बर्बरता है। यह आदिवासी समाज पर सीधा हमला है।
16 वर्षीय सोनू किसी तरह बचकर निकला और उसने पूरी वारदात का खुलासा किया।
यह नरसंहार एक योजनाबद्ध, बर्बर भीड़ द्वारा अंजाम दिया गया।
लेकिन शर्म की बात ये है कि इतनी बड़ी हिंसा के बावजूद अभी तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
अब तक सिर्फ 2 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि पूरी वारदात में 40-50 लोग शामिल थे!
इस हिंसा की जड़ में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की भयानक कमी है।जब बीमारियों का सही इलाज नहीं मिल पाता, तो लोग मजबूरी में ओझा-गुनी और झाड़-फूंक की शरण लेते हैं।और जब वहां भी राहत नहीं मिलती — किसी निर्दोष महिला को 'डायन' कहकर ज़िंदा जला दिया जाता है।
इस खबर से गहरे दुख और आक्रोश में हूँ। हम इंसान हैं — शिकार नहीं।
हम @officecmbihar से मांग करते हैं:
1. सभी हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी हो
2. घटना को SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, हत्या और षड्यंत्र की धाराओं में दर्ज किया जाए
3. पीड़ित परिवार के जीवित सदस्यों को राजकीय सुरक्षा व मुआवज़ा दिया जाए
4. बिहार सरकार गांव में अंधविश्वास उन्मूलन अभियान शुरू करे
5. इस घटना की न्यायिक जांच हो, ताकि असली दोषियों को बचाया न जा सके
डायन प्रथा, ओझा-तंत्र और अंधविश्वास के नाम पर हो रही हत्याएं अब बंद होनी चाहिए। ये हत्याएं नहीं रुकीं तो हर गरीब, दलित, आदिवासी महिला ख़तरे में है।
@NitishKumar
आशीष पटेल और अनुप्रिया पटेल का कहना है कि उन्होंने अपने समाज के गरीबों और वंचितों के लिए बहुत काम किए हैं और उन्हें UP का सूचना विभाग टारगेट कर रहा है।
आशीष पटेल और अनुप्रिया पटेल को चाहिए कि अपने द्वारा अपने समाज के गरीबों के लिए किए गए काम की सूची,
अपने आलीशान आवास की तस्वीर, लग्ज़री गाड़ियों के क़ाफ़िले का चलचित्र और अपनी चल-अचल संपत्ति की सूची सब सार्वजनिक कर दें।
और ये भी बता दें कि इस पूरी पार्टी में सिर्फ़ पति और पत्नी को ही मंत्री बनने का सौभाग्य क्यों हासिल है?
जनता अपना निष्कर्ष स्वयं ढूँढ लेगी।
डिमोट करके अपना दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए आशीष पटेल ने फिर किया योगी सरकार के सूचना विभाग पर ज़बर्दस्त हमला।
बोला 1700 सौ करोड़ का बजट उन्हें बदनाम करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा ह।
ये काम सूचना विभाग कर रहा है।
सवाल ये कि आख़िर आशीष पटेल को 1700 करोड़ रुपया का फिगर कहाँ से पता चला?
योगी सरकार एक नेता को निपटाने में 1700 करोड़ ख़र्च करती है?
ये सूचना क्या क्या कर रहा है?
योगी आदित्यनाथ को चुप्पी तोड़नी चाहिए। आख़िर ये विभाग उन्हीं के तहत तो आता है?
@myogiadityanath@myogioffice