मोदीजी पैदा General Category में हुए थे , फिर पिछड़ा बने ,
फिर अति पिछड़ा बन गए । ।
Well done Satyajeet bhai you highlighted many facts in this video .
जब देश में बात चल ही रही है। आरक्षण की तो मेरा विचार है। की में भी पिछड़े वर्ग की नाई जाति से आता हूँ। मेरे गाँव में लगभग हमारी जाति की 125 की संख्या है। कोई किसान है कोई मजदूर है तो किसी ने अपनी नाई की दूकान खोल रखी है। जैसे तैसे सब अपनी गुजर बसर कर रहे है। जब से मैंने अपनी शिक्षा ग्रहण की है। सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र में थोड़ी रूचि हुई है। अपने हक़ अधिकारों के प्रति जागरूक हुआ हूँ। तब से एक बात समझ नहीं आयी की सब आरक्षण आरक्षण की बात करते है लेकिन साला ये आरक्षण मिलता किसे है। मेरी नजर में आरक्षण वो भैंस है जिसके पास लाठी है वही उसका दूध काढ रहा है। बाकी तो सब यूँही बदनाम है। मेरी जाति जैसे अन्य कई छोटी छोटी कामगार जातियां है। जैसे कुम्हार,धोभी,धानुक, बढ़ई,कश्यप, कोरी, निषाद, माली, लोहार,तेली, जैसी कई अनगिनत जातियां है। जिनका नाम तो है पिछड़े वर्ग आरक्षण में लेकिन मिलता जुलता कोई कुछ नहीं। यूँही बिचारे बदनाम है 😊 न ही इन जातियों का कोई राजनीतिक वर्चस्व है न ही इनकी कोई आवाज उठाने वाला। इन लोगो की याद पिछड़े वर्ग की वर्चस्व जातियों को याद सिर्फ और सिर्फ वोट लेने के नाम पर ही आती है। हक़ अधिकारों से ये लोग आज भी दूर है। विधायकी सांसदी तो बहुत दूर की बात है। वर्चस्व वाली जातियां इन्हे प्रधानी ही लड़ा दे बहुत बड़ी बात है। इसलिए मेरा मानना है आरक्षण की समीक्षा होनी ही चाहिए। और समीक्षा के आधार पर आरक्षण में वर्गीकरण होना ही चाहिए। वरना जो व्यवस्ता आज चल रही है अगर वही चलती रही तो अमीर और अमीर होता जायेगा और गरीब गरीब ही रहेगा। मगर अभी हाल फिलहाल में तो मुझे किसी सरकार की नियत साफ़ नहीं दिखती चाहे वो भाजपा, सपा, कांग्रेस, कोई भी दल हो कोई सामाजिक न्याय की बात नहीं करना चाहता सबको बस सत्ता चाहिए। सब अपना अपना वोट बैंक साधने में जुटे हुए है। सब खैरात सी बाँट कर अपनी अपनी राजनीतिक दुकाने चला रहे है। गरीब कल भी गरीब था और आज भी गरीब है 😡 क्यूंकि जिनके मुँह आरक्षण रूपी खून लग चूका है वो छोड़ने को तैयार नहीं और ये बात सिर्फ पिछड़े वर्ग में ही नहीं दलितों में सवर्णो में, अल्पसंख्यको में सभी वर्गों में है। इसलिए इसकी समीक्षा होनी ही चाहिए यही आज 21 वीं सदी के भारत की माँग है। मेरे इस विचार से मेरे कई भाई नाराज होंगे असहमत होंगे लेकिन ये मेरा खुद का विचार है। जो की सोशल मिडिया में माध्यम से आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ
सैन रमन श्रीवास्तव ✍️✍️✍️
#आरक्षण_में_वर्गीकरण_लागू_हो
I am speaking on behalf of Reservation Hatao Andolan (RHA) and let me clarify:
We neither endorse the meeting between Harsh Dubey and the government, nor the demands he is presenting.
So, the government cannot claim that it is “talking to RHA” and declare that this movement is over.
The movement is very much on, and it will continue until they speak to us directly instead of using their puppets.
@ajeetbharti@neha_laldas
Where is Brajesh Pathak’s hand after 22 seconds in this video?
It’s clear what BJP is trying to do.
But government should know: this is neither a one person nor a 10 day old movement.
We’ve been fighting for years. We won’t stop until our reform demands are heard.
There is no single face of anti-reservation movement.
The movement has been going on for years.
We all are aiming for long-term policy changes, changing the narrative which demonizes GC, stop politicization of caste & focus on merit.
Unless these goals are achieved, the movement will not end!
Thank you🙏
एक बात मुझे शुरू से समझ नहीं आई, में इसपर लिखने से बच रहा था, लेकिन अब लिखना जरूरी हो गया है, क्योंकि कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस मुहिम को खराब कर रहे है।
सब लोगों ने शायद हर्ष दुबे को पहली बार शिव अरूर के शो में देखा, उससे पहले इस पूरे आंदोलन में उनकी कोई व्यापक सार्वजनिक पहचान दिखाई नहीं देती है, ना ही उनका उस शो से पहले सोशल मीडिया पर कोई फुटप्रिंट दिखता है, लेकिन उसके बाद देखते ही देखते उन्हें लगातार राष्ट्रीय मीडिया में जगह मिलने लगी।
सवाल यह नहीं है कि कोई टीवी डिबेट में क्यों गया? सवाल यह है कि इतने बड़े आंदोलन में, जहां पहले से कई स्थापित चेहरे मौजूद थे, अचानक एक बिल्कुल नए चेहरे को अचानक ही सबसे ज्यादा प्रमुख कैसे बना दिया गया?
क्योंकि @ajeetbharti भाई, @neha_laldas जी, @talk2anuradha जी जैसे चेहरे बहुत सालों से इसके ऊपर लिख-बोल रहे है, और उनके पास इतने सालों का इकट्ठा किया हुआ डाटा भी है, लेकिन उनको जगह क्यों नहीं दी गई?
और इससे भी बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक, अजीत भारती पर इसने खुलकर हमला बोला, और उसी दौरान सोशल मीडिया पर कई भाजपा के परम चाटुकार हैंडल भी हर्ष के पक्ष में खुलकर बोलते दिखाई दिए।
हो सकता है यह सब केवल संयोग हो, हो सकता है इसके पीछे कोई विशेष कारण न हो, लेकिन इन घटनाओं के क्रम ने कई लोगों के मन में सवाल जरूर खड़े किए हैं।
किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता होती है, जब कोई इंसान खुदको ही एक मुहिम का सबसे बड़ा चेहरा बोलने लग जाए, और जो लोग बहुत सालों से मेहनत कर रहे है, उनके ऊपर हमला करने लग जाए, जिससे यह मुहिम कमजोर पड़ सकती है, तो समझ जाओ कि दाल में कुछ काला है।
साथ में 3000 साल की स्तन टैक्स वाली रसीद भी लाना जिसे देने अपनी अम्मा इत्यादि को भेजने का दावा करके शोषित पीड़ित आरक्षण लेते हो
बिना उसके अब कोई आरक्षण नहीं देगे हम लोग
@SunilAstay
Worst Cheif Ministers in India currently :
1. Mohan Yadav (MP)
2. Hemanta Soren (Jharkhand)
3. Samrat Chaudhary (Bihar)
4. Bhajanlal BJP (Rajasthan)
People just want to kick them out.
आरक्षण कोई अधिकार नहीं है। आरक्षण एक कोढ़ है, कैंसर है जो समाज और राष्ट्र को खाए जा रहा है। एक ही जाति को सारा लाभ मिल रहा है, बाकी जातियाँ पीछे हैं।
इसकी समीक्षा करवाइए, नहीं तो जनता स्वयं अपने नेता चुनेगी।
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद education system के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे।
उसी system ने 26 बच्चों की जान ली, और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया।
इस्तीफ़ा भी नैतिकता से नहीं - युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा।
और आज उसी व्यक्ति को संसद में BJP माला पहना रही है। यह कोई सम्मान नहीं - लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है।
देश का हर छात्र ये देख रहा है। और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा।
देर आए दुरुस्त आए…!!
त्याग पत्र तो आपसे तभी ले लेना चाहिए था जब आपने “सामान्य वर्ग के दमन का डेथ वारंट” साइन किया था #UGC जैसा काला कानून लाकर,
ब्राह्मणों का श्राप लगा था आपको, ये तो होना ही था,
आप जैसे जातिवादी नेताओ की वजह से मोदी जी को धर्म संकट की परिस्थिति का सामना करना पड़ता रहा है,
आज हमारे महादेव और माँ भवानी ने सामान्य वर्ग के प्रत्येक छात्र और इनके परिवार के साथ न्याय किया है,
हर हर महादेव 🚩