“दर्द कहाँ तक पाला जाए,
युद्ध कहाँ तक टाला जाए,
तू भी है राणा का वंशज,
फेंक जहाँ तक भाला
#राष्ट्र#भक्त ही फालो करें 100%फालोबैक मिलेगा
#हिंदुत्व#हिन्दु
गुलाम नबी ने बस इतना ही नहीं कहा 'मेरे पूर्वज भी हिन्दू थे' बाकी सब कह दिया वैसे इस गुलाम नबी पर बहुत ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है दोस्तो ये वही गुलाम हैं जो बुरहान बानी और अफजल गुरु के लिए आहें भरते थे मोदी जी भी एक नेता ही हैं और नेता के हर बयान में राजनीति छुपी होती है😏
आन्दोलनजीवी श्री योगेंद्र यादव जी के उस ज़माने का वीडियो जब उन्होंने सोचा नहीं था कि वो कभी किसी किसान आंदोलन में परजीवी बनकर किसानों का रक्तपान करेंगे।
लुधियाना में चक्का जाम के दौरान आतंकी भिंडरवाला का झंडा लहराया गया,
@priyankagandhi और @RahulGandhi बताएं क्या सो रही पंजाब की सरकार
क्या यह किसानों का आंदोलन है ???
क्या जयंत चौधरी या राकेश टिकैत
हमारे प्रिय जाट भाई रचित चौधरी की माँ को ढांढस बंधाने व दरिंदे मुहम्मदों के खिलाफ फांसी की मांग कर रचित को न्याय दिलाने उनके घर जाएंगे ?
!! पूछता है जाट समाज !!
हे कालूतोष श्रेष्ठ @ashutosh83B
सरकार खुश रहे य
पर लेखन, रचनात्मकता और कलाकारी की आड़ में अगर कोई 1400 साल पहले हुई एक नाबालिक बच्ची के 58वर्षीय बुड्ढे द्वारा बलात्कार की सत्य घटना पर फ़िल्म बना देगा तो क्या आपके मुँह से यही शब्द निकलेंगे ?
जिस गति से लोगों की भावनायें आहत हो रही हैं, उसको देखते हुये बहुत जल्दी ही देश में रचनात्मक काम होने बंद हो जायेंगे । फ़िल्मे और लेखन सरकारों को खुश करने के लिये बनेंगी ।
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सालार गाज़ी को मार गिराने वाले महान हिन्दू सम्राट सुहेलदेव जी के नाम पर बनी "सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी" ने नेता दंगाई बयानबाज़ी के लिए कुख्यात "ओवैसी" को "साहब" पदवी के साथ "शेर आया - शेर आया" से संबोधित करते हुए.
माथे पर सुहेलदेव जी का परंपरागत तिलक
भावनाएँ तो आप जानते ही हैं सबसे कोमल चीज़ होती हैं. कभी भी आहत हो जाती हैं. किसी की एक कैफ़े के नाम से आहत होती हैं तो बुद्धिजीवी लोग सिर्फ़ च्च च्च कर के निकल लेते हैं और किसी की आस्था पे चोट पड़ने में भी अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का झंडा आ जाता है!
आज Creative freedom के नाम पर हो रहे अधर्म के ‘तांडव’ को रोकने के लिए अति आवश्यक है, कि सर्वोच्च गुरु का दर्जा प्राप्त चारों पीठों के शंकराचार्य इकट्ठे होकर आगे आएँ, और सभी हिन्दुओं को एक सूत्र में बांधकर उन्हें अपनी आस्था, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए जागरुक करें...
तांडव मामले में मांगी गई माफी दिखाती है कि अपनी आवाज़ सुनाने के लिए ना तो बम फोड़ने की जरुरत होती है और ना थाना जलाने की, बस एकजुट रहिएगा तो सबको सब सुनाई देने लगता है। अपनी पहचान बनाए रखिए और एकजुट रहिए, सब जगह पर आ जाएंगे।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक डायरेक्ट रेल कनेक्टिविटी तैयार करने के लिए भारतीय रेल ने जिस बुलंद हौसले का परिचय दिया है, वह प्रशंसनीय है। भारी वर्षा और कोरोना जैसी महामारी भी विकास की इस तेज रफ्तार के आड़े नहीं आ पाई।