Zafar aadmi usko na jaaniyega,
Wo ho kaisa hi saheb e fehm o zaka,
Jise aish mein yaad e khuda na rahi,
Jise taish mein khauf e khuda na raha.
#bahadurshahzafar
आफरीन तुम्हारे हौसले और तुम्हारी जुर्रत को सलाम अपने वालिद को कैद होते देखा, घर वालों ने हिरासत की तकलीफें सहीं और आज अपने आशियाने को भी टूटते देखा।
हमारे नज़रयाती इख़्तेलाफ़ (मतभेद) भी रहे लेकिन AMU से JNU तक तुमने हमारी बहनों में नई सोच पैदा की है