अब तो हद ही कर दी है, काँग्रेस विधायक 'विनेश फोगाट' ने,
कल ट्रायल मैच हार गई, तो अब कह रही है, मेरा हाथ पकड़ लिया, मुझे गिरा दिया.
मुझे चीटिंग से हरा दिया, इतना भी विक्टिम कार्ड मत खेलो, ऐसे ही काँग्रेस करती है चुनाव में हारने के बाद
EVM हैक हो गया, चुनाव आयोग मिल गया। 😂
खुलासा- बंगाल का रिजल्ट आने पर अखिलेश जी 4 घंटा बेहोश रहे जब होश आया तो बंगाल पहुँचे सांत्वना देते हुये कहा दीदी आप 1 बार हारी हो, हम तो दुई बार हारे हैं, और जब तीसरी बार हारेंगे तो आप भी सांत्वना देने आना। 😀😀
रात काफ़ी हो चुकी थी।
मोबाइल स्क्रीन पर चुनावी बहसें अब भी जल रही थीं।
तभी एक भाजपा समर्थक का कमेंट दिखा -
“ठीक है बंगाल और असम में जीत का जश्न मना लो…
लेकिन तमिलनाडु में इतना खराब प्रदर्शन?
उस पर भी कभी सोचिए!”
कमेंट पढ़कर कई लोग जवाब देने लगे।
किसी ने लिखा -
“इस बार एक सीट आई है… अगली बार दस भी आ सकती हैं।”
किसी और ने कहा -
“बंगाल में भी तो कभी भाजपा सिर्फ 3 सीटों पर थी।
फिर 77 तक पहुँची… और अब 200 पार के सपने देख रही है।
ये लोग जल्दी हार मानने वालों में नहीं हैं।”
यहीं से सोचने वाली बात शुरू होती है।
देश में कई पार्टियाँ बनीं…
कुछ परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहीं।
कहीं पिता के बाद बेटा, फिर बहू, फिर पोता…
और धीरे-धीरे विचारधारा पीछे छूटती चली गई।
मुलायम सिंह यादव की पार्टी हो,
मायावती की राजनीति हो,
या फिर परिवारवाद के आरोपों में घिरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस -
चेहरे वही रहते हैं, बस नारे बदलते रहते हैं।
लेकिन भारतीय जनता पार्टी की कहानी थोड़ी अलग दिखाई देती है।
एक दौर में लगता था कि अटल बिहारी वाजपेयी के बाद पार्टी शायद कमजोर पड़ जाएगी।
फिर समय बदला…
और नरेंद्र मोदी सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे।
आज लोग पूछते हैं - “मोदी के बाद कौन?”
लेकिन शायद यही सवाल हर दशक में पूछा जाता रहा है…
और हर बार कोई नया चेहरा सामने आ गया।
यही वजह है कि भाजपा सिर्फ एक चुनावी पार्टी नहीं लगती,
बल्कि एक लगातार चलने वाली विचारधारा का अभियान दिखाई देती है।
उसके पीछे खड़ा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ -
एक ऐसा संगठन, जिसने सत्ता से ज़्यादा समय को महत्व दिया।
जिसने पाँच साल नहीं, पीढ़ियों की राजनीति सोची।
1925 से शुरू हुआ सफर…
न जाने कितनी सरकारें आईं और चली गईं,
लेकिन शाखाओं में हर सुबह वही प्रार्थना गूंजती रही।
किसी ने बड़ी दिलचस्प बात कही -
“भाजपा के अब तक बने दोनों प्रधानमंत्रीयों की कोई संतान नहीं थी।”
अटल बिहारी वाजपेयी…
फिर नरेंद्र मोदी…
और लोग अब मज़ाक-मज़ाक में कहते हैं,
“अगर कभी योगी आदित्यनाथ देश की कमान संभाल लें,
तो ये धारणा और मजबूत हो जाएगी कि संघ ऐसे लोगों को आगे बढ़ाता है,
जो खुद को परिवार से पहले संगठन को समर्पित कर दें।”
शायद यही वजह है कि हार इनके लिए अंत नहीं होती।
तमिलनाडु में एक सीट मिली?
तो वो उसे शुरुआत मानते हैं।
केरल में तीन सीटें आईं?
तो उसे भविष्य की दस्तक समझते हैं।
क्योंकि जो संगठन सौ साल तक बिना थके इंतज़ार कर सकता है,
उसे 10–20 साल लंबा समय नहीं लगता।
देशभर में हजारों शाखाएँ, लाखों स्वयंसेवक…
और हर पीढ़ी में नए चेहरे तैयार करने की क्षमता -
यही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
आप उस विचारधारा से सहमत हों या असहमत,
लेकिन एक बात माननी पड़ेगी -
जिस मशाल को 100 साल तक बिना बुझने दिए आगे बढ़ाया जाए,
उसके पीछे सिर्फ राजनीति नहीं,
बहुत गहरी संगठन शक्ति और धैर्य छिपा होता है।
और शायद इसी वजह से विरोधियों की असली चिंता हार नहीं,
बल्कि वो लंबी तैयारी है…
जो धीरे-धीरे पूरे देश के नक्शे पर अपने रंग भरती चली जा रही है।
लोकप्रियता! बंगाल में योगी जी जा रहे थे लोग उन्हें देखकर “जय श्रीराम” का उद्घोष करने लगे। उसी बीच एक बच्ची तस्वीर लिये खड़ी थी। योगी जी ने काफिला रोक दिया और उससे मिले। ❤️
ABP पत्रकार -- रवीन्द्रनाथ भट्टाचार्य पहले ममता के साथ थे आज BJP मे है ?
अमित शाह --ABP भी आज ममता के साथ है चुनाव के बाद हमारे साथ आएगी 😂
मोटा भाई ने @mayukhrghosh को रेल दिया 😂
आज सुवेन्दु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे.
बीजेपी विधायक कालिता मांझी कहती हैं वो अपने पति और बेटे के साथ शपथग्रहण में जाने का प्लान कर रही हैं,
लेकिन उनके पास इस मौके के लिए कोई सुंदर साड़ी नही है.
कालीता मांझी की इस सादगी को देखते हुए जहां वो बर्तन धोने का काम करती हैं उस परिवार ने महंगी साड़ी उपहार के रूप में देने का फैसला किया है.
कालीता मांझी की जीत ने दिखा दिया एक गरीब महिला भी विधानसभा जा सकती है. हर राजनीतिक दल को 10% टिकट गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को टिकट देना चाहिए.
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में चार मुसलमानों ने एक हिंदू एमडी कर रही छात्रा का बलात्कार करके मार दिया था
मुख्य आरोपी जो मुस्लिम था वह तृणमूल कांग्रेस का नेता था
बड़ी बेरहमी से कत्ल किया था
पूरे बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश में इस घटना के प्रति गुस्सा था
ममता बनर्जी की पुलिस आरोपियों को बचाने में जुट गई क्योंकि मुख्य आरोपी मुस्लिम था और तृणमूल कांग्रेस का नेता था
फोरेंसिक एक्सपर्ट के आए बिना घटनास्थल को खोल दिया गया 200 से ढाई सौ लोग गए ताकि पूरा डीएनए नष्ट हो जाए
और इस घटना के विरोध में जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और छात्रों ने लंबे समय तक विरोध किया था तब इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला डॉक्टर ने कालीका का नृत्य किया था
और ऐसा लग रहा था कि उस महिला डॉक्टर के अंदर साक्षात काली मां आ गई है और उन्होंने कहा था कि डायन तू भस्म होगी डायन तेरा राज जाएगा