जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नज़र है
आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा।
- बशीर बद्र
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ओस-भीगी दूब पर घूमने से केवल नेत्रों की ज्योति ही नहीं बढ़ती, मन-मस्तिष्क में भी ऐसी तरावट आती है कि सारा दिन आदमी तनाव-मुक्त होकर काम कर सकता है।
~ मन्नू भंडारी
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साइबेरियन पक्षियों के चारों तरफ़
बनारस एक कोलाज़ है
शोर में शामिल है
उनके पंखों की आवाज़
भूख और उड़ान
बनारस अपनी भूख के लिए अभी कहीं
उड़कर जाने के बारे में नहीं सोच रहा है।
- शुभांगी श्रीवास्तव
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