"मोदीजी को एक संदेश
ईश्वर ने एक अवसर दिया अपने समकक्ष खड़ा होने का! बहुत ही आसान था! सिर्फ अपने किये हुए वादों को पूरा करना था!
अब एक अवसर दिया है मानव समाज ने महापुरुष बनने का ये भी आसान ही है सिर्फ इस्तीफा दे दो!
#मोदीजी_इस्तीफा_दो
आपके पास यदि दो देशों के पासपोर्ट हों, जैसे कि एक ब्रिटिश और एक भारतीय, तो पड़ोस के एक देश में एक अच्छी सुविधा है:
आप भारतीय पासपोर्ट से थायलैंड जा सकते हैं, फिर वहाँ से ब्रिटिश पासपोर्ट पर ‘एग्जिट’ करते हुए जिस भी देश जाना हो जाइए। पुनः, ब्रिटिश पासपोर्ट से थायलैंड आइए। वहाँ से भारतीय पासपोर्ट से भारत वापस।
है न कमाल की निंजा तकनीक? थायलैंड में केवल मसाज पार्लर नहीं है, वहाँ और भी सुविधाएँ हैं जो दूसरे देशों के मसाज पार्लर तक ले जा सकती हैं। भारत के पासपोर्ट पर वीजा थायलैंड का होगा और बाकी विदेश भ्रमण का रिकॉर्ड आपको, यदि संवैधानिक पद आदि पर हैं, तो विवशता में देने से आपको छूट मिल जाती है क्योंकि आप तो पासपोर्ट के हिसाब से थायलैंड में ही थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी कहते हैं
माननीय राहुल गांधी जी हिन्दू महिलाओं के मंगलसुत्र मुस्लिम महिलाओं को दे देंगे
सोचनीय विषय यह है कि मंगलसुत्र का मुस्लिम महिलाएं करेंगी क्या जबकि मंगलसुत्र मुस्लिम महिलाओं का गहना ही नहीं है
मोदी कहते हैं
टेम्पो भर भर कर पैसा राहुल गांधी जी के यहां जा रहा है अम्बानी अडानी के कृपा दृष्टि से
दर असल मोदी का चुनावी टेम्पो इस कदर डाउन हो गया है कि अनाप सनाप भाषण बाजी पर उतर आये
@garrywalia_ विश्वास मानिए अगर आपने वोट डालते समय ये दृश्य स्मरण रखा आपका वोट बिल्कुल ठीक जगह पड़ेगा ,
फिर कभी भी अन्नदाता किसान, नौजवान को दुखी नहीं होना पड़ेगा।
आगे चलकर याद किया जाया करेगा कि
कांग्रेस का जब सबसे बुरा दौर चल रहा था उस वक्त भी यह दो नेता कांग्रेस को अपने अपने राज्यों में शीर्ष पर पहुंचाए हुए थे।
डीके शिवकुमार मात्र एक बेहतरीन कांग्रेस नेता ही नहीं बल्कि कांग्रेस के उभरते हुए चाणक्य भी हैं, उन्होंने कहा है कि वह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कर्नाटक में 20+ सीट्स जिताएंगे।
रेवंत रेड्डी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री जिन्होंने अपने दम पर तेलंगाना में कांग्रेस को खड़ा किया और भारी बहुमत से जितवाया अब वह भी दावा कर रहे हैं कि
तेलंगाना में कांग्रेस को 17 में से 14+ सीटें जिताएंगे।
मैनें राहुल को मार दिया है!!!
सन 1996 की बात है। क्रिकेट वर्ल्ड कप था, पापाजी मजमा लगाकर देखते। उनके दोस्त, हम, रिश्तेदार सब बैठते, घर ही स्टेडियम होता।
भजिये पकौड़े बनते, हर शॉट पर शोर, हर बाल पर नुक्ताचीनी।
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24 मार्च को पिता को ब्रेन हैमरेज हुआ। शहर में कुछ दिन इलाज के बाद, भिलाई सेक्टर 9 हस्पताल ले जाया गया।
7 अप्रेल की सुबह, मुझे नींद से उठाया गया। उठाने वाली, पड़ोस की लेडी थी। हिलाकर उठाया, कहा कुछ नही। लेकिन नीचे के कमरों से रोने की आवाजें थी। मैं घबरा कर सीढ़ियों से उतरा।
मौत होने पर जैसा माहौल फिल्मों में देखा था, वैसा मेरे घर मे था।
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राहुल की भारत जोड़ो यात्रा के समापन पर कश्मीर में दी गई स्पीच मेरी नजरो से आज गुजरी। उस हिस्से को 2-3 बार देखा।
वे बताते है- मैं स्कूल में था.. ज्योग्राफी क्लास थी। एक टीचर ने आकर कहा, प्रिंसिपल ने बुलाया है। लगा, कोई शैतानी पकड़ी गई है, फटकार होगी।
पर वहां पता चला, घर से फोन है। माँ के साथ काम करने वाली अम्मू चीख रही थी- दादी को गोली मार दी, दादी को ..
मैं घर आया।
जहां दादी गिरी थी, वहां खून देखा। आठ साल बाद मैं अमेरिका में था। 21 मई को पिता के एक दोस्त का फोन आया, कहा- राहुल, बुरी खबर है..
मैनें कहा- आइ नो। दे किल्ड माई फादर??
यस- जवाब आया।
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यहां हमारे सामने एक बच्चा है, उसके जीवन की दो घटनाएं हैं।
आठ साल पहले, एक अनसस्पेक्टिंग, आम बालक है। उसने मौत सिर्फ फिल्मों देखी है। तो उसके स्कूल में अर्जेन्ट फोन आने का मतलब, कोई शिकायत, कोई सूचना है।
याने वो सामान्य बच्चा है- आपकी, मेरी तरह। लेकिन, फिर वो सामान्य नही रहा।
अब डर के साये में जीता है।
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स्कूलिंग बन्द, घर पर शिक्षा होती है। कॉलेज, एसपीजी सुरक्षा में जाता है। और फिर, आगे पढ़ने के लिए परदेस।
वो पिता के लिए डरा हुआ है, जो राजनीति में है, सत्ता में है। तो एक दिन अवश्य ही मार दिए जाएंगे।
पिता चुनाव हारा, देश नाप रहा है। भीड़ में घुस रहा है, लोगो को गले लगा रहा है। उसके गिर्द खतरा है, इंटेलिजेंस की रिपोर्ट है।
अब अगर आपको कोई फोन करके कहे, की - राहुल, एक बुरी खबर है।
तो आम बच्चे के लिए, बहुतेरी चीजें बुरी खबर हो सकती है। मगर राहुल के लिए बुरी खबर सिर्फ एक है- पिता की हत्या..
और देखिए विडंबना,
खबर सचमुच वही थी।
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श्रीनगर में वह, कश्मीरियों, और सिक्यूरिटी फोर्सेज से बात कर रहे हैं। आम बातचीत, मे वे बता रहे थे, कि हिंसा, मौत और अरक्षित माहौल का दंश उन्होंने खुद, बेहद कोर से महसूस किया है।
पर उसने जब दिल खोला, मैं दिमाग मे झांक पाया। पहली बार समझा, कि उसने यात्रा शुरू करने के पहले क्यो कहा-
मैनें उस राहुल को मार दिया है
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उसके जेहन में सत्ता, मृत्यु है। सत्ता में दो नजदीकी रिश्तों की लाश ने ये सोच बनाई है। तो जब खुद प्रधानमंत्री बनने का मौका था..
डरा हुआ वो लड़का, भागता रहा।
उसकी रुचि पार्टी चलाने, या सत्ता पाने में कभी थी ही नही। सांसद, शायद वह मां की सहायता के लिए बन गया।
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लेकिन दौर बदल गया है। आज की बात, सत्ता पाने, चुनाव और पार्टी चलाने से अलहदा है।
राजनीति और रेजीम, देश की जड़ो पर वार करती दिखती है। अंग्रेजी तानाशाही, हिंसा, नफरत लौट आयी है। जिन वैल्यूज के लिए गांधी और जवाहरलाल ताजिंदगी लड़े..
उसके लिए अपना उत्सर्ग करना, सत्ता का प्रोपोजल नही। उससे ऊंचा, बड़ा, साहसिक प्रस्ताव है।
इसके लिए, बेशक मरा जा सकता है।
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राहुल ने वो बीड़ा उठाया। वो खुद की डेस्टिनी, सत्ता (इंदिरा-राजीव) नही, वैल्यूज (गांधी- जवाहर) में देखता है।
पर इसके लिए भीड़ में घुसना होगा। लोगो से मिलना होगा। मरना पड़ेगा। बीड़ा उठाने के क्षण उसने मान लिया, की वो अभी, इसी पल मर चुका है।
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तब से यह नया राहुल है।
दादी और बाप की मौत से आजाद है। वह सड़कों पे खुलेआम निकलता है। जानता है कि देर सवेर कोई गोली, कोई बम, कोई गोडसे, कोई धानु- आ गिरेगी।
और राहुल तैयार है।
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लेकिन मैं डरता हूँ। जब वो अरक्षित दिखता है, तो मुझे संविधान, मेरी जीवन शैली, और हिंदुस्तान का भविष्य अरक्षित दिखता है।
मैं बहुत डरता हूँ।
क्रिकेट नही देखता। जितना सुबह, उठाये जाने से नफरत है, सेक्टर 9 हस्पताल, और उसकी तरफ जाने वाली सड़को से नफरत है, उतना ही राहुल को भीड़ से घिरा देखने से नफरत है।
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हां, इस दौर की जरूरत है, ऐसे लीडर की जो हार्श पॉलीटकल नहीं, सामाजिक हो, मानवीय हो, कॉन्स्टिट्यूशन को अपहेल्ड करे। इसके लिए मौत भी झेलने को तैयार हो।
पर क्या हम यही कीमत चाहते है?? हमारी 30 साल की समृद्धि, शांति के लिए हर बार एक गांधी का मरना, जरूरी क्यो है?
सोचिये
समझाइए
कहिये
इस बार किसी गांधी को मरने नही देना है।
*भाजपा बात करेगी "ताज" की,*
*तुम बात करना "आज" की l*
*भाजपा बात करेगी "शाहजहां" की,*
*तुम बात करना "जय शाह" की l*
*भाजपा बात करेगी "3 तलाक" की,*
*तुम बात करना "15 लाख" की l*
*भाजपा बात करेगी "राम-राज" की,*
*तुम बात करना "काम-काज" की l*
*भाजपा बात करेगी "गौरक्षा" की,*
*तुम बात करना "बेटी रक्षा" की l*
*भाजपा बात करेगी "शमशान, कब्रिस्तान की,*
*तुम बात करना "संविधान" की l*
*भाजपा बात करेगी "पाकिस्तान" की,*
*तुम बात करना मेरा "देश महान" की l*
*भाजपा बात करेगी "नफरत दंगों" की,*
*तुम बात करना "भूखे-नंगों" की l*
*भाजपा बात करेगी "नए वादों" की,*
*तुम याद दिलाना "पुराने वादों" की l*
*भाजपा बात करेगी तुम्हारी "कमाई" की,*
*तुम बात करना "मंहगाई" की l*
*भाजपा बात करेगी "मन" की,*
*तुम बात करना "काले धन" की l*
*भाजपा बात करेगी "मोदीभक्ति" की,*
*तुम बात करना "देशभक्ति" की l*
*भाजपा बात करेगी "जातिवाद" की,*
*तुम बात करना "अपने अधिकार" की l*
*भाजपा बात करेगी "कमल के फूल" की,*
*तुम बात करना अपनी "भूल" की l*
*भाजपा बात करेगी "पकोडे" की,*
*तुम बात करना "भगोडे" की ।*
*भाजपाई बात करेंगे सिर्फ "हिंदुत्व" की,*
*हम सब को बात करना है "विश्व बंधुत्व" की l*
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सहवाग एक दिन कार से जा रहे थे, किसी ने कहा ये गाड़ी अंग्रेज़ो की बनाई है सहवाग ठहरे घोर स्वदेसी, तुरंत गाड़ी से उतर गए,
किसी ने कहा कोट पैंट भी उनका है, उन्होंने उतार फेंका, फिर इसी तरह शर्ट टाई जूते सब उतार दिए,
एक आदमी ने पूछा भाई साहब टाइम क्या हुआ है उन्होंने घड़ी देखी..1/2
1/2..और गुस्से से उतार फेंकी,
लोगों ने कहा अरे मोबाइल भी अंग्रेज़ो का है उन्होंने वो भी फेंक दिया।
सहवाग के पास अब कपड़े के नाम पर सिर्फ गले में लटका ताबीज़ था।
ताबीज़ लटकाए दिल्ली की गलियों में बढ़ते चले जा रहे थे, रास्ते में गंभीर मिल गए, तंज़ करते हुए कहा..1/3
1/3..क्या मुल्लो वाला ताबीज़ लटकाए घूम रहे हो
सहवाग का खून खौल गया,उन्होने सोचा इसको खोलकर देखें,ताबीज़ खोली,उसमें एक पर्ची थी जिसपर लिखा था "दुष्ट बालक अमृतकाल में तेरी बुद्धि हर ली जाएगी"
सहवाग चिंतित हो गए,तभी उनके कान में महामानव ने आवाज़ दी,अंग्रेज़ो का चश्मा हटाकर पढ़ो1/4