कल माननीय बहन @Mayawati द्वारा श्री @AnandAkash_BSP जी को पुनः वापसी एवं राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी। उसके लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई, और माननीय बहन जी हार्दिक आभार
आदरणीय ब��न कु. मायावती जी, सादर चरणस्पर्श।
आपने मुझे क्षमा किया और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक की ज़िम्मेदारी दोबारा सौंपी। इस भरोसे के लिए मैं तहे दिल से आपका आभारी हूँ, और इसे मैं हल्के में कभी नहीं ले सकता हूँ।
पिछले कुछ समय ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। सबसे बड़ी सीख यह है कि यह मूवमेंट किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ा है। परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी और मान्यवर श्री कांशीरा�� जी ने जो रास्ता दिखाया, और जिस पर आपने अपना पूरा जीवन लगा दिया, उस पर चलना मेरा सौभाग्य है।
इसलिए आपके दिशा-निर्देशन में पार्टी और मूवमेंट का हित ही मेरे लिए सर्वोपरि रहेगा। मैं अपने सभी व्यक्तिगत हितों को त्यागकर, अनुशासन और पूरी निष्ठा के साथ, संगठन को मज़बूत करने के लिए दिन-रात काम करूँगा।
आपने मुझ पर भरोसा किया है। अब उसे अपने काम से सही साबित करना मेरी ज़िम्मेदारी है।
जय भीम, जय भारत।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिय��� गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने क�� लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों ���े साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्र��� आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
विधान परिषद के सदस्य माननीय भीमराव जी ने सदन में शिक्षक भर्ती घोटाले में सरकार और पिछड़े-दलित समाज का वोट लेकर सरकार में शामिल चमचे नेताओं का काला चिठ्ठा खोलकर रख दिया।
पिछड़ों-दलितों की आवाज को सदन में मज़बूती से उठाने के लिए माननीय भीमराव अंबेडकर जी आपका बहुत आभार।
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़���सले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
1.��ैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहा��ा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बी.एस.पी. की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’ (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज़्यादा नज़र आती है��
2.इसका एक और ख़ास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में श्री रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार श्री धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ’फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिये होगा।
3.तो इस प्रकार क�� है सपा, उसका ’पीडीए’ (PDA) व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूँजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ’पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही।
4.वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिये ख़ासकर अपरकास्ट समाज के ग़रीबों तथा ’बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही ज़रूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिये कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बी.एस.पी. में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
@etawahpolice@Uppolice@adgzonekanpur एक सरकारी अध्यापक होने के कारण वो भी दूसरे जिल�� में ड्यूटी, परेशानी। @etawahpolice से निवेदन है इस वक्त कड़ी कार्रवाई करके गाड़ी को तलाश ने की प्रक्रिया तेज की जाए।
थाना सैफई जिला इटावा अंतर्गत मेरी कार सैफई PGI से महेश कुमार जी नामक व्यक्ति की चोरी हुई थी लेकिन चोर अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए है और बदमाश. उस कार को थाना सैफई व वैदपुरा अंतर्गत ले कर खुले आम घूम रहे है @Uppolice@adgzonekanpur@etawahpolice
अमित शाह जी बोल रहे हैं कि इनको शायद राजनीति कमी।तब ज्यादा सक्रिय भी ना हो, इसीलिए ज्यादा जानकारी भी ना हो 2007 से 12 तक की सरकार को याद करिए।
इन जैसे तड़ीपार लोगों को हमारे आदरणीय युवा भाई श्री @AnandAkash_BSP जी अच्छे तरीके से इनका जवाब देते थे
अमित शाह कह रहे हैं कि सपा-बसपा की सरकार में अपराध की इंडस्ट्री चल रही थी, कट्टा और अवैध तमंचों की इंडस्ट्री लगती थी।
समाजवादी पार्टी का जैसा शासन हो वह किसी से छिपा नहीं है लेकिन रही बसपा के शासन काल की तो जब बसपा की सरकार बनी तो प्रदेश में लाखों अपराधियों को गुंडा एक्ट के तहत जेल भेजने का काम बहन कुमारी मायावती जी ने किया और बाकी जो बचे थे वह या अपराध छोड़ दिए या फिर प्रदेश छोड़कर भाग गए और तो और जब बसपा की सरकार थी तब प्रशासन ख़ुद पीड़ित परिवार की दहलीज पर मुक़दमा लिखता था और गाँव गाँव जाकर लोगों से पूछते थे कि आपको कोई परेशान तो नहीं कर रहा है।
ये बात मैं कोई मनगढ़त नहीं कह रहा हूँ आज भी प्रदेश की जनता ख़ुद स्वीकार करती हैं और कहती हैं कि क़ानून व्यवस्था सबसे अच्छी बसपा की सरकार में थी प्रदेश की महिलाएँ ख़ुद को सुरक्षित महसूस करती थीं और लॉ एंड ऑर्डर क्या होता है यह बहन कुमारी मायावती जी ने अपनी सरकार में बताया था।
1. यूपी के आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार���टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित ’पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम तथा आरएसएस/भाजपा के ’भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से ��पा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है?
2. वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को उनके द्वारा अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद भी यह पार्टी (सपा) यूपी व केन्द्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाये और इस मामले में अब वे अपरकास्ट में से ख़ासकर ब्राह��मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बी.एस.पी. के पक्ष में बदल रहे हैं।
3. क्योंकि बी.एस.पी. यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहाँ कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है।
4. इसके साथ ही, सपा को य�� भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिये कि अब इनके ’पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन्होंने कभी ’पीडी’ को ’पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ’पीडी’ को ’पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ’अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बी.एस.पी. का ’नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, किन्तु इसको लोगोें ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया।
5. जबकि इसके विपरीत, बी.एस.पी. सर��वसमाज हेतु ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आदि का जीवन जीने की पक्षधर है। इसीलिये सर्वसमाज में बी.एस.पी. का अपना सम्मान है।
Lucknow, Uttar Pradesh: On BSP chief Mayawati announcing a new responsibility for Ishan Anand, AIMIM chief Asaduddin Owaisi says, "Mayawati is a very prominent leader of this country. On her own strength and without any family support, she formed a government with a complete majority and became Chief Minister several times. It is a matter concerning her party, and she will decide."
1. आज मेरा ��ुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है,
* इसीलिए बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी ने राजनीति में आने के बाद, फिर अपने सभी नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही इजाज़त दी है। इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी, अपना ख़ुद का परिवार ना बनाकर, ’बहुजन समाज’ के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है।
2. जिनसे प्रेरित होकर फिर मैंने भी उन्हीं के ही पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और अपनी पूरी ज़िन्दगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर द��� है।
* लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी ना किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत् ही मेरा छोटा भाई श्री आनन्द कुमार यह पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है।
3. और इनके विशेष आग्रह करने पर फिर इनके परिवार में से मुझे इनके बड़े बेटे श्री आकाश आनन्द को राजनीति में आगे करना पड़ा है।
* जिनकी शादी होने के बाद से अब श्री आकाश आनन्द का क़दम-क़दम पर ऐसा रवैया व गतिविधियाँ आदि रही हैं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है।
* अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापिस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूँ।
4. ऐसे में अब मैं श्री आनन्द कुमार के परिवार में से किसको पार्ट��� में आगे करूँ या ना करूँ, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा सी बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गम्भीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि इनके परिवार में से ऐसे किसी सदस्य को अब पार्टी में आगे किया जाये, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले।
5. और जहाँ तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि श्री आकाश ��नन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा।
* ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा।
6. और अब इन दोनों के स्थान पर श्री आनन्द कुमार के परिवार में से केवल श्री ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक ज़िम्मेवारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है
7. फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में श्री आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी ���ोटी-बड़ी ज़िम्मेवारी नहीं दी जायेगी।
* बल्कि इसके स्थान पर, तब फिर पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जायेगा। इसलिए देश व जनहित के ज़रूरी मुद्दों के साथ-साथ इस ख़ास मुद्दे को भी लेकर अब दिनांक 23 सितम्बर की बी.एस.पी. की अत्यन्त ज़रूरी ऑल-इण्डिया की बैठक बुलाई गई है ताकि फिर पार्टी के लोग अपनी पार्टी के कार्यों में पूरे जी-जान से जुट जायें।
8. अन्त में अब मैं यही कहना चाहती हूँ कि ख़ासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में मैंने यह फैसला मान्यवर श्री कांशीराम जी से प्रेरित होकर तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के भी लिखे गये एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है:
9. बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने, दिनांक 23 फरवरी सन् 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बम्बई में अपने पुत्�� श्री यशवन्त बी. अम्बेडकर को पत्र में लिखा है कि,
* मुझे तम्हें सूचित करना है कि श्री उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिन्टिंग प्रेस के एकाउण्टेन्ट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो।
* तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूँ कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउ���्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है।
* तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है...अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन (मुक़दमा) (prosecute) भी करूंगा।
10. संक्षेप में अब मैं अपने ख़ुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूँ कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है ���था सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूँ, जैसाकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।
1. बहुचर्चित सामाजिक न्याय की ज़रूरत व माँग भी यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में यदि इस बात की पुरज़ोर पैरवी करती कि एससी समाज के ��ित व कल्याण हेतु ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से ज़िला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, क़न्नौज व जालौन में बनाये गये मेडिकल कालेजों में एससी वर्ग हेतु अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है और इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है, तो शायद माननीय कोर्ट इस पर ज़रूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता।
2. किन्तु अब जबकि मा. हाईको���्ट ने इस पर पाबन्दी लगा दी है और मेडिकल दाख़िला भी अब यहाँ इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यूपी सरकार तुरन्त मा. सुप्रीम कोर्ट में आपेक्षित राहत के लिये अपील करे तो यह उचित होगा।