Cyber crime is increasing day by day
You should know how to register a complain of cyber crime
There are 04 ways of reporting cyber crime in UP –
1. Complain immediately https://t.co/aHmjn8xflj
2. Call immediately to 1930
3. Visit your nearest police station.
4. Complain at UPCOP APP
Complain registered within 24 hours of cyber fraud increases the chances of getting money back
@Uppolice
विश्व भर में क्रूड ऑयल की क़ीमतों में गिरावट के बाद एक प्राइवेट कंपनी नायरा ने अपने पेट्रोल पंपो पर कल एक जुलाई को पेट्रोल पर 5 रुपये और डीज़ल पर 3 रुपये घटा दिए,
पर राष्ट्रवादी इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अभी तक जनता को राहत देने की कोई मंशा तक जाहिर नहीं करी है,यही है असली राष्ट्रवाद...!!
#CrudeOil #PetrolDieselPrice
*WhatsApp के Username फीचर लागू होने से डिजिटल अरेस्ट और इनवेस्टमेंट/ट्रेडिंग फ्रॉड का जोखिम बढ़ेगा, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए नई चुनौतियाँ पैदा होंगी। इसके लिए WhatsApp Verified Username सिस्टम ज़रूरी है। हालाँकि WhatsApp का सिस्टम मोबाइल नंबर से जुड़ा रहता है (backend पर KYC लिंक), इसलिए यह पूरी तरह असुरक्षित नहीं है।*
Username फीचर कैसे काम करेगा
•यूज़र अपना यूनिक यूज़रनेम बना सकेंगे (35 अक्षरों तक)।
•किसी से संपर्क करने के लिए उसका सटीक यूज़रनेम जानना ज़रूरी होगा।
•कोई पब्लिक डायरेक्टरी उपलब्ध नहीं होगी।
•यूज़रनेम को कभी भी बदला या हटाया जा सकता है।
फायदे
•गोपनीयता सुरक्षा: मोबाइल नंबर छिपा रहेगा, जिससे स्पैम, उत्पीड़न और डेटा के दुरुपयोग का खतरा कम होगा।
•ग्रुप चैट में सुरक्षा: सदस्य बिना मोबाइल नंबर बताए बातचीत कर सकेंगे।
•डेटा न्यूनकरण: भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 जैसी गोपनीयता कानूनों के अनुरूप।
•ट्रैकिंग में कमी: स्कैमर्स आसानी से नंबर खोजकर टारगेट नहीं कर पाएंगे।
कमियाँ और जोखिम
•नकली पहचान (Impersonation): धोखेबाज़ ऐसे यूज़रनेम बनाएंगे जो असली अकाउंट से मिलते-जुलते हों (जैसे delhipoliceofficial बनाम delhipolice_official)।
•धोखाधड़ी बढ़ेगी: Telegram की तरह WhatsApp पर भी निवेश स्कैम, फर्जी नौकरी ऑफर और फ़िशिंग बढ़ सकते हैं।
•यूज़र भ्रमित होंगे: आम लोग असली और नकली अकाउंट में फर्क करना मुश्किल पाएंगे।
धोखेबाज़ों द्वारा दुरुपयोग
•मिलते-जुलते नाम: अक्षरों, अंडरस्कोर या नंबर जोड़कर असली अकाउंट जैसा दिखाना।
•फर्जी सरकारी/बैंक अकाउंट: पुलिस, बैंक या सरकारी विभाग के नाम से पैसे या डेटा माँगना।
•स्कैम ग्रुप्स: निवेश, लॉटरी या फर्जी योजनाओं के लिए ग्रुप बनाना।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चुनौतियाँ
•ट्रेसिंग में कठिनाई: पहले मोबाइल नंबर सीधे SIM और KYC से जुड़े होते थे। अब यूज़रनेम का कोई सीधा लिंक नहीं होगा।
•जाँच में बाधा: संदिग्धों को ट्रैक करना मुश्किल होगा क्योंकि यूज़रनेम बार-बार बदले जा सकते हैं।
•Telegram जैसा अनुभव: Telegram पर पहले से ही यूज़रनेम सिस्टम ने साइबर अपराध की जाँच को कठिन बनाया है।
•भारत में विशेष खतरा: WhatsApp पर परिवार, व्यापार और सरकारी संचार होता है। नकली यूज़रनेम से भरोसा टूट सकता है।
मोबाइल नंबर सिस्टम और यूज़रनेम सिस्टम में तुलना
•गोपनीयता — मोबाइल नंबर सिस्टम: कम (नंबर दिखता है) | यूज़रनेम सिस्टम: अधिक (नंबर छिपा)
•KYC से ट्रेसिंग — मोबाइल नंबर सिस्टम: मज़बूत (SIM से जुड़ा) | यूज़रनेम सिस्टम: कमजोर (सीधा लिंक नहीं)
•नकली पहचान का खतरा — मोबाइल नंबर सिस्टम: कम | यूज़रनेम सिस्टम: अधिक
•कानून प्रवर्तन — मोबाइल नंबर सिस्टम: आसान | यूज़रनेम सिस्टम: कठिन
•यूज़र सुविधा — मोबाइल नंबर सिस्टम: सरल, परिचित | यूज़रनेम सिस्टम: लचीला, पर भ्रमित करने वाला
*WhatsApp का Username फीचर यूज़र्स को गोपनीयता देगा, लेकिन साथ ही धोखाधड़ी और पुलिस जाँच में दिक्कतें भी बढ़ाएगा। भारत जैसे देश में, जहाँ WhatsApp आधिकारिक संचार का प्रमुख माध्यम है, ज़रूरी होगा कि WhatsApp Verified Username, Anti-Impersonation Checks और Law Enforcement Cooperation Mechanism लागू करे।*