@jayantrld हमारे आँगन में हर बिरादरी का घर है,
हर हाथ में हल है, हर माथे पे सबर है।
जो बाँटने आए थे, वो ख़ुद बँट के रह गए,
इस मिट्टी को अपनी जड़ों की ख़बर है।
रैली किसने कराई? अखिल भारतीय गुर्जर विद्या प्रचारिणी सभा ने।
मंच पर कौन थे? चंदन चौहान, मलूक नागर, अनिल कुमार।
और अब सपा बता रही है कि वो मंच "जातिवादी" था?
गुर्जर समाज खुद तय करेगा कि उसका सम्मान कौन कर रहा है — और उसे बाँटने की कोशिश कौन। 🚩
@jayantrld@RLDparty
सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते,
कोई बात नहीं थी…
जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई?
मैं इस अहंकार को देख चुका हूँ करीब से और मानता हूँ ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!
यहाँ का असली समीकरण जाति नहीं, गन्ना है। पर्ची, भुगतान, आवारा पशु और नौजवान का रोज़गार — शामली इसी पर वोट करता है।
जातियाँ अख़बार में बँटती हैं, खेत में नहीं। 🌾
शामली विधानसभा सीट पर जाट और मुसलमान वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में आरएलडी और बीजेपी का गठबंधन है जो चुनाव में पैठ बना रहा है। पिछली बार प्रसन्न कुमार चौधरी ने सपा-आरएलडी गठबंधन से जीत हासिल की थी। यहाँ जाट लगभग 70 हजार और मुसलमान 65 हजार वोटर हैं। दलित, वैश्य और अन्य जातियाँ भी निर्णायक भूमिका निभाती हैं। समीकरण हर चुनाव में बदलते रहते हैं पर जातीय और धर्म आधारित वोट हिस्सेदारी बनी रहती है। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार 2027 चुनाव बहुत कांटे की टक्कर होगा #Shamli #UPElection2027 #UPPolitics #RLD #BJP #WesternUP #CasteEquation
शिवपाल जी, आपने ख़ुद लिखा — "एयरपोर्ट को उनके नाम पर करने का प्रस्ताव रखा।"
प्रस्ताव। फ़ैसला नहीं। फ़ैसला 17 जुलाई 2008 को केंद्रीय कैबिनेट ने लिया, जब चौधरी अजित सिंह जी के तीन सांसदों की ताक़त थी। शब्द आपने ख़ुद सोच-समझकर चुना है — बाक़ी हम क्या कहें।
अब तीन सवाल, जिनका जवाब आपके पास नहीं है:
एक — प्रतिमा, विश्वविद्यालय, प्रस्ताव… सब हो गया। फिर भारत रत्न दशकों तक क्यों नहीं आया? आपकी पार्टी यूपी में भी रही, केंद्र में सरकारें बनाती-गिराती भी रही। वो सम्मान 2024 में आया।
दो — 13 फ़रवरी 2019, लोकसभा। नेताजी खड़े होकर कहते हैं — "मोदी जी दोबारा प्रधानमंत्री बनें।" वीडियो रिकॉर्ड में है। उसे आप क्या कहेंगे? और 2024 में जसवंतनगर में आपके अपने मुँह से क्या निकला था, वो भी रिकॉर्ड में है।
तीन — नेताजी की विचारधारा की दुहाई वो दे रहे हैं जिन्होंने 2018 में अलग पार्टी बनाई और 2019 में फ़िरोज़ाबाद से नेताजी की ही पार्टी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा। विचारधारा का आधार तब कहाँ था?
चौधरी साहब का पैमाना प्रतिमा नहीं, गन्ने का भुगतान है। और उसी 2019 में आपने उनकी विरासत को 80 में से 3 सीटें दी थीं। तीनों हारीं।
नाम देना अलग बात है। रास्ते पर चलना अलग।
चौधरी चरण सिंह जी के सम्मान को नेताजी ने सिर्फ शब्दों में नहीं, संस्थाओं और फैसलों में भी उतारा है - मेरठ विश्वविद्यालय को उनके नाम पर कर किसान-नेता की स्मृति को स्थायी बनाया और लखनऊ एयरपोर्ट को उनके नाम पर करने का प्रस्ताव रखा।
अपने पहले मुख्यमंत्रित्व काल में विधान भवन के सामने चौधरी जी की आदमकद प्रतिमा की स्थापना की।
चौधरी चरण सिंह जी का सपना था-किसान समृद्ध हो, गांव मजबूत हों और देश की तरक्की का आधार खेत-खलिहान बने। नेताजी ने इस विचारधारा को केवल सम्मान नहीं दिया, बल्कि उसे अपनी राजनीति का आधार बनाया और चौधरी साहब के नाम पर संस्थाओं को पहचान दी।
आज भाजपा चौधरी साहब का नाम तो लेती है, पर उनके किसान-केंद्रित विचारों पर चलने से क्यों बचती है?
समाजवादी पार्टी का संकल्प है-किसान सम्मान, गांव की खुशहाली और सामाजिक न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ना।
धोखे की परिभाषा सपा से सीखना बाक़ी है।
73 सीट वाली "खबर" कहाँ से आई? आपके ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के 18 अगस्त के ट्वीट से। पहले खुद अटकल लगाइए, फिर उसी को "सुनने में आया है" कहकर सवाल पूछिए — सपा मीडिया सेल का पूरा मॉडल यही है।
अब रिकॉर्ड की बात कर ही ली जाए —
2013, मुज़फ़्फ़रनगर। सरकार किसकी थी? 60 से ज़्यादा जानें गईं, हज़ारों परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा। जस्टिस विष्णु सहाय आयोग ने प्रशासन और स्थानीय ख़ुफ़िया तंत्र की लापरवाही पर सवाल खड़े किए — और वो रिपोर्ट मार्च 2016 में आपकी ही सरकार ने सदन के पटल पर रखी थी। पश्चिमी यूपी का भाईचारा किसके राज में टूटा, ये जाट समाज भूला नहीं है।
13 फ़रवरी 2019, लोकसभा। नेताजी मुलायम सिंह यादव जी ने सदन में खड़े होकर कहा था कि मोदी जी दोबारा प्रधानमंत्री बनें — उस वक़्त आप गठबंधन में थे। इसे आप क्या नाम देंगे?
2019 का हिसाब। 80 में से RLD को कितनी सीटें दीं आपने? तीन — बागपत, मथुरा, मुज़फ़्फ़रनगर। तीनों हारीं। चौधरी अजित सिंह जी तक चुनाव हार गए। जाट और किसान समाज के लिए "सम्मान" की सपाई परिभाषा यही थी।
और जो काम दशकों तक कोई सरकार नहीं कर पाई — चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न — वो हुआ। आपके साथ रहते हुए कभी नहीं हुआ था।
चौधराहट सीटों की गिनती से तय नहीं होती। वो खेत, किसान और गन्ने के भुगतान से तय होती है — और उस कसौटी पर आपका बहीखाता खाली है।
वैसे, यूपी में 400 नहीं — 403 सीटें हैं।
जय जवान, जय किसान।
जब भाजपा चौधरियों की चौधराहट खत्म कर रही थी तब जयंत जी क्यों भाजपा से जाकर मिल गए? ये बात जाट समाज आज जयंत जी से पूछ रहा है
जयंत जी ने सिर्फ सपा को धोखा नहीं दिया था बल्कि संपूर्ण जाट और किसान समाज को धोखा दिया था वो भी तब जब किसान आंदोलन में जाटों और किसानों को भाजपा ने बदनाम किया था, अपमानित किया था और तमाम किसानों की जान ले ली थी
भूल गए क्या जाट समाज की बेटियों का अपमान? भूल गए क्या जब जाट समाज की बेटियों को खींचा गया था, उनके साथ अश्लीलता की गई थी भाजपा सरकार द्वारा?
इसीलिए अगर जयंत जी भाजपा से यूपी की 400 में से 100 सीट से कम लेते हैं तो वे चवन्नी से भी गए गुजरे माने समझे जायेंगे, 100 सीट भाजपा से छीनकर दिखाओ तब जानें? वैसे सुनने में ये आया है कि भाजपा जयंत जी को यानी RLD को 73 सीट देने पर मान गई है, लेकिन 73 सीट भी कम हैं, कम से कम 100 सीट तो RLD को लेनी ही चाहिए
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष @jayantrld ने एक वाक्य में जवाब दे दिया —
"जनता जनार्दन है।"
न किसी ने किसी को बनाया, न कोई किसी को मिटा सकता है। नेता जनता बनाती है — यही लोकतंत्र है।
अगर ये दल सच में इतने ही कमजोर हैं, इनके पास वोट नहीं है, सीट नहीं मिलेगी और राजनीतिक भविष्य खत्म है—तो फिर समाजवादी पार्टी का मीडिया सेल इन पर इतना समय क्यों खर्च कर रहा है? जिसे आप खत्म बता रहे हैं, चर्चा भी सबसे ज्यादा उसी की कर रहे हैं। राजनीति में असली ताकत पोस्ट लिखने से नहीं, जनता के बीच साबित होती है।
दरअसल समाजवादी पार्टी ने धोखा देकर जाने वाले सारे चवन्नी छाप दलों और उनके नेताओं की "बार्गेनिंग पॉवर भाजपा में शून्य" कर दी है
अब भाजपा उन चवन्नियों को भीख में सीटें पकड़ाएगी, जिसे सपा ने दर्जनों में सीटें लड़ने को दी थीं उसे भाजपा दहाई अंक तक में सीटें नहीं देगी
इसीलिए उक्त सभी चवन्नी दुअन्नी इकन्नी बौखलाए हुए हैं, भाजपा भी जानती है इन चवन्नियों, दुअन्नियों, इकन्नियों के पास न और है न ठौर, ये कहीं जाने लायक नहीं बचे, इसीलिए भाजपा इन्हें इनकी सही औकात दिखाने की तैयारी में है और इसीलिए ये सब चवन्नी, दुअन्नी, इकन्नी बौखलाए हुए हैं, क्योंकि ये पहले भाजपा और दूसरे दलों को ब्लैकमेल करके सीटें ले लेते थे, अब किसी से मुंह दिखाने, सीटें पाने लायक नहीं बचे हैं
इन सभी चवन्नी दुअन्नी इकन्नी दलों का सबसे बुरे हश्र वाला चुनाव है, ना तो इन्हें सीटें बेचने को मिलने वाली हैं ना ही इन्हें वोट मिलेगा, इसीलिए बेचारे परेशान हैं
सबसे ज्यादा परेशानी तो भाजपा और भाजपा के साथी इन्हीं चवन्नी छाप दलों के नेताओं के अंदर है, क्योंकि उनके तो पूरे पॉलिटिकल करियर पर ही फुल स्टॉप लगने वाला है
मज़ाक अच्छा था, लेकिन PDA के नाम पर जातीय जोड़-तोड़ की राजनीति करने वाले दूसरों के जनाधार पर हँसें, ये उससे भी बड़ा मज़ाक है।
पहले अपनी राजनीति को “जातीय कैलकुलेटर” से बाहर निकालिए, फिर RLD की ताकत नापिए।
सूत्रों के हवाले से आई ये ख़बर बेहद स्वागत योग्य है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी हार सामने देखकर, ‘पीडीए’ के दबाव-जवाब में अपने सहयोगी दलों को इधर-उधर छटकने से बचाने के लिए, कुछ चुनावी विशेषज्ञों की सलाह पर निम्न विवरण के अनुसार सीटें देने की योजना पर काम कर रही है :
- आरएलडी : 73 सीटें
- सुभासपा : 39 सीटें
- निषाद पार्टी : 31 सीटें
- अपना दल : 19 सीटें
यूं देखे तो ये एक सराहनीय बात है लेकिन पीडीए की जनसंख्या के अनुपात में ये भी आधे से कम ही है, इसीलिए ये योजना बुरी तरह असफल ही होगी। भाजपा का ये बड़ा प्लान इसलिए भी फ़ेल ही होगा क्योंकि :
- धर्म-धन चुराकर रामघात करनेवाले
- दुखी-माता का अपमान करनेवाले,
- बच्चों पर लाठियाँ चलवानेवाले
- भ्रष्टाचार-महंगाई-बेरोज़गारी बेतहाशा बढ़ानेवाले
- शिक्षा-परीक्षा में महा-घपला करनेवाले
- स्वास्थ्य सेवाओं को बीमार करनेवाले
- बिजली के लिए तड़पानेवाले
- सड़कों और अन्य निर्माणों को जानलेवा बनानेवाले
- चारित्रिक पतन के नये कीर्तिमान बनानेवाले
- झूठे मुक़दमों व फ़ेक एनकाउंटर करनेवाले
- लोगों के घरों-दुकानों पर बुलडोज़र चढ़वानेवाले
- लोगों को पुलिस हिरासत में मरवानेवाले
- प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक बंद शिक्षालय बंद करवानेवाले
- टीचरों से चारा इकट्ठा करवानेवाले
- आशा, आंगनबाड़ी, सहायिका और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को आंदोलन करने पर मजबूर करनेवाले
- व्यापारियों-दुकानदारों-कारोबारियों का अधिकतम मुनाफ़ा घूस में खा जानेवाले
- खिलाड़ियों तक से पैसा खानेवाले
- कलाकारों के यश भारती सम्मान और उनको मिलनेवाली सम्मान राशि समाप्त करनेवाले
- किसान, मज़दूर, मेहनतकश और पेशेवरों व अन्य सभी को उनका हक़-अधिकार न देनेवाले
- अल्पकालिक अग्निवीर लाकर सालों से भर्ती के लिए मेहनत करनेवालों का मनोबल तोड़नेवाले
- विज्ञान और वैज्ञानिकों को मान न देनेवाले
- 69000 जैसी अनेक भर्तियों में आरक्षण मारनेवाले
- देश की संपत्ति बेचनेवाले
- संविधान को बदलने की साज़िश करनेवाले ‘भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों’ को अब जनता पूरी तरह नकार चुकी है और सदैव के लिए विदा करने के लिए बेसब्र है।
जन-जन कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
राजनीति में तंज कुछ पल की सुर्खियाँ दे सकता है,
लेकिन सम्मान और रिश्तों की राजनीति दूर तक जाती है।
जयंत चौधरी पर टिप्पणी सिर्फ एक नेता पर टिप्पणी भर है या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा संदेश—इसका जवाब आने वाला वक्त देगा।
#UttarPradesh#JayantChaudhary #2027
आज जो लोग यह कह रहे है चवन्नी से हमने रुपया बना दिया उनको याद रखना चाहिए तुम क्या मुख्यमंत्री बनते पिताजी भी नहीं बन पाते,अपने ही लोगों ने चौधरी अजीत सिंह का रास्ता रोक दिया अगर रास्ता नहीं रोका होता तो निश्चित रूप से मुख्यमंत्री ही नही बल्कि देश के सबसे काबिल प्रधानमंत्री होते
मान मिले तो साथ बढ़े, अपमान से दूरी होय,
जनता जिसके संग खड़ी, उसकी शक्ति न खोय।
खेत-खलिहान की आवाज़ फिर दिल्ली तक जाएगी,
2027 की नई सुबह, पश्चिम से ही आएगी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने लखनऊ प्रवास के दौरान Swami Avimukteshwaranand Saraswati से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच विभिन्न धार्मिक और समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई।
#AkhileshYadav#SwamiAvimukteshwaranand#Shankaracharya#Lucknow #SamajwadiParty
हमारी और इकरा हसन जी की राजनीतिक विचारधारा भले अलग हो, लेकिन उनके प्रति जिस प्रकार की अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं, वह समाज की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादा दोनों के विपरीत है।
#RLD4Womens
हमारी और इकरा हसन जी की राजनीतिक विचारधारा भले अलग हो, लेकिन उनके प्रति जिस प्रकार की अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं, वह समाज की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादा दोनों के विपरीत है।
#RLD4Womens