CJP राजस्थान में जर्जर स्कूलों का सर्वे कर रही है। इसकी जरूरत नहीं है। शिक्षा विभाग के पास पूरा डेटा है। कहां-कितने और खतरनाक कहां-कहां। जरूरत सर्वे की नहीं। सच में स्कूलों को ठीक करने की है। CJP के पास इंस्टाग्राम पर करीब ढाई करोड़ फॉलोअर्स हैं। CJP एक व्यक्ति से एक-एक रुपया भी दान के रूप में ले तो ढाई करोड़ जमा होते है। आइडिया यह है कि इस पैसे से राजस्थान के चार-पांच स्कूलों का कायाकल्प हो सकता है। CJP यह करके दिखाए और फिर सरकार को चुनौती दे। जंतर-मंतर पर चीखकर सवाल पूछे- जब हम यह तीन-छह महीनों में कर सकते हैं तो महाशक्तिशाली सरकार सालों से चुप क्यों है?
नमस्कार @IndiaPostOffice राखी का पार्सल स्पीड पोस्ट (ER682011919IN) से भेजा था। लेकिन 21/8/2026 तारीख के बाद से ट्रैकिंग में कोई अपडेट नहीं है। त्योहार के समय आपकी "स्पीड" पोस्ट का यह हाल है? अगर राखी ही समय पर नहीं पहुँची तो इस सर्विस का क्या फायदा? कृपया तुरंत संज्ञान लें
अब क्या ही बोले 🤔🤔🤔🤔
लोकल चुनाव में युवाओं से उम्मीद है इस पोस्टर का जवाब जरूर दिया जाएगा ।
जोड़कर देखे -1.78 लाख + 51427 + 81023 +70031 =???
एक लाख का कैलेंडर जारी किया जिसमे से 81023 बाकी है बजट घोषणा का वर्गीकरण तक नहीं हुआ फिर भी आंकड़ा आर पार 🙏🙏🙏
बीजेपी का कोई भी नेता इस गणित को समझा दे तो मीडिया या ओपन डिबेट के लिए युवाओं की तरफ़ से हम तैयार है 🤔🤔🤔🤔🤔🤔
झूठ पर झूठ इस लेवल का भगवान सब देख रहा है
आप चाहे किसी भी पीढ़ी के हों,
Boomers, Gen X, Millenial, Gen-Z या Gen-Alpha
कभी भी कश्मीर , लद्दाक, अरुणाचल जैसी दुर्गम जगह पर घूमने अगर जा रहे हैं, तो मन में कृतज्ञता का भाव लेकर जाइएगा ।
क्यूँकि जो आपके लिए महज सैर-सपाटा है, उसे महफ़ूज़ रखने के लिए भारतीय सेना अपना ख़ून बहाती है ।
(ऐसी ही एक की एक वीडियो ,
18000 फीट पर,
पहाड़ों के ऊपर,
बंकरों में,
जहाँ सड़कें नहीं पहुँचती,
वहाँ भारतीय सेना के जवान अपने बंदूक की ट्रिगर पर उँगलियाँ रख तैनात रहते हैं, ताकि आपको आज़ादी मिलते रहे बुद्धिजीवी बन कर बात करने की)
🇮🇳 Minamarg Check Post Incident | Ladakh Sector
A video from the Minamarg (Minimarg) check post has circulated showing a tourist arguing with security personnel over a temporary road restriction.
The Indian Army, in coordination with local police and civil administration, implements such measures as a routine and essential part of anti-terrorism and security operations in this highly sensitive high-altitude border region near the LoC.
Road closures, cordons, and regulated movement are standard when:
• Intelligence or operational requirements demand a search/cordon to neutralise potential threats
• Weather, landslides, or convoy movements require safety clearances
• The safety of residents, tourists, and troops must be prioritised
These are not arbitrary or “anti-tourist.” They exist precisely so that civilians, including tourists can travel safely in an area that has historically faced infiltration and terror risks.
Compromising a security protocol for individual convenience could endanger dozens of lives.
To the individual in the video and similar voices:
Being “Gen Z” (or any generation) is not a qualification, a badge of entitlement, or a licence to disregard security protocols. National security does not pause for slogans, tax receipts, or generational self-identification.
Comparing legitimate operational restrictions to “locking Kashmiris” is both factually misleading and disrespectful to the forces who protect every citizen, Kashmiri, tourist, or otherwise in this challenging terrain.
Threatening Parliament while creating a public confrontation at a sensitive post does not strengthen democracy; it risks operational security.
We urge all visitors and residents:
Support these measures. They are conducted for your safety and the nation’s security. Patience and cooperation save lives.
The Army and police work hand-in-hand daily so that tourism and normal life can continue in J&K and Ladakh.
Respect the uniform. Respect the protocol. Respect the reality of the frontier.
#IndianArmy #NationFirst #SecurityFirst #JandK #Ladakh #WeCare
@adgpi@lg_ladakh@OpIndia_com@DGP_Ladakh@KargilPolice@LehPolice@trafficpoliceLA@JmuKmrPolice@SrinagarPolice@DIPR_Leh@Incognito_qfs@BundelKhandee@theskindoctor13@SaffronChargers@RealAnujX
@TRAI Yes mere pass jio ke sim hai 2gb data milta hai but 1 gb bhi shi se use nhi ho pata hai net chlta he nhi hai
Bs pese le lete hai
Aur aap log kya karte ho kuch action lo
सरकार मान रही है कि उसके स्कूलों की हालत ख़राब है। दिखाने लायक नहीं है। सरकार को अगर एक स्कूल पर भी भरोसा होता तो इसी आदेश में लिखती कि केवल दस स्कूलों में कोई भी आ सकता है, देख सकता है और वीडियो बना सकता है। वो काफी शानदार हैं। मतलब दस स्कूल भी नहीं है। पब्लिक स्कूल में मीडिया को जाने से कैसे रोक सकते हैं? सरकार को अब डर लगने लगा है। एंटी मुस्लिम टॉपिक छोड़ कर लोग स्कूल की बात करने लगे हैं। सरकार स्कूलों की बात नहीं चाहती है। दिमाग़ी रूप से सरकार बीमार हो गई है।
राजस्थान में स्कूलों में वीडियो ग्राफी पर पाबंदी के आदेश को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा है।
गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या यह आदेश जारी करने से पहले सभी मंत्रियों की सहमति ली गई थी?
उन्होंने सरकार से आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
दिलावर जी,
ये फालतू का तर्क मत दो . आपको बच्चों की निजता की चिंता नहीं , स्कूलों की दुर्दशा के खुलासे की चिंता है .
स्कूलों को ठीक करो वरना आपकी तमाम पाबंदियों को ठेंगा दिखाकर बच्चे ही स्कूलों का वीडियो बना -बनाकर वायरल करने लगेंगे.
आपकी सरकार को बच्चे ही एक्सपोज करेंगे .
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर जी,
जोधपुर जिले का है यह सरकारी स्कूल। देखते हैं; आपका विभाग क्या इस स्कूल का पता लगाकर स्कूल भवन का आदेश निकाल पाता है या नहीं? जैसे स्कूल में एंट्री बैन का आदेश निकाला था।
@madandilawar@rajeduofficial
गोविंद डोटासरा ने अपने शिक्षा मंत्री वाले कार्यकाल में राजस्थान के सभी स्कूलों में संगमरमर लगवा दिया था,
लेकिन भजनलाल शर्मा ने छेनी हथोड़ी से सारे स्कूल तोड़ डाले, तुम सब एक थाली के चट्टे बट्टे हो
डोटासरा साहब ,
एक पुरानी कहावत है
'सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद'
राजस्थान में 2018 से 2023 तक पांच साल आपकी सरकार थी . आप खुद भी तीन साल तक शायद शिक्षा मंत्री रहे .
राजस्थान के स्कूलों का बुरा हाल तो तब भी रहा होगा . ऐसा तो है नहीं कि आपकी सरकार ने सारे स्कूलों को चकाचक कर दिया था और बीजेपी की सरकार आते ही ये स्कूल जर्जर हो गए या छात्रों के लिए सुविधाएं खत्म हो गईं.
हर पांच साल पर राजस्थान में सरकारें बदलती रही लेकिन स्कूलों की दशा नहीं सुधरी .
अच्छी बात है कि विपक्ष में रहते आपको ये खामियां दिख रही है , सत्ता में रहते आप लोगों ने संकल्प लिया होता तो आज कुछ बेहतर स्थिति होती .
हमाम में सब नंगे हैं
देश आज़ादी का जश्न मना रहा है और उधर 14 दिन से भूखे प्यासे बैठे व्यक्ति के साथ ये हो रहा है झारखंड में।
ये है आज़ादी?
“हम लेकर रहेंगे आज़ादी” का नारा लगाने वाले कहीं नहीं दिखेंगे अब इसपर छाती पीटते।
कॉकरोच अभी BJP शासित राज्य घूमने में बिजी हैं।
गजबे है