C-Section कोई आसान विकल्प नहीं बल्कि एक बड़ी शल्य-चिकित्सा है, जिसे केवल चिकित्सीय ज़रूरत होने पर ही अपनाना चाहिए। सही दृष्टिकोण अपनाएं और भ्रांतियों से दूर रहें। #मातृत्व_जागरूकता फैलाने में हमारा सहयोग करें। सुप्रसव अभियान से जुड़ें।
@HeenaKhushrang1 हर बच्चे का अधिकार है कि वह एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण में जन्म ले। आइए, हम सब मिलकर प्रसव से जुड़ी सही जानकारियों का प्रसार करें और समाज को सशक्त बनाएं। सही निर्णय ही सुरक्षा का आधार है। #मातृत्व_जागरूकता सुप्रसव अभियान।
संसार में फँस मरने के लिए, पशु-योनि में धकेले जाने के लिए तुम्हारा जन्म नहीं हुआ, परमात्म-ज्ञान पाकर मुक्ति का अनुभव करने के लिए तुम्हारा जन्म हुआ है ।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ मनुष्य जीवन केवल सांसारिक सुख-दुःख में उलझने के लिए नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप को जानने और जीवन को सार्थक बनाने के लिए मिला है।
#AsharamjiBapuQuotes
अब आप समझना हिंदू धर्म की महानता। ये हमारा स्थूल शरीर है, 27 तत्वों का होता है । जब ये स्थूल शरीर मर जाता है तो सूक्ष्म शरीर रह जाता है 17 तत्वों का। उसमें पृथ्वी तत्व और जल तत्व नहीं होता बाकी वायु, तेज और आकाश तत्व होता है। उसको बोलते हैं प्रेतात्मा। मृतक हुआ और प्रेत कर्म करो। उन्होंने जो देखा है, खाया है, भोगा है। स्थूल शरीर उनके पास नहीं है लेकिन ख्वाइशें तो अंदर होती हैं तो घूमते रहते हैं तो वर्ष में एक दिन, हमारा एक वर्ष बीतता है तो पितृ लोक का एक दिन होता है तो पितृ लोक में तो उनको पहुंचने की गति हुई न हुई तो घूमते रहते हैं तो जब #श्राद्ध_पक्ष आता है, प्रत्येक महीने में भी श्राद्ध कर सकते हैं लेकिन अभी जो श्राद्ध पक्ष आया उसका प्रभाव विशेष होता है।
#AsharamjiBapuQuotes
#श्राद्ध_महिमा
@Asharamjibapu__ श्राद्ध हमें अपने पूर्वजों को याद करने के साथ-साथ उनके प्रति सम्मान और परिवार की परंपराओं के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी सिखाता है।
#AsharamjiBapuQuotes
श्राद्ध करने से फायदा ये है कि जब मरने वाले मां-बाप का श्राद्ध करते हैं , तो जीते जी मां-बाप का आदर करने की भी प्रेरणा मिलती है। ऐसा नहीं कि जीते जी दंगम दंगा और मर जाए तो पहुंचाओ गंगा। औरंगजेब के बाप ने बहुत बढ़िया बात कही शाहजहां ने। औरंगजेब अपने बाप को जेल में डालकर गद्दी पर बैठ गया था। और शाहजहां को पीने तक के पानी की मटकी भी ठीक से नहीं दी। “अरे बूढ़ा पीता रहेगा उसमें टूटी फूटी मटकी में”। कई बार उसने संदेशा भेजा कि और नहीं तो केवल एक मटकी तो भिजवा दे मेरा बेटा है तू, ठंडा पानी तो पी सकूँ, लेकिन नौकरों ने कहा कि जहांपनाह का हुकुम नहीं है आपको मटकी मिले। तब शाहजहां ने चिट्ठी लिखी कि धन भागी हैं वे हिंदू कि जीते जी बाप की तो सेवा करते हैं, मरने के बाद भी अपने बापों को, दादाओं को खीर खिलाते हैं और तू जिंदे बाप को पानी की मटकी भी नहीं भेजता है कमबख्त ! जय राम जी बोलना पड़ेगा। हिंदू धर्म हित की प्रधानता से चलता है। आने वाले पुत्र और पुत्रियों का भी हित हो और जाने वाले पिता, माता, दादा, परदादा का भी हित हो और अमावस्या के दिन भूले भटके जो प्राणी हैं जिनका कोई श्राद्ध नहीं करता है उनके लिए भी थोड़े तर्पण या दो कण अनाज के डाल दिए जाते हैं तो उनको भी तृप्ति मिले ऐसी भावना होती है।
#AsharamjiBapu
श्राद्ध करने से फायदा ये है कि जब मरने वाले मां-बाप का श्राद्ध करते हैं , तो जीते जी मां-बाप का आदर करने की भी प्रेरणा मिलती है। ऐसा नहीं कि जीते जी दंगम दंगा और मर जाए तो पहुंचाओ गंगा। औरंगजेब के बाप ने बहुत बढ़िया बात कही शाहजहां ने। औरंगजेब अपने बाप को जेल में डालकर गद्दी पर बैठ गया था। और शाहजहां को पीने तक के पानी की मटकी भी ठीक से नहीं दी। “अरे बूढ़ा पीता रहेगा उसमें टूटी फूटी मटकी में”। कई बार उसने संदेशा भेजा कि और नहीं तो केवल एक मटकी तो भिजवा दे मेरा बेटा है तू, ठंडा पानी तो पी सकूँ, लेकिन नौकरों ने कहा कि जहांपनाह का हुकुम नहीं है आपको मटकी मिले। तब शाहजहां ने चिट्ठी लिखी कि धन भागी हैं वे हिंदू कि जीते जी बाप की तो सेवा करते हैं, मरने के बाद भी अपने बापों को, दादाओं को खीर खिलाते हैं और तू जिंदे बाप को पानी की मटकी भी नहीं भेजता है कमबख्त ! जय राम जी बोलना पड़ेगा। हिंदू धर्म हित की प्रधानता से चलता है। आने वाले पुत्र और पुत्रियों का भी हित हो और जाने वाले पिता, माता, दादा, परदादा का भी हित हो और अमावस्या के दिन भूले भटके जो प्राणी हैं जिनका कोई श्राद्ध नहीं करता है उनके लिए भी थोड़े तर्पण या दो कण अनाज के डाल दिए जाते हैं तो उनको भी तृप्ति मिले ऐसी भावना होती है।
#AsharamjiBapu
@Asharamjibapu__ श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा है। 🙏
सच्ची श्रद्धा यही है कि जीते जी भी माता-पिता का सम्मान, सेवा और आदर किया जाए।
#AsharamjiBapu
“संसार के संबंध बदलते रहते हैं, लेकिन परमात्मा से जुड़ा संबंध शाश्वत है। सत्संग और आत्मज्ञान मनुष्य को बाहरी आसक्तियों से ऊपर उठाकर अपने वास्तविक स्वरूप की पहचान कराते हैं।”
#AsharamjiBapuQuotes
दुनिया में जो संबंध हैं वे सब एक-दूसरे का शोषण कर सुख लेने के संबंध हैं। सच्चा संबंध तो परमात्मा का है अथवा तो परमात्मा को पाये हुए उन ब्रह्मवेत्ताओं का है जो तुम्हें सब संबंधों से मुक्त करना चाहते हैं ।
#AsharamjiBapuQuotes
दुनिया में जो संबंध हैं वे सब एक-दूसरे का शोषण कर सुख लेने के संबंध हैं। सच्चा संबंध तो परमात्मा का है अथवा तो परमात्मा को पाये हुए उन ब्रह्मवेत्ताओं का है जो तुम्हें सब संबंधों से मुक्त करना चाहते हैं ।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ सांसारिक संबंधों में अपेक्षाएँ और स्वार्थ जुड़े हो सकते हैं, लेकिन परमात्मा का संबंध निष्काम और शाश्वत है। सच्चा ज्ञान हमें आसक्ति से ऊपर उठकर आत्मस्वरूप की ओर ले जाता है।
#AsharamjiBapuQuotes
“श्राद्ध का सार केवल अर्पण में नहीं, श्रद्धा में है; पितरों का स्मरण, भगवन्नाम का कीर्तन और कृतज्ञ भाव जीवन में संस्कारों की ज्योति जगाते हैं।”
#श्राद्ध_महिमा#AsharamjiBapuQuotes
श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी की महिमा बड़ी भारी है। श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी का उपयोग पितरों को तृप्त करता है। श्राद्ध में भोजन आदि से तो पितरों की बाह्य तृप्ति होती है लेकिन प्रीतिपूर्वक भगवन्नाम कीर्तन, भगवद स्मृति उनको मानसिक तृप्ति देती है।
तुलसी में पिडार्चन होता है, विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। धन - धान्य जिनके पास है वो उस ढंग से करें और जिनके पास नहीं है तो कम से कम साधन से भी श्राद्ध हो सकता है। कोई पितर अथवा कोई सुह्रद रह गया हो तो अमावस्या को उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जा सकता है।
#AsharamjiBapuQuotes
#श्राद्ध_महिमा
@Asharamjibapu__ श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का पावन अवसर है। कुशा, काले तिल और तुलसी का महत्व हमारी सनातन परंपरा में विशेष बताया गया है। 🙏
#AsharamjiBapuQuotes
श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी की महिमा बड़ी भारी है। श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी का उपयोग पितरों को तृप्त करता है। श्राद्ध में भोजन आदि से तो पितरों की बाह्य तृप्ति होती है लेकिन प्रीतिपूर्वक भगवन्नाम कीर्तन, भगवद स्मृति उनको मानसिक तृप्ति देती है।
तुलसी में पिडार्चन होता है, विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। धन - धान्य जिनके पास है वो उस ढंग से करें और जिनके पास नहीं है तो कम से कम साधन से भी श्राद्ध हो सकता है। कोई पितर अथवा कोई सुह्रद रह गया हो तो अमावस्या को उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जा सकता है।
#AsharamjiBapuQuotes
#श्राद्ध_महिमा
C-section कई परिस्थितियों में माँ और शिशु के लिए जीवनरक्षक हो सकता है, इसलिए निर्णय चिकित्सा-स्थिति के आधार पर होना चाहिए। #SuprasavAbhiyan के माध्यम से Pregnancy Awareness बढ़ाएँ। Sant Shri Asharamji Bapu की प्रेरणा से सही जानकारी जन-जन तक पहुँचाएँ।
@SanjayRawate01@AshramJodhpur 🤰 Pregnancy Awareness का उद्देश्य डर नहीं, सही जानकारी है। माँ और शिशु की सुरक्षा सर्वोच्च है। Sant Shri Asharamji Bapu की प्रेरणा से #SuprasavAbhiyan परिवारों को प्रसव संबंधी जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह के लिए प्रेरित करता है।
@Mitesh111Patel 📚 प्रसव से पहले सही जानकारी लेना समझदारी है। डॉक्टर से संभावित परिस्थितियाँ, विकल्प और चिकित्सकीय जरूरत के बारे में बात करें। Pregnancy Awareness बढ़ाएँ और #SuprasavAbhiyan का संदेश Sant Shri Asharamji Bapu की प्रेरणा से साझा करें।
🪔 श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और पितृऋण को स्वीकार करने की सनातन परंपरा है। तर्पण, पिंडदान, दान और भगवद्स्मरण से पूर्वजों का स्मरण कर उनके श्रेष्ठ संस्कारों को आगे बढ़ाएँ। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻
#पितृपक्ष#श्राद्धकीमहिमा